28/05/2026
ईद अल-अज़हा या क़ुरबानी की ईद अरबी में ईद-उल-अद्'हा - इस्लाम धर्म के लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उसके पुत्र को जीवनदान दे दिया जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है।अरबी भाषा में 'बक़र' का अर्थ है भेड़ लेकिन इधर हिंदी उर्दू भाषा के बकरी-बकरा से इसका नाम जुड़ा है, अर्थात इधर के देशों में बकरे की क़ुर्बानी के कारण असल नाम से बिगाड़कर आज भारत, पाकिस्तान व बांग्ला देश में यह 'बकरा ईद' से ज्यादा विख्यात हैं। ईद-ए-कुर्बां का मतलब है बलिदान की भावना। अरबी में 'क़र्ब' नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर अल्लाह् इंसान के बहुत करीब हो जाता है। कुर्बानी उस पशु के जि़बह करने को कहते हैं जिसे 10, 11, 12 या 13 जि़लहिज्ज (हज का महीना) को खुदा को खुश करने के लिए ज़िबिह किया जाता है। कुरान में लिखा है: हमने तुम्हें हौज़-ए-क़ौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो।
आप सभी मित्रों को ईद उल -अजहा (बकरीद) की हार्दिक शुभकामनाएं।