Maa Sharde Coaching Centre

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08/09/2020

🙏सुप्रभात🙏
*"संघर्ष" प्रकृति का "आमन्त्रण" है l जो इसे स्वीकार करता है, वही आगे बढ़ता है..!!*
🌹आपका दिन मंगलमय हो 🌹

07/09/2020

शुभ रात्रि
*विधि का विधान अटल है.....*
*"कर्म फल" "आज"नहीं तो "कल" है l*
🌹जय श्री राम🌹

प्राची से झाँक रही ऊषा,कुंकुम-केशर का थाल लिये।हैं सजी खड़ी विटपावलियाँ,सुरभित सुमनों की माल लिये॥गंगा-यमुना की लहरों मे...
26/01/2018

प्राची से झाँक रही ऊषा,
कुंकुम-केशर का थाल लिये।
हैं सजी खड़ी विटपावलियाँ,
सुरभित सुमनों की माल लिये॥

गंगा-यमुना की लहरों में,
है स्वागत का संगीत नया।
गूँजा विहगों के कण्ठों में,
है स्वतन्त्रता का गीत नया॥

प्रहरी नगराज विहँसता है,
गौरव से उन्नत भाल किये।
फहराता दिव्य तिरंगा है,
आदर्श विजय-सन्देश लिये॥

गणतन्त्र-आगमन में सबने,
मिल कर स्वागत की ठानी है।
जड़-चेतन की क्या कहें स्वयं,
कर रही प्रकृति अगवानी है॥

कितने कष्टों के बाद हमें,
यह आज़ादी का हर्ष मिला।
सदियों से पिछड़े भारत को,
अपना खोया उत्कर्ष मिला॥

धरती अपनी नभ है अपना,
अब औरों का अधिकार नहीं।
परतन्त्र बता कर अपमानित,
कर सकता अब संसार नहीं॥

क्या दिये असंख्यों ही हमने,
इसके हित हैं बलिदान नहीं।
फिर अपनी प्यारी सत्ता पर,
क्यों हो हमको अभिमान नहीं॥

पर आज़ादी पाने से ही,
बन गया हमारा काम नहीं।
निज कर्त्तव्यों को भूल अभी,
हम ले सकते विश्राम नहीं॥

प्राणों के बदले मिली जो कि,
करना है उसका त्राण हमें।
जर्जरित राष्ट्र का मिल कर फिर,
करना है नव-निर्माण हमें॥

इसलिये देश के नवयुवको!
आओ कुछ कर दिखलायें हम।
जो पंथ अभी अवशिष्ट उसी,
पर आगे पैर बढ़ायें हम॥

भुजबल के विपुल परिश्रम से,
निज देश-दीनता दूर करें।
उपजा अवनी से रत्न-राशि,
फिर रिक्त-कोष भरपूर करें॥

दें तोड़ विषमता के बन्धन,
मुखरित समता का राग रहे।
मानव-मानव में भेद नहीं,
सबका सबसे अनुराग रहे,

कोई न बड़ा-छोटा जग में,
सबको अधिकार समान मिले।
सबको मानवता के नाते,
जगतीतल में सम्मान मिले॥

विज्ञान-कला कौशल का हम,
सब मिलकर पूर्ण विकास करें।
हो दूर अविद्या-अन्धकार,
विद्या का प्रबल प्रकाश करें॥

हर घड़ी ध्यान बस रहे यही,
अधरों पर भी यह गान रहे।
जय रहे सदा भारत माँ की,
दुनिया में ऊँची शान रहे॥

✍महावीर प्रसाद मधुप

*नेताजी सुभाषचंद्र बोस जन्मदिवस विशेष*नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म आज के ही दिन 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक ...
23/01/2018

*नेताजी सुभाषचंद्र बोस जन्मदिवस विशेष*

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म आज के ही दिन 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम 'जानकीनाथ बोस' और माँ का नाम 'प्रभावती' था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था।

नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात् उनकी शिक्षा कलकत्ता के प्रेज़िडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज से हुई, और बाद में भारतीय प्रशासनिक सेवा (इण्डियन सिविल सर्विस) की तैयारी के लिए उनके माता-पिता ने बोस को इंग्लैंड के केंब्रिज विश्वविद्यालय भेज दिया। अँग्रेज़ी शासन काल में भारतीयों के लिए सिविल सर्विस में जाना बहुत कठिन था किंतु उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।

1921 में भारत में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों का समाचार पाकर बोस ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली और शीघ्र भारत लौट आए। सिविल सर्विस छोड़ने के बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए। सुभाष चंद्र बोस महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से सहमत नहीं थे। वास्तव में महात्मा गांधी उदार दल का नेतृत्व करते थे, वहीं सुभाष चंद्र बोस जोशीले क्रांतिकारी दल के प्रिय थे। महात्मा गाँधी और सुभाष चंद्र बोस के विचार भिन्न-भिन्न थे लेकिन वे यह अच्छी तरह जानते थे कि महात्मा गाँधी और उनका मक़सद एक है, यानी देश की आज़ादी। सबसे पहले गाँधीजी को राष्ट्रपिता कह कर नेताजी ने ही संबोधित किया था।

1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। यह नीति गाँधीवादी आर्थिक विचारों के अनुकूल नहीं थी। 1939 में बोस पुन एक गाँधीवादी प्रतिद्वंदी को हराकर विजयी हुए। गांधी ने इसे अपनी हार के रुप में लिया। उनके अध्यक्ष चुने जाने पर गांधी जी ने कहा कि बोस की जीत मेरी हार है और ऐसा लगने लगा कि वह कांग्रेस वर्किंग कमिटी से त्यागपत्र दे देंगे। गाँधी जी के विरोध के चलते इस 'विद्रोही अध्यक्ष' ने त्यागपत्र देने की आवश्यकता महसूस की। गांधी के लगातार विरोध को देखते हुए उन्होंने स्वयं कांग्रेस छोड़ दी।

इस बीच दूसरा विश्व युद्ध छिड़ गया। बोस का मानना था कि अंग्रेजों के दुश्मनों से मिलकर आज़ादी हासिल की जा सकती है। उनके विचारों के देखते हुए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता में नज़रबंद कर लिया लेकिन वह अपने भतीजे शिशिर कुमार बोस की सहायता से वहां से भाग निकले। वह अफगानिस्तान और सोवियत संघ होते हुए जर्मनी जा पहुंचे।

सक्रिय राजनीति में आने से पहले नेताजी ने पूरी दुनिया का भ्रमण किया। वह 1933 से 36 तक यूरोप में रहे। यूरोप में यह दौर था हिटलर के नाजीवाद और मुसोलिनी के फासीवाद का। नाजीवाद और फासीवाद का निशाना इंग्लैंड था, जिसने पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पर एकतरफा समझौते थोपे थे। वे उसका बदला इंग्लैंड से लेना चाहते थे। भारत पर भी अँग्रेज़ों का कब्जा था और इंग्लैंड के खिलाफ लड़ाई में नेताजी को हिटलर और मुसोलिनी में भविष्य का मित्र दिखाई पड़ रहा था। दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। उनका मानना था कि स्वतंत्रता हासिल करने के लिए राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ कूटनीतिक और सैन्य सहयोग की भी जरूरत पड़ती है।

सुभाष चंद्र बोस ने 1937 में अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रियन युवती एमिली से शादी की। उन दोनों की एक अनीता नाम की एक बेटी भी हुई जो वर्तमान में जर्मनी में सपरिवार रहती हैं। नेताजी हिटलर से मिले। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत और देश की आजादी के लिए कई काम किए। उन्होंने 1943 में जर्मनी छोड़ दिया। वहां से वह जापान पहुंचे। जापान से वह सिंगापुर पहुंचे। जहां उन्होंने कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित आज़ाद हिंद फ़ौज की कमान अपने हाथों में ले ली। उस वक्त रास बिहारी बोस आज़ाद हिंद फ़ौज के नेता थे। उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज का पुनर्गठन किया। महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजिमेंट का भी गठन किया जिसकी लक्ष्मी सहगल कैप्टन बनी।

'नेताजी' के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र ने सशक्त क्रान्ति द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से 21 अक्टूबर, 1943 को 'आज़ाद हिन्द सरकार' की स्थापना की तथा 'आज़ाद हिन्द फ़ौज' का गठन किया इस संगठन के प्रतीक चिह्न पर एक झंडे पर दहाड़ते हुए बाघ का चित्र बना होता था। नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुँचे। यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, " #तुम_मुझे_खून_दो_मैं_तुम्हें_आजादी_दूंगा" दिया।

18 अगस्त 1945 को टोक्यो (जापान) जाते समय ताइवान के पास नेताजी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ बताया जाता है, लेकिन उनका शव नहीं मिल पाया। नेताजी की मौत के कारणों पर आज भी विवाद बना हुआ है।

@रूपेश कुमार

माँ सरस्वती दियौं अहाँसबके बुद्धि,ज्ञान हेअहीं हंसवाहिनी छी अहीँ ज्ञानकभन्डार हेबौवा,बुच्ची, सँ ल'क यहाँ बुढ़ बृद्धा.सबक...
23/01/2018

माँ सरस्वती दियौं अहाँ
सबके बुद्धि,ज्ञान हे
अहीं हंसवाहिनी छी अहीँ ज्ञानक
भन्डार हे

बौवा,बुच्ची, सँ ल'क यहाँ बुढ़ बृद्धा.
सबके ज्ञानक जोती बारैत रहू
सुनियौं सबके पुकार हे शारदे
सबके दुख सँ उबारैत रहू
वीणा, पुस्तक धारणी करैछी
कल जोइर क' हम प्रणाम हे
अहीँ हंसवाहिनी छी ...........

दियौं सबठाम सबके ज्ञान हे सरस्वती माँ
करियौं अहाँ सभक कल्याण हे सरस्वती माँ
अछि अहाँ के महिमा महान हे
सरस्वती माँ
दियौ अहाँ सब मित्रलोकनि के
ज्ञान हे सरस्वती माँ

माँ शारदे !वर यैह देहम मङ्गइत छी तोरा सँ ।भारत मेजनम जनम जनमीमिथिला माइक कोरा सँ ।। माँ शारदे .................अपन  ज्ञा...
22/01/2018

माँ शारदे !

वर यैह दे

हम मङ्गइत छी तोरा सँ ।

भारत मे

जनम जनम जनमी

मिथिला माइक कोरा सँ ।। माँ शारदे .................

अपन ज्ञान केर मधुर वारि

हम धरती पर बरिसाबी,

पाथरहु मे भरि दी हृदय आर

मृतको केँ बिहुँसि जिया दी,

हिय मे ओ सुधा भरि दे ।। माँ शारदे .................

अनुपम अपन संस्कृति केँ

हम दुनियाँ मे फैलाबी,

हृदयहीनता - द्वेष कलह केँ

दुनियाँ सँ बैलाबी,

कान मे ओ मन्त्र कहि दे ।। माँ शारदे .................

सौंसे दुनियाँ मे सभकेँ

हम त्यागक मन्त्र सिखाबी,

आङन-आङन घर-घर बुलिकए

प्रेमक दीप जराबी,

ओ ज्योति कलश भरि दे ।। माँ शारदे .................

दुनियाँ एके स्वर सँ गाबय

हिलि - मिलि विजयक गीत,

ग्रह - उपग्रह नक्षत्र आदि पर

होइ मानवक जीत,

सीढ़ी ओ सबल गढ़ि दे ।। माँ शारदे ...........

प्रथम भारती नाम द्वितीयं सरस्वती।तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी।।पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा।सप्तमं कुमुद...
22/01/2018

प्रथम भारती नाम द्वितीयं सरस्वती।
तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी।।
पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा।
सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता अष्टमं ब्रह्मचारिणी।
नवमं बुद्धिदात्री च दशमं वरदायिनी।
एकादशं चंद्रकान्तिर्द्वादशं भुवनेश्वरी।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं च: पठेन्नर:।
जिह्वाग्रे वसते नित्यं ब्रह्मरूपा सरस्वती।
2018 के सरस्वती पूजा के किछु छाया चित्र

इम्तहान आज है और कल भी होगाइनमें ही छिपा खुशियों का वो पल भी होगाचाहो तो ढूंढ लेना वो खजानाजिसमें होगा तुम्हारी कामयाबी ...
29/10/2017

इम्तहान आज है और कल भी होगा
इनमें ही छिपा खुशियों का वो पल भी होगा
चाहो तो ढूंढ लेना वो खजाना
जिसमें होगा तुम्हारी कामयाबी का नजराना!!

दर्द-तकलीफ बीच में थोड़ा सताएगी
तुम्हारा मनोबल परखने आएगी
डटे रहोगे जो सकारात्मकता के साथ
तुम्हें ये और मजबूत बनाती जाएगी

खुशियाँ जब तुमसे टकराएगी
जरा बहलाएगी, फुसलाएगी…
ना आना इसके छलावे में;
अपनी ओर आकृष्ट कर मार्ग से भटकाएगी

छण-भर की ये खुशीयाँ अफसोस बन सताएगी
सोच-समझ कर चुनाव करना
यही तुम्हारा भविष्य निर्धारित करवाएगी
इम्तहान आज है और कल भी होगा
इनमें ही छिपा खुशी का वो पल भी होगा!!

ये इम्तहान डराते हैं धमकाते हैं
पग-पग में उलझनों से दो-चार करवाते हैं
रिश्तों की कसौटी में फँसाते हैं
पर जीने का सलीका यही हमें सिखाते हैं

डरकर कदम पीछे ना करना
रखना हिम्मत, समझदारी संग डटे रहना
सूझबूझ और जज्बे के आगे सिर ये झुकाते हैं
जब लहरें किनारे पर आती हैं सब बहा ले जाती हैं

वही टिके रहते हैं जो विनम्रता से पेश आते हैं
हर कोई यहाँ अपने इम्तहानों से हैं जूझते
कुछ वक्त के आगे बिखर जाते हैं टूट के
कुछ अपनी जगह बनाते हैं दृढ़ता से जूझ के

हार मानकर यहाँ किसी का गुजारा नहीं होता
आँखें मूंद लेने से कभी अंधेरा उजियारा नहीं होता
जगह अपनी यहाँ खुद बनायी जाती है
इस दुनिया में वरना कोई किसी का सहारा नहीं होता

इम्तहान आज है और कल भी होगा
इनमें ही छिपा खुशी का वो पल भी होगा
चाहो तो ढूंढ लेना वो खजाना
जिसमें होगा तुम्हारी कामयाबी का नजराना!!

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29/10/2017

माना हालात प्रतिकूल हैं, रास्तों पर बिछे शूल हैं
रिश्तों पे जम गई धूल है
पर तू खुद अपना अवरोध न बन
तू उठ…… खुद अपनी राह बना………………………..
माना सूरज अँधेरे में खो गया है……
पर रात अभी हुई नहीं, यह तो प्रभात की बेला है
तेरे संग है उम्मीदें, किसने कहा तू अकेला है
तू खुद अपना विहान बन, तू खुद अपना विधान बन………………………..
सत्य की जीत हीं तेरा लक्ष्य हो
अपने मन का धीरज, तू कभी न खो
रण छोड़ने वाले होते हैं कायर
तू तो परमवीर है, तू युद्ध कर – तू युद्ध कर………………………..
इस युद्ध भूमि पर, तू अपनी विजयगाथा लिख
जीतकर के ये जंग, तू बन जा वीर अमिट
तू खुद सर्व समर्थ है, वीरता से जीने का हीं कुछ अर्थ है
तू युद्ध कर – बस युद्ध कर………………………..

देवो रुष्टे गुरुस्त्राता गुरो रुष्टे न कश्चन:।गुरुस्त्राता गुरुस्त्राता गुरुस्त्राता न संशयः।।अर्थ: भाग्य रूठ जाए तो गुर...
05/09/2017

देवो रुष्टे गुरुस्त्राता गुरो रुष्टे न कश्चन:।
गुरुस्त्राता गुरुस्त्राता गुरुस्त्राता न संशयः।।

अर्थ: भाग्य रूठ जाए तो गुरु रक्षा करता है, गुरु रूठ जाए तो कोई नहीं होता। गुरु ही रक्षक है, गुरु ही रक्षक है, गुरु ही रक्षक है, इसमें कोई संदेह नहीं।

Happy Independence Day
15/08/2017

Happy Independence Day

कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को?
01/06/2017

कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को?

Chetan Bhagat Speech in Hindi for students चेतन भगत का प्रेरणादायी भाषण Good Morning everyone, मुझे यहाँ बोलने का मौका देने के लिए आप सभी का धन्यवाद. ये...

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