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"ईश्वर की आवश्यकता ही नहीं है ...![1] :  हम शिक्षा किससे प्राप्त करते हैं .?        क्या ईश्वर से .?उत्तर - नहीं , स्कूल...
07/06/2025

"ईश्वर की आवश्यकता ही नहीं है ...!

[1] : हम शिक्षा किससे प्राप्त करते हैं .?
क्या ईश्वर से .?
उत्तर - नहीं , स्कूल के शिक्षक के पास जाते हैं..
[2] : हम बीमार पड़ते हैं तो किसके पास जाते हैं ..?
■: ईश्वर के पास .?
उत्तर- दवाखाने में डाक्टर के पास जाते हैं!
[3] : अपने ऊपर अन्याय अत्याचार होने पर हम कहां जाते
हैं ..?
■: क्या ईश्वर के पास .?
उत्तर- नहीं ,थाने में पुलिस के पास अथवा न्यायालय में
न्यायाधीश के पास जाते हैं ..
[4] : अपना पेट कैसे भरते हैं...?
■: ईश्वर देता है क्या .?
उत्तर- नहीं, मेहनत करके कमाकर पेट भरना पड़ता है!
[5] : भूख लगने पर क्या याद आता है ..?
■: ईश्वर याद आता है क्या .. ?
उत्तर- नहीं,घर याद आता है।
[6] : हमें अनाज, किराना, कपड़े की जरूरत होती है तो क्या
खोजते हैं ..?
■: ईश्वर लाकर देता है क्या ..?
उत्तर- नहीं, दूकान पर जाकर लाना पड़ता है।
[7] : मनुष्य को जीने के लिए अनाज, सब्जी वगैरह कौन
पैदा करता है ..
■ :ईश्वर पैदा करता है क्या ..?
उत्तर- नहीं, किसान पैदा करता है!
[8] : देश की रक्षा कौन करता है ..?
■: ईश्वर करता है क्या .?
उत्तर- नहीं, सैनिक करते हैं ..!

ऐसे अनेक प्रश्न ईश्वर के संदर्भ में उपस्थित किए जा सकते हैं!
फिर बताइए ..?
ईश्वर की वास्तव में जरूरत ही क्या है ..?
प्रबोधनकार ठाकरे- बाल ठाकरे के पिताजी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के दादाजी कहते हैं---
ये ईश्वर - मंदिर और धर्म के नाम पर चलने वाले कर्मकांड सबके सब पुरोहितों की चलने वाली रोजगार गारंटी योजना है ..!

मंदिर में जाकर समाधान, शांति का अनुभव करनेवालों का ही शोषण होता है किन्तु जैसे जोंक फूंक मारकर पशुओं का खून पीती है और इसका उन्हें पता भी नहीं चलता ..

यह वैसा ही शोषण है यही भक्तों को मालूम नहीं पड़ता ..
ईश्वर के नाम का फूंक मारकर शोषण अनजाने में निरंतर चलते रहता है ऐसे में ईश्वर है तो वह पंडे पुजारियों के पेट में है मंदिरों में नहीं,यह निश्चित है ..

ईश्वर नाम की संकल्पना भय और लालच के आधार पर निर्माण हुई है ..
ईश्वर है यह विज्ञान ने अभी तक सिद्ध नहीं किया है!

भगवान बुद्ध ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा है ..
बाबा साहेब ने ईश्वर के अस्तित्व को नकारा है, पेरियार रामास्वामी ने भी ईश्वर के अस्तित्व को नकारा है ..

कोरोना के संक्रमण काल में प्रत्येक धर्म के ईश्वरों ने अपने अपने दरवाजे बंद कर लिए थे और क्या कहते थे कि भक्तों की सुविधा के लिए दरवाजे बंद किए गए हैं फिर उसके पहले किसकी सुविधा के लिए ये बाजार शुरू थे ..?
अर्थात कोरोना ने भी कह दिया कि ईश्वर का भ्रम अपने अपने दिमाग से निकाल फेंको और विज्ञान वादी बनो!
यही वास्तविक व सच्ची शिक्षा है ..|

*पनीर आधुनिक युग में बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।*जब गहराई से इसकी पड़ताल की गई तब पता चला कि *आयुर्वेद में पनीर को निक...
28/05/2025

*पनीर आधुनिक युग में बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।*
जब गहराई से इसकी पड़ताल की गई तब पता चला कि
*आयुर्वेद में पनीर को निकृष्टतम भोजन के रूप में बताया गया है*,
बोले तो कचरा और कचरा भी ऐसा वैसा नहीं,
*ऐसा कचरा जिसे जानवरों को भी खिलाने से मना किया गया है*।

दूध को फाड़कर या दूध का रूप विकृत करके पनीर बनता है,
जैसे कोई सब्जी सड़ जाए तो क्या उसे खाएंगे ?
*पनीर भी सड़ा हुआ दूध है,*
*भारतीय इतिहास में कहीं भी पनीर का उल्लेख नहीं है*
और *न ही यह भारतीय व्यंजन है*,
क्योंकि *भारत में प्राचीन काल से ही दूध को विकृत करने की मनाही रही है*।

आज भी ग्रामीण समाज में घर की महिलाएं अपने हाथ से कभी दूध नहीं फाड़तीं।

*पनीर खाने के नुकसान*,
आयुर्वेद ने तो शुरू से ही मना किया था कि
*विकृत दूध लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है*,
लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी अपने नए शोध में साबित किया है कि
पनीर खाने से आंतों पर अतिरिक्त दबाव आता है
जिससे पाचन संबंधित रोग होते हैं,
*पनीर में पाया जाने वाले प्रोटीन पचाने की क्षमता जानवरों में भी नहीं होती है*
फिर मनुष्य उसे कैसे पचा सकता है !
*नतीजा होता है खतरनाक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चल कर शुगर,*
*कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लडप्रेशर और यही पनीर पेट की खतरनाक बीमारी IBS को भी पैदा करता है।
ज़्यादा पनीर खाने से खून में थक्के जमने की शिकायत होती है,
जो ब्रेन हैमरेज और हार्ट फेलियर का कारण बनता है।
वहीं ये पनीर हार्मोनल डिसबैलेंस का कारण बनता है
जिससे हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म पनपता है,
*महिलाओं में गर्भ धारण करने की क्षमता कम होती है पुरुषों में नपुंसकता आती है।*
कुल मिलाकर यदि देखा जाए तो *यह पनीर केवल जीभ को लाभ देता है, लेकिन हानि पूरे शरीर की करता है,*
*परन्तु! कढ़ाई पनीर, शाही पनीर, मटर पनीर, चिली पनीर और भी न जाने क्या-क्या पनीर....*
समोसे में पनीर, पकौड़ी में पनीर, पिज्जा में पनीर, बर्गर में पनीर,
*मतलब! जहां देखो वहां पनीर, पनीर, पनीर*
भारत में शायद जितना दूध पैदा नहीं होता, उससे ज़्यादा पनीर बनता होगा।

भारतीय लोग तो पनीर के इतने दीवाने हो चुके हैं कि
उन्हें जहां पनीर मिल जाता है, बहुत ही मजे से चाप लेते हैं,
होटल में गए तो बिना पनीर खाये इनके गले से निवाला नहीं निगलता।

*चिकित्सा विज्ञान की सबसे प्राचीन विधा 'आयुर्वेद' में*
*दूध, दही, घी का जिक्र हर जगह है*
*किन्तु इस नामुराद पनीर का जिक्र कहीं नहीं मिलता, आखिर क्यों ?*

*यदि पनीर इतना ही अच्छा है तो इसके बारे में किसी ऋषि ने कुछ लिखा क्यों नहीं ?*

हमें लगता है, अच्छे स्वास्थ्य की अपेक्षा रखने वाले हर व्यक्ति को पनीर से बचना चाहिए।

12/01/2025
12/01/2025

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