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यह बात सुनने में भले ही साइंस फिक्शन लगे, लेकिन अब यह सिर्फ कल्पना नहीं है! जून 2025 में, अमेरिकी रक्षा अनुसंधान एजेंसी ...
05/07/2025

यह बात सुनने में भले ही साइंस फिक्शन लगे, लेकिन अब यह सिर्फ कल्पना नहीं है! जून 2025 में, अमेरिकी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) ने न्यू मैक्सिको में एक अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने लेजर तकनीक की मदद से 800 वॉट ऊर्जा को 5.3 मील (8.6 किमी) दूर सफलतापूर्वक भेजा है! इस 30 सेकंड के प्रयोग में 1 मेगाजूल से अधिक ऊर्जा भेजी गई, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह सफलता साबित करती है कि लंबी दूरी तक वायरलेस बिजली भेजना अब कोई सपना नहीं, बल्कि एक उज्ज्वल वास्तविकता है। एक शक्तिशाली लेजर और विशेष रिसीवर का उपयोग करके, हवा में उड़ने वाले ड्रोन, बिना ईंधन वाले सैन्य ठिकाने, और यहां तक कि दुर्गम क्षेत्रों में भी बिजली पहुंचाना संभव होगा। आश्चर्यजनक रूप से, वायरलेस बिजली भेजने का यह सपना लगभग एक सदी से भी पहले महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने देखा था। उन्होंने 'वर्ल्ड सिस्टम' नामक एक विशाल टावर के निर्माण के माध्यम से दुनिया भर में वायरलेस बिजली वितरण की कल्पना की थी, हालांकि विभिन्न सीमाओं के कारण तब यह साकार नहीं हो पाया था। DARPA की यह सफलता टेस्ला के उस दूरदर्शी सपने को नया जीवन दे रही है! लेकिन सिर्फ यु'द्ध के मैदान में ही नहीं, यह वायरलेस बिजली तकनीक हमारे दैनिक जीवन में जो क्रांति ला सकती है, वह अकल्पनीय है! यह तकनीक हमारे दैनिक जीवन को और अधिक सुविधाजनक, कुशल और सुरक्षित बनाएगी। हो सकता है निकट भविष्य में हम एक ऐसी दुनिया में रहें जहाँ तारों के जंजाल से मुक्ति मिलेगी और बिजली और अधिक सुलभ होगी। 🌎💡🔋💻🎯

धावक एंटीक्लाकवाइज क्यों दौड़ते हैं? 1. यह सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि विज्ञान प्रकृति और मानव शरीर की अनोखी संरचना छुपी ...
25/03/2025

धावक एंटीक्लाकवाइज क्यों दौड़ते हैं?

1. यह सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि विज्ञान प्रकृति और मानव शरीर की अनोखी संरचना छुपी है।

2. पहले दौड़ होती थी क्लाकवाइज । एक सदी से भी अधिक समय पहले एथलीट ट्रैक पर क्लाकवाइज घड़ी की दिशा में दौड़ते थे ।

3. पहले ओलंपिक खेलों में 100 मीटर, 400 मीटर , 800 मीटर जैसी सभी दौड़े क्लाकवाइज दिशा में आयोजित की गई थी लेकिन जल्द ही धावकों ने दौड़ने पर असहजता और दर्द की शिकायत की । इसके बाद 1913 में अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों ने ट्रैक की दिशा बदलकर एंटी क्लाकवाइज कर दी।

4. इसके पीछे विज्ञान क्या कहता है?
मानव शरीर की संरचना ऐसी है कि अधिकतर लोग दाएं पैर की तुलना में बाएं पैर पर अधिक नियंत्रण रखते हैं इसीलिए जब भी बाएं ओर मुड़ते हैं तो उनका संतुलन और गति बेहतर होती है।

5. हृदय हमारे शरीर के बाएं भाग में होता है और रक्त प्रवाह भी बाएं से दाएं और यानी एंटी क्लाकवाइज दिशा में शुरू होता है यह दिशा शरीर के लिए अधिक सहज होती है ।लगभग 90% लोग दाएं हाथ और पैर का अधिक उपयोग करते हैं।
6. एंटीक्लाकवाइज दिशा में दौड़ते समय दाएं पैर को अधिक धक्का देने का मौका मिलता है जिससे स्पीड बेहतर होती है।
7. प्रकृति भी चलती है एंटीक्लाकवाइज कैसे?
दोस्तों अगर हम ब्रह्मांड पर नजर डालें तो पाएंगे एंटीक्लाकवाइज घूमना कोई अपवाद नहीं बल्कि एक सामान्य नियम है जैसे_

पृथ्वी अपनी धुरी पर एंटीक्लाकवाइज घूमती है ।
चंद्रमा भी पृथ्वी के चारों ओर एंटीक्लाकवाइज ही घूमता है।
सारे ग्रह सूर्य के चारों ओर इसी नियम में परिक्रमा करते हैं ।
सूर्य और पूरा सौरमंडल आकाश गंगा के केंद्र के चारों ओर एंटीक्लाकवाइज गति करता है।

8. परमाणु के इलेक्ट्रॉन भी अपने नाभिक के चारों ओर एंटी क्लाकवाइज ही घूमते हैं।

9. तो क्या यह एक संयोग है शायद नहीं । हमारे शरीर से लेकर पूरे ब्रह्मांड तक सब कुछ एंटी क्लाकवाइज घूम रहा है धावकों के लिए भी यही दशा सबसे स्वाभाविक और अनुकूल होती है।
तो आप अगली बार किसी रेसर को या धावक को दौड़ते हुए देखें या खुद कभी दौड़े तो इस छोटे से लेकिन अद्भुत वैज्ञानिक रहस्य को जरूर याद करेंगे ।
धन्यवाद।

25/10/2024

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