13/05/2025
"जहाँ अंधेरा हो, वहाँ चिराग़ जलाओ।"
इसी विचारशील और प्रेरणादायक सोच को अपना जीवन मिशन बनाकर, हुदा एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के संस्थापक स्वर्गीय मौलाना रेहानुद्दीन क़ासमी के सपनों को डॉ. अतहर रैहान ने साकार करने का बीड़ा उठाया।
वे वहाँ ज्ञान की रौशनी पहुँचा रहे हैं जहाँ कभी अज्ञानता और शिक्षा के अभाव का अंधकार छाया था।
सीमित संसाधनों लेकिन असीम समर्पण के साथ, उन्होंने जगदीशपुर- जिला अमेठी में तीन उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए, जहाँ—
सामान्य बच्चों से कम शुल्क में,
आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को आधी फीस में,
और अनाथ बच्चों को पूरी तरह मुफ्त शिक्षा दी जाती है।
विशेष ध्यान बेटियों की शिक्षा पर दिया जाता है, क्योंकि वे मानते हैं: "एक बेटे को पढ़ाओ तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन एक बेटी को पढ़ाओ तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।"
आज हुदा एजुकेशनल इंस्टीट्यूट अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर में शैक्षणिक नवजागरण का प्रतीक बन चुका है— एक ऐसा संस्थान जो धर्म, जाति या लिंग के किसी भी भेदभाव के बिना, सभी को समान अवसर देता है।
डॉ. अतहर रैहान का फोकस सिर्फ पारंपरिक शिक्षा पर नहीं है—
वे आधुनिक और समग्र शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हैं जिसमें साइंस, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की समझ के साथ-साथ धार्मिक और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी शामिल है— ताकि विद्यार्थी न केवल ज्ञानवान, बल्कि संस्कारवान और देशभक्त बनें।
उनका मिशन यहीं समाप्त नहीं होता—
उन्होंने दो चैरिटेबल क्लिनिक की स्थापना की है जहाँ सभी को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा मिलती है।
वे हर महीने विधवाओं की आर्थिक सहायता करते हैं और
हर गरीब व अनाथ को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं।
उनका अटूट विश्वास है:
"कमज़ोर को सशक्त बनाओ—यही आत्मनिर्भर और मज़बूत भारत की असली बुनियाद है।"
आइए, इस रौशनी की यात्रा में सहभागी बनिए— शिक्षा, सेवा और देशभक्ति के इस मिशन को आगे बढ़ाइए।
डॉ. अतहर रैहान के साथ कदम से कदम मिलाइए।
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