21/10/2021
आज अल्फ्रेड नोबेल का जन्मदिन है।
अल्फ़्रेड नोबेल डायनामाइट के आविष्कारक थे (बोफ़ोर्स कम्पनी भी अल्फ़्रेड नोबेल ने ही आरम्भ की थी)। नोबेल ने डायनामाइट बना कर खूब पैसा कमाया। इस विस्फ़ोटक ने खदानों के उत्पादन में क्रांतिकारी बढोतरी की थी। लेकिन जैसा कि अक्सर होता है... इस फूल के साथ कांटे भी थे। डायनामाइट का प्रयोग हथियारों में भी होने लगा... खुद नोबेल ने बोफ़ोर्स को एक स्टील उत्पादक कम्पनी से बदल कर एक तोप-निर्माता कम्पनी बना दिया। नोबेल के डायनामाइट ने नोबेल पर पैसा और पूरे संसार पर मौत बरसानी शुरु कर दी।
..और लोगों ने नोबेल को "मौत का सौदागर" कहना शुरु कर दिया।
एक बार किसी ने अखबार में जानबूझ कर नोबेल की मृत्यु के बारे में लिख दिया। लोग चाहते थे कि लोगों को मारने की बजाय नोबेल खुद ही मर जाएँ। इससे दुखी होकर और अपने ऊपर से "मौत का सौदागर" का ठप्पा हटाने की कोशिश में नोबेल ने अपनी सारी सम्पदा को नोबेल पुरस्कार के लिए दान कर दिया। उन्होनें अपनी वसीयत में लिखा कि इस सम्पदा के ब्याज से ऐसे लोगों को नोबेल पुरस्कार दिए जाएँ जो मनुष्य जाति के लिए सर्वाधिक लाभदेय कार्य करे। आरम्भ में नोबेल पुरस्कार भौतिकी, रसायन शास्त्र, मेडिसिन, साहित्य और शांति के लिए दिए जाते थे। बाद में इस सूची में अर्थशास्त्र को भी शामिल कर दिया गया। प्रत्येक पुरस्कार में करीब सात करोड़ रुपए दिए जाते हैं -- संयुक्त रूप से पुरस्कृत लोगों के बीच यह राशि बराबर बाँट दी जाती है।
नोबेल ने कभी विवाह नहीं किया। उनके पास 350 से भी अधिक पेटेंट्स थे। नोबेल ने सेकेण्डरी स्कूल की शिक्षा भी प्राप्त नहीं की थी लेकिन फिर भी उन्होने स्विडिश, फ़्रेंच, रूसी, अंग्रेज़ी, जर्मन और इटालियन में महारत हासिल की थी।
कौन थे अल्फ्रेड नोबेल?
अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल (Alfred Bernhard Nobel) का जन्म स्वीडन के स्टॉकहोम में 21 अक्टूबर 1833 को हुआ था। अल्फ्रेड के पिता इमानुएल नोबेल एक प्रख्यात अविष्कारक थे मगर वो पढ़े-लिखे नहीं थे। 16 साल की उम्र तक अल्फ्रेड की शिक्षा घर पर ही हुई। उनके पिता को दिवालिया हो जाने के कारण स्वीडन से रुक जाना पड़ा जहां वह रूसी सरकार से रक्षा हथियारों का कॉन्ट्रैक्ट प्राप्त करने में सफल हो गए। 1842 में जब नोबेल सिर्फ 9 साल के थे वह अपनी माता आंद्रिएता एहल्सेल के साथ अपने नाना के घर सेंट पीटर्सबर्ग चले गए। यहां रह कर अल्फ्रेड ने रसायन विज्ञान और संबंधित भाषाओं की शिक्षा प्राप्त की। कुछ नया खोजने का स्वभाव रखने वाले अल्फ्रेड ने स्वीडिश, रूसी, अंग्रेजी, फ्रेंच और जर्मन भाषाएं सीखी।
अल्फ्रेड के पिता ने साल 1850 में उन्हें केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए विदेश भेज दिया। इस दौरान अल्फ्रेड ने स्वीडन, जर्मनी, फ्रांस और अमेरिका की यात्राएं की। अल्फ्रेड को साहित्य में भी काफी रूचि थी। अल्फ्रेड के पिता एक इंजीनियर और आविष्कारक थे जो न केवल बिल्डिंग और फूल डिजाइन करते थे बल्कि भिन्न प्रकार के प्लास्टिक चट्टानों का भी परीक्षण किया करते थे। अल्फ्रेड की रूचि साहित्य में थी लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह उन्हीं की तरह काम करें, इसलिए उन्हें केमिकल इंजीनियरिंग पढ़ने बाहर भेजा था।
‘क्रीमिया युद्ध’ के दौरान दिखाई अपनी प्रतिभा
1853 से 18 सो 56 के बीच क्रीमिया युद्ध के दौरान अल्फ्रेड ने रूस के सम्राट जार और जनरल ओं को विश्वास दिलाया कि समुद्री खदानों के इस्तेमाल से दुश्मनों को सीमा में घुसने से रोका जा सकता है। उनका दानों की मदद से ब्रिटिश रॉयल नेवी को सेंड पीटरसन की सीमा पर ही रोक दिया गया थे।
ऐसे बनाया डायनामाइट
अल्फ्रेड ने पेरिस की एक निजी शोध कंपनी में काम किया जहां उनकी मुलाकात इतावली केमिस्ट अस्कानियो सोब्रेरो से हुई। सोब्रेरो ने अति विस्फोटक तरल ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ का आविष्कार किया था। यह व्यावहारिक इस्तेमाल की लिए बेहद खतरनाक पदार्थ था। यहीं से अल्फ्रेड की रूचि ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ में हुई, जहां उन्होंने निर्माण कार्यों में इसके इस्तेमाल के विषय में सोचा।
1863 में, वापस स्वीडन लौटने के बाद अल्फ्रेड ने अपना पूरा ध्यान ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ को एक विस्फोटक के रूप में विकसित करने में लगा दिया। दुर्भाग्य से, उनका यह परीक्षण असफल हो गया, जिसमें कई लोगों की मौत भी हो गई। मरने वालों में अल्फ्रेड का छोटा भाई एमिल भी शामिल था। इस घटना के बाद स्वीडिश सरकार ने इस पदार्थ के स्टॉकहोम की सीमा के अंतर्गत किसी भी प्रकार के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। हालांकि अल्फ्रेड नहीं रुके, उन्होंने अपना प्रयोग जारी रखा। इस बार उन्होंने अपनी नई प्रयोगशाला झील में एक नाव को बनाया, जहां उनका प्रयोग सफल रहा।
कैसे हुई नोबेल पुरस्कार की शुरुआत?
नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 10 दिसम्बर 1901 को हुई थी। उस समय रसायन शास्त्र, भौतिक शास्त्र, चिकित्सा शास्त्र, साहित्य और विश्व शांति के लिए पहली बार ये पुरस्कार दिया गया था। इस पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और डायनामाइट के आविष्कारक डॉ अल्फ्रेड नोबेल द्वारा 27 नवम्बर 1895 को की गई वसीयत के आधार पर की गई थी। 10 दिसम्बर, 1896 को इटली के सेनरमो शहर में नोबेल की मृत्यु हो गई। अल्फेड की 92,00,000 डॉलर की संपत्ति विज्ञान और साहित्य में अच्छे कार्य करने वालों लोगो को दी जाती है। इसे ही नोबेल पुरस्कार के नाम से जाना जाता है।