R P सर की केमिस्ट्री

R P सर की केमिस्ट्री

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आर पी यादव

R P Yadav Chemistry Classes Madhepura
इस कोचिंग में 11th और 12th कि पढ़ाई होती है और यह कोचिंग कोशी कमिश्नरी का नंबर वन संस्थान है इसमें क्लास में डिस्कशन की सुविधा है साथ ही समय-समय पर प्रत्येक चैप्टर का टेस्ट लिया जाता है।

31/05/2026

आज के दौर में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में बहुत सारे लोगों को सम्मानित किया जाता है, तरह-तरह के समारोह होते हैं, लेकिन राष्ट्र के असली निर्माता👉शिक्षकों को अक्सर वह स्थान और सम्मान नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार हैं। ऐसे में जब शिक्षकों के योगदान को सराहा जाता है, तो सचमुच दिल गदगद हो जाता है और मन अत्यंत हर्षित होता है।

'शिक्षक सम्मान समारोह 2026' के मंच पर मिला यह सम्मान मेरे हृदय को छू गया। इस गरिमामयी आयोजन की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि यहाँ शिक्षा जगत के कई कर्मठ और आदरणीय शिक्षकों से मुलाकात हुई। एक ही छत के नीचे इतने सारे मार्गदर्शकों और सम्मानित शिक्षकों से मिलकर, उनके साथ विचार साझा करके अत्यंत प्रसन्नता हुई।

इस अद्भुत और सराहनीय पहल के लिए मैं आयोजक मंडल👉L P Saraf Education and Charitable Trust एवं Mithila Swabhiman Trust को पुनः धन्यवाद देता हूँ। आपने शिक्षकों को यह मान-सम्मान देकर समाज को एक बेहतरीन और सकारात्मक संदेश दिया है।

सभी सम्मानित गुरुजी को मेरा सादर नमन। 🙏

26/05/2026

11वीं

26/05/2026

रविवार को किसी जरूरी काम से पटना जाना हुआ था। काम खत्म होते-होते शाम हो गई लगभग 5 बज चुकी थीं। मन में एक ही छटपटाहट थी कि किसी भी तरह जल्द से जल्द सहरसा लौट जाऊं। सुबह फिर से उन बच्चों के सामने खड़ा होना था जो अपनी आंखों में सुनहरे सपने लेकर मेरी क्लास में आते हैं। अपनी उसी जिम्मेदारी की खातिर मैंने तुरंत लौटने का फैसला किया।

पता चला कि उस वक्त सीधे सहरसा के लिए कोई ट्रेन नहीं थी। इंतजार के बाद मालूम हुआ कि रात 10 बजे पाटलिपुत्र जंक्शन पर 'कामाख्या नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस' आएगी। मैंने सोचा कि इसी से मानसी तक का सफर काट लूंगा और वहां से कोई दूसरी ट्रेन पकड़कर सुबह होने से पहले सहरसा पहुंच जाऊंगा।

जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी, तो वहां का मंजर देखकर कलेजा कांप गया। बोगियां इंसानों से नहीं, बल्कि बेबसी से खचाखच भरी हुई थीं। पैर रखने की जगह नहीं थी, हमको लगा अंदर में जगह होगा उसी पर चढ़ गया चढ़ने के बाद अंदर के हालात देखकर काफी अफसोस हुआ बेकार चढ़ा उसी तंग और दमघोंटू बोगी में जब मैंने अपने आस-पास नजर दौड़ाई, तो देखा कि चारों तरफ सिर्फ युवा चेहरे थे। आपस में हो रही बातों से पता चला कि ये कोई आम मुसाफिर नहीं थे, ये हमारे कोशी सीमांचल का भविष्य थे—जो ITI, पॉलिटेक्निक और पैरामेडिकल की परीक्षा देकर लौट रहे थे।

उन मासूम चेहरों पर परीक्षा का तनाव तो था ही, साथ ही घर लौटने की यह अमानवीय जंग भी साफ दिख रही थी। भेड़-बकरियों की तरह डिब्बों में ठंसे, पसीने से लथपथ उन बच्चों को देखकर एक शिक्षक होने के नाते मेरा दिल चीख उठा। क्या यही सिला मिलता है इस देश में पढ़ने का?

उस भीड़ को देखकर मेरा ध्यान एक और गंभीर समस्या की ओर गया। परीक्षा बोर्ड ने न जाने क्या सोचकर सैकड़ों किलोमीटर दूर-दूर सेंटर फेंक दिए हैं।

कम से कम हमारी बेटियों (छात्राओं) के लिए तो यह नियम होना चाहिए कि उनका परीक्षा केंद्र उनके अपने जिले या नजदीकी शहर में ही दिया जाए।

इतनी दूर-दूर सेंटर होने के कारण न जाने कितनी ही होनहार छात्राओं की परीक्षा छूट गई होगी। हमारे समाज की हकीकत यह है कि बहुत से छात्रों के पिता और भाई रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर (परदेस) रहते हैं। घर पर कोई ऐसा जिम्मेदार पुरुष नहीं होता जो उनके साथ इतनी दूर, इस अमानवीय भीड़ में सफर कर सके। सुरक्षा और रास्ते की इस भयावह परेशानी को देखकर कई मजबूर माता-पिता ने अपनी बेटियों को परीक्षा देने ही नहीं भेजा होगा। यह सिर्फ परीक्षा छूटना नहीं है, यह उन बेटियों के आत्मनिर्भर बनने के सपनों की हत्या है!

मैं पूरी रात सो नहीं पाया। आंखों के सामने बार-बार उन बच्चों के चेहरे घूम रहे थे। मैं सोचने लगा कि एक आम परिवार का बच्चा कितनी मुफलिसी में, कितने अभावों को झेलकर पढ़ता है। उसके मां-बाप पेट काटकर, तिनका-तिनका जोड़कर उसे परीक्षा दिलाने के लिए पैसे जुटाते हैं। इतनी प्रताड़ना, इतना अपमान सहकर ये बच्चे परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं।

लेकिन इस कड़े संघर्ष के बाद उन्हें क्या मिलता है?

कभी पेपर लीक होने का दंश, तो कभी सालों-साल अदालतों और दफ्तरों में लटकती वैकेंसियां।
जब महीनों की रात-दिन की पढ़ाई के बाद परीक्षा रद्द होती है, या सब कुछ सही होने पर भी अंत में 'सिलेक्शन' की लिस्ट से नाम गायब हो जाता है, तब इन बच्चों के दिल पर क्या गुजरती होगी?
वो उम्मीदें जो उनके बूढ़े मां-बाप ने उनसे पाल रखी थीं, जब एक झटके में टूटती हैं, तो यह युवा पीढ़ी गहरे डिप्रेशन के अंधेरे में समा जाती है।

आखिर यह कैसी बेदर्द व्यवस्था है, जो अपने ही देश के नौजवानों और बेटियों को इस कदर बेबस और लाचार बना देती है? क्या परीक्षाओं के दिनों में इन बच्चों के लिए रेलवे दो जोड़ी अतिरिक्त गाड़ियां नहीं चला सकता? क्या नीति निर्माता इतना भी नहीं सोच सकते कि बेटियों का सेंटर नजदीक रखा जाए ताकि परीक्षा देने के लिए उन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े?

कल रात का वह सफर सिर्फ मेरी शारीरिक थकान का गवाह नहीं था, बल्कि वह हमारी चरमराती व्यवस्था और हमारी बेटियों व युवाओं के टूटते हौसलों का एक रोता हुआ दस्तावेज था। अगर आज हम इस मौन दर्द को नहीं समझेंगे, तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।

✍️R P Yadav

24/05/2026

हमारे क्लास में PT, Mains एवं interview रोज होता हैं।

R P Yadav Chemistry 🧪⚗️ Chemistry Classes

Madhepura Bihar

23/05/2026

कल पटना गए थे सोचे एक एक बार मिलके एक फोटो खींचा लेते हैं 😂😄 ये नहीं बोलिएगा ये विदेश में अभी हैं आया था स्पेशल मेरे लिए😂

20/05/2026

12/05/2026

प्रिय विद्यार्थियों,

कल से हम 12वीं केमिस्ट्री के सबसे महत्वपूर्ण चैप्टर 'Electrochemistry'की शुरुआत करने जा रहे हैं। जो भी student अनुपस्थित हैं वो उपस्थित होने का प्रयास करें। क्योंकि चैप्टर के शुरू का जब छूट जायेगा तब पूरे चैप्टर को समझने में दिक्कत होगा।

एक शिक्षक होने के नाते बड़ा दुख तब होता हैं जब कोई विद्यार्थी चैप्टर के बीच में आता है और कुछ दिन बाद यह कहकर चला जाता है कि उसे समझ नहीं आ रहा। सच तो यह है कि जब नींव ही छूट जाए, तो इमारत कभी मजबूत नहीं हो सकती। इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि कल की पहली क्लास को किसी भी हाल में न छोड़ें। शुरुआत के पन्ने ही तय करेंगे कि आपको पूरा चैप्टर कैसा समझ आएगा।

मेरे प्यारे विद्यार्थियों
शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि आपके सपनों की उड़ान है। समय बहुत कीमती है और एक बार बीत गया तो सिर्फ पछतावा रह जाएगा। यदि आप कहीं पढ़ रहे हैं और आपका मन वहां नहीं लग रहा या आपको विषय समझ नहीं आ रहा, तो खुद को और अंधेरे में मत रखिए। कल से हमारा तीसरा चैप्टर शुरू हो रहा है। आपने पिछला क्या पढ़ा या क्या छूटा, उसकी चिंता मत कीजिए। यहाँ से आप एक नई शुरुआत कर सकते हैं।
कुछ विद्यार्थी वहां क्लास ज्वॉइन करता हैं जहां मौज मस्ती होता हैं।क्लास की चहल-पहल और मौज-मस्ती कुछ समय के लिए अच्छी लग सकती है, लेकिन जब परीक्षा का परिणाम आएगा, तब केवल आपकी मेहनत और सही समझ ही आपके काम आएगी। अपने माता-पिता के संघर्षों को याद रखें और मोज-मस्ती के लिए नहीं, बल्कि अपने स्वर्णिम भविष्य के लिए पढ़िए।

कल मिलते हैं क्लास में, एक नए संकल्प के साथ।

आपका मार्गदर्शक,
आर. पी. यादव सर
केमिस्ट्री क्लासेस, मधेपुरा

12/05/2026

12th विद्यार्थी के लिए
संदेश.....


08/05/2026

माता पिता अपने बेटी को खुश रखने के लिए जो दहेज नहीं भी मांगते हैं। उसको बड़ा बड़ा गिफ्ट देते हैं ताकि बेटी खुश रहें।

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