Himanshu Mohan Dixit

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01/12/2025
माँ तो माँ होती होती है.....भारत माता की जय
18/11/2025

माँ तो माँ होती होती है.....भारत माता की जय

🕉️ रथयात्रा के माध्यम से धर्मजागरण के अग्रदूत, राम मंदिर आन्दोलन के पुरोधा, राष्ट्रनायक श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मद...
08/11/2025

🕉️ रथयात्रा के माध्यम से धर्मजागरण के अग्रदूत, राम मंदिर आन्दोलन के पुरोधा, राष्ट्रनायक श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

उनकी रथयात्रा ने न केवल भारत के राजनीतिक परिदृश्य को बदला, बल्कि हिंदू समाज के आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना को भी जाग्रत किया।
वह यात्रा एक आंदोलन नहीं, एक जागरण थी — राष्ट्र के आत्मबोध की यात्रा।

08 नवम्बर 1927
आज उनके जीवन, तप और राष्ट्रनिष्ठा को नमन 🙏
जय श्रीराम!

#रथयात्रा
#राम_मन्दिर
#पुण्यस्मरण
#लालकृष्ण_आडवाणी







हिमांशु मोहन दीक्षित Himaanshu Mohan Dixit Newada Raghaupur शंखनाद
Ashish Singh Ashu Abhai Shankar मेरा गांव मेरा तीर्थ Awanish Kumar Singh Brajesh Pathak

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17/09/2025

भोजन से संस्कार

🚩 श्रीराम भक्त, राष्ट्रनायक  मा. पूर्व मुख्यमंत्री बाबू कल्याण सिंह जी को शतनमन 🚩बाबू कल्याण सिंह जी का संपूर्ण जीवन भार...
21/08/2025

🚩 श्रीराम भक्त, राष्ट्रनायक मा. पूर्व मुख्यमंत्री बाबू कल्याण सिंह जी को शतनमन 🚩

बाबू कल्याण सिंह जी का संपूर्ण जीवन भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक आदर्श रहा। वे केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन के सच्चे सेनानी, जनसेवा के जीवंत प्रतीक और राष्ट्रनिष्ठा के आदर्श पुरुष थे। उनका व्यक्तित्व त्याग, साहस और समर्पण की मिसाल प्रस्तुत करता है।

✨ जीवन वृत्त–

बाबू कल्याण सिंह जी का जन्म 5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ ज़िले के गाँव माधौली में हुआ। शिक्षण क्षेत्र से राजनीति की ओर आए और जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए उन्होंने जन-जन में विश्वास अर्जित किया।
👉 मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी।
👉 राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने कहा था— "रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।"
👉 उनके नेतृत्व में यूपी की कानून व्यवस्था मजबूत हुई और प्रशासन में जनहित को सर्वोपरि रखा गया।
👉 2021 में उनके निधन से राष्ट्र ने एक सच्चे कर्मयोगी को खो दिया।

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📖 आदर्श जीवन

1️⃣ सिद्धांतों पर अडिग

जब राम मंदिर आंदोलन चरम पर था, बाबूजी पर भारी दबाव था कि वे अपना रुख बदलें। लेकिन उन्होंने कहा—
"मेरा मुख्यमंत्री पद भले चला जाए, पर मेरी आत्मा मुझे कभी क्षमा नहीं करेगी यदि मैं प्रभु श्रीराम के मंदिर हेतु आवाज़ न उठाऊँ।"
👉 यह कथा हमें सिखाती है कि पद और सत्ता से बड़ा राष्ट्रधर्म है।

2️⃣ साधारण से असाधारण

एक बार ग्रामीण जनसभा में लोगों ने उनसे पूछा— "बाबूजी, आप गाँव-गाँव क्यों घूमते हैं जबकि आप बड़े नेता हो चुके हैं?"
उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—
"नेता वही है जो जनता की धूल और पसीने में अपना भविष्य देखे। सत्ता की कुर्सी जनता की चौखट से होकर ही मिलती है।"
👉 यह शिक्षा है कि जनता से जुड़े बिना राजनीति केवल स्वार्थ है।

3️⃣ न्यायप्रियता

मुख्यमंत्री रहते समय एक प्रभावशाली नेता का रिश्ता उनके पास आया, जिसमें नियम तोड़ने का दबाव था। बाबूजी ने स्पष्ट कह दिया—
"मेरा परिवार पूरा प्रदेश है, मैं किसी का पक्षपात नहीं कर सकता।"
👉 यह कथा हमें बताती है कि सच्चा शासक वही है जो रिश्तों से ऊपर उठकर न्याय करे।

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बाबू कल्याण सिंह जी का जीवन हमें सिखाता है कि राजनीति केवल सत्ता की होड़ नहीं, बल्कि राष्ट्र व समाज की सेवा का मार्ग है।
उनकी स्मृतियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।

🙏 रामलला के अनन्य उपासक और राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने वाले बाबूजी प्रभु श्रीराम के वचन उन्हें समर्पित करते हुए शत-शत नमन। 🙏
परहित बस जिन्ह के मन माहीं। तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं॥
तनु तिज तात जाहु मम धामा। देउँ काह तुम्ह पूरनकामा॥
Himaanshu Mohan Dixit
हिमांशु मोहन दीक्षित
Newada Raghaupur
राष्ट्रदेव मेरा गांव मेरा तीर्थ

शायरीएक डाल पे उल्लू बैठा, एक डाल पे तोता।ब्राह्मण बनके घूम रहा है फिरोज खान का पोता।पहेलीबाप पादरी, मां कादरी बेटा पंडि...
23/07/2025

शायरी
एक डाल पे उल्लू बैठा, एक डाल पे तोता।
ब्राह्मण बनके घूम रहा है फिरोज खान का पोता।

पहेली
बाप पादरी, मां कादरी बेटा पंडित बिरादरी।
---------------पहेली का जवाब ही आपकी मुस्कराहट का कारण है।

Bhai Ne Congressiyon Ko Sahi Se Rel Diya😀 How Indians reacted to the Pahalgam Attack and the Indian Arme...

राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस: एकता, अखंडता और बलिदान का प्रतीक तिरंगाराष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और...
22/07/2025

राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस: एकता, अखंडता और बलिदान का प्रतीक तिरंगा
राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का दिन है। यह वह पावन तिथि है जब हमने अपने राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगा, को संविधान सभा द्वारा आधिकारिक रूप से अपनाया था। यह दिवस हमें न केवल अपने ध्वज के महत्व को याद दिलाता है, बल्कि उन मूल्यों को भी रेखांकित करता है जिनका वह प्रतिनिधित्व करता है: एकता, अखंडता और बलिदान।
तिरंगा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र की आत्मा का प्रतिबिंब है। इसका हर रंग, हर चक्र और हर रेखा एक गहरी कहानी कहता है:
* केसरिया रंग बलिदान, साहस और त्याग का प्रतीक है। यह हमें उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह हमें अपने कर्तव्यों के प्रति निडर रहने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है।
* सफेद रंग शांति, सत्य और पवित्रता का द्योतक है। यह दर्शाता है कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो वैश्विक शांति और सद्भाव में विश्वास रखता है। यह हमें जीवन के हर क्षेत्र में ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने का संदेश देता है।
* हरा रंग समृद्धि, उर्वरता और विश्वास का प्रतीक है। यह भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था और हमारी धरती से जुड़े गहरे संबंधों को दर्शाता है। यह हमें विकास और प्रगति की दिशा में निरंतर प्रयास करने के लिए प्रेरित करता है।
* ध्वज के केंद्र में स्थित अशोक चक्र "धर्म चक्र" का प्रतिनिधित्व करता है और गति तथा प्रगति का प्रतीक है। इसमें 24 तीलियाँ हैं, जो हमें यह याद दिलाती हैं कि हमें निरंतर आगे बढ़ना चाहिए और कभी रुकना नहीं चाहिए। यह न्याय और कानून के शासन का भी प्रतीक है।
राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस हमें इस बात का भी स्मरण कराता है कि हमारा तिरंगा किस प्रकार विविधताओं से भरे इस देश को एक सूत्र में पिरोता है। चाहे हम किसी भी धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के हों, तिरंगा हम सबको एक पहचान देता है – भारतीय होने की पहचान। यह हमें सिखाता है कि मतभेदों के बावजूद, हम सब एक हैं और एक साथ मिलकर ही एक मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।
यह दिवस हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने और उनके सपनों को साकार करने की प्रेरणा देता है। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। हमें मातृभूमि की सेवा में निरंतर समर्पित रहने, देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने, और अपने राष्ट्रीय मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए।
राष्ट्रीय झंडा अंगीकरण दिवस पर हम सब यह प्रतिज्ञा करें कि हम अपने तिरंगे के सम्मान को हमेशा ऊंचा रखेंगे और उसके आदर्शों पर चलते हुए एक सशक्त और गौरवान्वित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।
हिमांशु मोहन दीक्षित
Newada Raghaupur

"यह बयान भारतीय राजनीति में सेवा और समर्पण की उस दुर्लभ भावना को उजागर करता है, जो आज के युग में विरल होती जा रही है। स्...
29/06/2025

"यह बयान भारतीय राजनीति में सेवा और समर्पण की उस दुर्लभ भावना को उजागर करता है, जो आज के युग में विरल होती जा रही है। स्मृति ईरानी का यह कथन केवल व्यक्तिगत विनम्रता नहीं, बल्कि संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और स्वयं को 'पद-लिप्सा' से परे रखने की एक प्रबल राजनीतिक संस्कृति का प्रतीक है।"
"हालांकि यह कथन आदर्श प्रतीत होता है, किंतु राजनीति में ऐसे कथनों को उनके व्यवहारिक संदर्भ में भी जांचा जाना चाहिए। अगर वास्तविकता में भी यही भावना बनी रहे, तो यह भारतीय राजनीति की गिरती साख को पुनर्स्थापित कर सकती है।"

"मैं न पद की भूखी हूं और न सम्मान की प्यासी हूं, पार्टी जब जहां बुलाएगी, मैं हाजिर हूं"

◆ बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कहा
| Smriti Irani

शत नमन
05/06/2025

शत नमन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि। गुरुजी के नाम से विख्यात गोलवलकर जी का जीवन राष्ट्र सेवा और भारतीय संस्कृति को समर्पित था।
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गुरुजी का जन्म 19 फरवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी थे। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से जीव विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और कुछ समय तक वहीं अध्यापन कार्य भी किया। उनका रुझान अध्यात्म और राष्ट्रप्रेम की ओर था। 1937 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के विशेष आग्रह पर संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। 1940 में डॉ. हेडगेवार के निधन के बाद वे RSS के द्वितीय सरसंघचालक नियुक्त हुए।
गुरुजी की विचारधारा और राष्ट्र की अवधारणा
गुरुजी ने अपना पूरा जीवन सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और भारतीय मूल्यों के प्रति समर्पित कर दिया। उनका दृढ़ विश्वास था कि "राष्ट्र न तो केवल मिट्टी का टुकड़ा है, न ही एक राजनैतिक व्यवस्था। राष्ट्र एक जीवंत सांस्कृतिक इकाई है।" उनका मानना था कि यदि हम अपने धर्म, संस्कृति और परंपरा से कटते हैं, तो राष्ट्र की आत्मा से कट जाते हैं।
गुरुजी ने भारत को केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक "जीवंत सांस्कृतिक सत्ता" के रूप में देखा, जिसे हजारों वर्षों की साधना, संघर्ष और सांस्कृतिक तपस्या से सींचा गया है।
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गुरुजी के नेतृत्व में RSS ने ग्रामीण भारत तक अपनी पहुंच बढ़ाई और सामाजिक आधार का विस्तार किया। आपातकाल के दौरान और उसके बाद भी उनके विचारों ने हिंदू समाज को एकजुट करने और उसे धार्मिक, सांस्कृतिक तथा राष्ट्रहित के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर जोर दिया और भारत की ‘धर्मप्रधान’ जीवन दृष्टि को आधुनिकता के साथ जोड़ा।
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गुरुजी ने RSS को केवल विचारों का मंच नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा और त्याग की प्रयोगशाला बनाया। उनका जीवन स्वयं एक प्रेरणा था, जिसमें उन्होंने "व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है" के सिद्धांत को चरितार्थ किया। उनकी प्रेरणा से लाखों स्वयंसेसेवकों ने सेवा, संस्कार और राष्ट्ररक्षा के कार्यों में अपना जीवन समर्पित किया। उनके अनुसार, "विचारों की अग्नि में तपकर ही राष्ट्र निर्माण का यज्ञ संभव है।"
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गुरुजी केवल RSS के लिए नहीं, बल्कि समग्र भारतवर्ष के सांस्कृतिक स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उनकी पुण्यतिथि पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम भारत को केवल एक भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि एक माँ के रूप में देखें, और उसके वैभव के लिए अपना तन, मन और धन अर्पित करें।
गुरुजी को कोटिशः नमन! भारत माता की जय!

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