29/10/2025
_अपनों का दर्द_ { गजल }
(मुखड़ा)
जो दर्द मिला, अपनों से मिला
गैरों से शिकायत कौन करें?
अपनों की चुभन, अपनों का गम
कैसे हम बयां करें?
(अंतर-१)
अपनों ने दिल को चोट दी
अपनों ने जख्म दिए
गैरों की गलती क्या दें?
अपनों का ग़म कैसे बयां करें?
(मुखड़ा)
जो दर्द मिला, अपनों से मिला
गैरों से शिकायत कौन करें?
अपनों की चुभन, अपनों का गम
कैसे हम बयां करें?
(अंतर-२)
अपनों के बिना जीवन अधूरा
अपनों के बिना दिल अकेला
अपनों की याद में रोते हैं हम
अपनों के बिना जीवन अकेला
(मुखड़ा)
जो दर्द मिला, अपनों से मिला
गैरों से शिकायत कौन करें?
अपनों की चुभन, अपनों का गम
कैसे हम बयां करें?
(अंतर-३)
सच्चाई यही है, दर्द यही है
अपनों का दर्द, अपनों का गम
गैरों से क्या कहें, अपनों से ही है अब शिकायत
गीतकार: अरविंद कुमार प्रभाकर
गमहरिया, मधेपुरा
03/11/2024
09/10/2024