29/09/2026
एक शिक्षक की डायरी — हर बच्चे की एक कहानी
एपिसोड 17: कक्षा 11वीं का भटकाव और करियर का दबाव
आज मैं पहली बार कक्षा 11वीं 'सी' (विज्ञान वर्ग) में दाखिल हुआ। कक्षा 10वीं पास करके आए इन नए-नए विद्यार्थियों के चेहरे पर बोर्ड परीक्षा ख़त्म होने की राहत तो थी, लेकिन साथ ही भविष्य को लेकर एक गहरा भ्रम भी साफ़ झलक रहा था। कुछ बच्चे जेईई और नीट की भारी-भरकम गाइड्स मेज़ पर सजाकर बैठे थे, जबकि कुछ केवल दूसरों की देखा-देखी इस स्ट्रीम में आ गए थे और असहाय महसूस कर रहे थे।
मेरी नज़र मध्य पंक्ति में बैठे विशाल पर पड़ी। वह फिजिक्स की किताब खोलकर बैठा था, लेकिन उसकी नज़रें लगातार खाली पन्ने पर अटकी हुई थीं। जब मैंने उससे पूछा, "विपाल, क्या सोच रहे हो?" तो उसने एक गहरी साँस ली।
"सर... समझ नहीं आ रहा कि मैं सही जगह हूँ या नहीं," विशाल ने उदास मन से कहा। "पापा चाहते हैं कि मैं इंजीनियर बनूँ, इसलिए मैंने मैथ्स ले लिया। लेकिन मुझे तो ड्राइंग और डिज़ाइनिंग पसंद है। यहाँ कक्षा में सब कोचिंग और रैंक की बातें करते हैं, और मुझे लगता है कि मैं भीड़ में खो गया हूँ।"
विशाल की बात सिर्फ़ उसकी अकेली समस्या नहीं थी। 11वीं कक्षा में आते ही ज़्यादातर विद्यार्थी सामाजिक और पारिवारिक दबाव में ऐसे विषयों का चुनाव कर लेते हैं जो उनके स्वाभाविक हुनर से मेल नहीं खाते। इसके बाद शुरू होता है थका देने वाला मानसिक तनाव।
मैंने पूरी क्लास को संबोधित करते हुए कहा, "बच्चों, 11वीं कक्षा केवल किसी प्रवेश परीक्षा की तैयारी का पड़ाव नहीं है। यह अपने असली हुनर और रुचि को पहचानने का समय है। करियर का सही चुनाव दूसरों की देखा-देखी नहीं, बल्कि अपनी क्षमता और पसंद के संतुलन से होता है।"
मैंने विशाल को अलग से बुलाकर समझाया कि वह अपने गणितीय ज्ञान को डिज़ाइनिंग और आर्किटेक्चर जैसे क्षेत्रों में कैसे मिला सकता है। विशाल के चेहरे का तनाव धीरे-धीरे कम हुआ।
मुझे समझ आया कि इस उम्र में विद्यार्थियों को सिर्फ़ किताबों का ज्ञान देना काफ़ी नहीं है। एक शिक्षक का फ़र्ज़ उन्हें सही करियर मार्गदर्शन देना और उनके अंदर यह विश्वास जगाना भी है कि उनकी अपनी पहचान भीड़ से अलग हो सकती है।
आज की शिक्षक-सीख:
विद्यार्थियों को सामाजिक दबाव में करियर चुनने से बचाएं; उनकी छिपी प्रतिभा और रुचि को पहचानकर उन्हें सही दिशा और Career Guidance देना शिक्षक की बड़ी जिम्मेदारी है।