01/07/2025
Child Brain Develop Academy.शिक्षा प्रणाली में बच्चों के लिए सबसे पहला उद्देश्य मनोविज्ञान यानी मानसिक विकास होना चाहिए लेकिन भारत में बच्चे समझे में आए या ना आए उसके मस्तिष्क में ऑल सब्जेक्ट घुसेड़ दो बच्चों को तनाव होना स्वाभाविक है
विज्ञान के अनुसार प्रत्येक बच्चों में प्रतिभा है वो अपने अपने फील्ड का स्पेशल है क्योंकि उसकी आंखों के रेटीना और फिंगर प्रिंट एक दूसरों से अलग है अब रही बात बच्चों की किस बच्चे को कौन सब्जेक्ट में मन लगता है किस में नहीं ये स्कूल भी नहीं जज करती है और ना पैरेंट्स लेकिन स्कूल एक आदत ब्रैन में पेटेंट्स को सेट कर दिया की जिसके जितने नंबर उतना जीनियस है
प्राइवेट संस्थान भी कम नंबर नहीं देती है अगर देगी तो उस पर सवाल ,इतना जबाव कौन दे इससे चलो 99% नंबर ही दे दो पेटेंट्स भी खुश ,लेकिन पैरेंट्स को पता होता है जो सुविधा दिया वो टेलेंट नहीं है क्योंकि कभी कभी पड़ोसी के बच्चे को देख कर कुछ कुछ होता है
भारत में समझते कम तुलनात्मक ज्यादा होती है इस जगह पेटेंट्स भी अपने बच्चों को जज करने में फैल होता है क्या पता उस बच्चे कोई अलग टेलेंट हो ये कौन देखता है ,DMIT test , इसके संबंध में कुछ ही पैरेंट्स जानते होगे जैसे महान खिलाड़ी ,एक्टर ,वैज्ञानिक के पेटेंट्स अवगत होगे
मेडिटेशन , कन्सन्ट्रेशन योगा,
मनोविज्ञान का भारत में कोई स्थान नहीं है
मस्तिष्क विकास की बात नहीं है
मस्तिष्क की विश्लेषण पार्ट की विशेषता फंक्शन
इसकी कोई बात नहीं करता है
यानी गाड़ी को बिना समझे डायरेक्ट बेहतर ड्राइवर बनाने की उद्देश्य रखता है
व्यवहारिक ज्ञान, समझ, ये सभी ज्ञान बुक में ही
परी रह जाती है , लोगों की आदत हो गई है हम सम्मान करें या ना करें हमको भरपूर सम्मान चाहिए
पैरेंट्स से संबंध में कुछ लिखो तो वो बेटा अच्छा नहीं होगा
लेकिन कॉपी तो आपका ही होगा देखना चलना बोलना सुनना सभी तो आपसे ही शुरुआत होगी
मनोविज्ञान के अनुसार हम सभी पागल हैं
Mind trainer: Sunil Kumar suman
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आपके सवाल का इंतजार रहेगा