Dhamdhani Raj ji

Dhamdhani Raj ji H.K

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01/11/2025

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Ramesh Sapkota, Subodh Mahato, Manish Vasoya, Shiv Shankar, Madan Sharma, Om Prakesh Singh, Dhruba Saikia, Kantilal Chauhan, Maiya Gurung, Nirmla Singh, Murlidhar, Mohammed Mainuddin, Arjun Boricha, Munna Singh, V. M. Sandhya Pranami, Pramod Baral, Santosh Kumar, Sokendra Singh, Rudra Vala, Radhika Ji, Sweety Sukhija, Suman Kumar, Prakash Bamniya, Ashok Rajpoot, Aman Kumar, नारायण ढकाल प्रणामी, Bal Krishna Shrestha, Pankaj Bhrali, Ramkumar Dahal, Lalsinh Parmar, Ram Udagar Yadav , Raj Kamar Agarwal, BhadurRajpoot BhadurRajpoot, Paresh Parmar, Chandra Prasad Sigdel

13/09/2025

प्राणाधार आत्म सम्बन्धी सुन्दर साथ जी 🌤️रूह असल मोमिन ,
आखिर इमामे मेहंदी श्री विज्याभिनन्द बुधजी निशकलंक कल्कि जी की जय,
प्रेम प्रणाम जी,🙏🌹🌹🌹🌹
महामत कहे मै हक की , खोले मगज मुसाफ कलाम।
और हक़ कलाम कोन खोल सके, जो मिले चौदह तबक तमाम।।
खिलवत 4/58
अर्थ - - - - प्राणाधार आत्म सम्बन्धी सुन्दर साथ जी और सत्य धर्म प्रेमी स्वजन मित्रो बड़ी बुद्धि की स्वामी श्री इंद्रावती जी कहती है कि मैने परब्रह्म परमात्मा जी प्रदत्त उनकी अपनी मै से दुनिया के सभी धर्म ग्रंथो के रहस्यो को खोल दिया है, परब्रह्म परमात्मा अल्लाह के कहे वचनों को परब्रह्म परमात्मा के अलावा कौन खोल सकता है।
हक की बाते अनेक है , कहीं न जाए या मुख ।
इन झूठे खेल में बैठाए के, कै दिए कायम (धाम)सुख।।5/2
अर्थ________ प्रिय सुन्दर साथ जी श्री इंद्रावती जी कहती है कि परब्रह्म परमात्मा के दिल की बाते अनेक है जो इस मुख से कहीं ही नहीं जा सकती है, इन्होंने हम ब्रह्मात्माओं रूह मोमिन को परम धाम अर्श अज़ीम में ही बैठाकर इस इस असत्य और नाशवान दुनिया से जोड़कर परमधाम और इस दुनिया कि तुलना कराकर असंख्य सत्य सुख प्रदान किए।
यो कै दिखाई माया , और कै विध कराई पहेचान।
कै विध बदली मजले, कै पुराए साख प्रमाण निशान।।5/1
अर्थ_________प्राणाधार आत्म सम्बन्धी सुन्दर साथ जी श्री इंद्रावती जी अपने सखियों को समझाते हुए कहती है कि प्रियतम पति परमात्मा जी ने हमे बृज की लीला में बावन दिन की जुदाई देकर अपने प्रेम का अहसास कराया रास में गए तो क्षण भर की जुदाई में ही इन्होंने हम सबको हलकान परेशान कर दिया और हमारा अहम चूर कर हमे अपने प्रेम का प्रमाण देकर अपने नजदीक लगाया , परन्तु हम अब भी अपने पिया जी के प्रेम - महिमा और मूल स्वरूप की पहचान नहीं कर पाए तो पिया जी ने जागनी की लीला रचकर अपने पूर्ण स्वरूप सत-चित्त-आनन्द-हुक्म और इलम के स्वरूप को वेद और कतेंब के निशानों और प्रमाण (मूल तारतम और कलमा) से जाहिर कर दिया ।
अब आया बखत रेहेनीय का, रात मेट हुईं फजर।
अब केहेंनी रेहेनी हुआ चाहें, छोड़ दुनी ले अरस नज़र।।5/4
अर्थ________प्रिय सुन्दर साथ अब आप इतना पक्का जान ले की कदर की रात (लीला जागनी ) ख़तम होकर दिन कयामत को सूर्य सिर पर चढ़ आया है ,अब तो सब कहनी सुननी ख़तम हो चुकी है , और इन पूर्ण ब्रह्म परमात्मा जी के अनुसार रहने या व्यवहार या हाल के अनुसार चलने का समय आ चुका है । और इस दुनिया के द्वैत को छोड़कर अद्वैत को धारण कर अखंड परमधाम की राह पकड़ो ।
परन्तु कितने दुर्भाग्य की बात है कि दुनिया के लोगो की तो क्या कहें अपने धर्मी लोग कथित श्री कृष्ण प्रणामी धर्म के सब गादीपति और इन धर्म के ठेकेदार अब भी प्रथम लीला बृज के श्री कृष्ण जी और इनकी योगमाया की आह्लदनी शक्ति श्री राधे जी में ही अटकी हुई है।
प्रिय सुन्दर साथ जी इन अनिल के वाणी शब्दो को हलके में मत लो , नहीं तो अन्त मे पछताने का भी समय नही मिलने वाला है ।
हुकमें हाथ पकड़ के , दिया फैल हाल बेशक ।
तब जोश इश्क दिखाईया, जासो पाया हक़।।5/11
अर्थ______प्राणाधार आत्म सम्बन्धी सुन्दर साथ जी महामति श्री इंद्रावती जी कहती है कि धनी जी के हुक्म के स्वरूप ने स्वयं महामती इंदरावती हाथ पकड़ कर स्वयं सब प्रकार से इन्हे बेशक किया है। तब धाम धनी परब्रह्म स्वामी जी जी ने इन्हे अपने इलम और इश्क का स्वरूप दिखाया है , जिससे इस दुनिया के सब जीव परब्रह्म परमात्मा के सच्चे सुख को प्राप्त कर सकें।
आपका अपना साथ
प्रेम प्रणाम जी,

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01/06/2025

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06/04/2025

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Pranamji.....
09/12/2024

Pranamji.....

सुन्दरसाथजी ! दिनांक 17/09/2024 मंगलवारको निजानन्दाचार्य सद्गुरु श्री देवचन्द्रजी महाराजजीकी पुण्यतिथि है । उनकी 369 वीं...
17/09/2024

सुन्दरसाथजी ! दिनांक 17/09/2024 मंगलवारको निजानन्दाचार्य सद्गुरु श्री देवचन्द्रजी महाराजजीकी पुण्यतिथि है । उनकी 369 वीं पुण्यतिथि पर कीटी कोटी प्रणाम ।
सम्वत सत्रह बारोतरे वरष, भादों मास उजाला पख ।
चतुर्दशी बुधवारी भई, सनंध सबै विहारीजीको कही ॥
मध्यरात पीछे कियो परियाण, विहारीजीको सुध भई कछु जान ।
(श्री तारतम सागर)
सम्वत सत्रह सै बारोत्तरे, भादों मास उजाला पख ।
चतुर्दशी बुधवार को, हुए धनी अलख ।।
बरस चौहत्तर में, न्यून भया एक मास ।
तब सौंप चले श्री मिहिराजको, उम्मत खासल खास ।।
बरस चौबीस मास दस, ऊपर भये पाँच दिन ।
तहाँ लों सोहबत रहे, बीच गिरोह मोमिन ।।
(श्री लालदास वीतक प्रकरण 13)
या विधि दिन बाइस लौं, रहे साथके माहिं ।
कूच कर्यो घरको गये, हृदय१ धामके माहिं ॥
(वृत्तांत मु. ३९)

16/07/2024

*प्रेम प्रणाम जी*
🪷🙏🪷
💫
*🌹तत्तव सहुए एणी जीती लीधा, चौदे लोक पोताना कीधा।*
*🌹वली लीधो तत्तव मोह, जे थकी उपमा सहू कोय।।*
श्री रास.१/७.

*अर्थात् :-* इस माया ने सभी देवों को रचा और उनके घर रानी बनकर उनकी प्रवृत्तियों को अपने अनुकूल बनाया। पांचों तत्व पृथ्वी,जल, वायु,आकाश, अग्नि को रचने और गतिशील बनाने वाली माया उन तत्वों को अपने अधीन रखकर अपनी उंगली पर नचाती हैं। इन तत्व द्वारा रचित चौदह लोकके प्राणी एवं देवादि सबको इसने अपने अनुकूल बना रखा है। इन सबके उपरान्त, इन सबका मूल मोह तत्व भी इसी माया के संकेत पर बिखरता सिमटता है। अर्थात् सबको उत्पन्न करने वाला भी इसके संकेतों पर ही चलता है।

*एहना आयुध अमृत रूप रस, छल बल वल अकल।*
*अगन कोटल ने कोमल, चंचल चतुर चपल।।*
श्री रास.१/९.

श्री महामति कहते हैं कि इस माया के हथियार जिनसे ये सबको अपने वशीभूत कर लेती है—देखने में बड़े मधुर और सरल लगते हैं। यह ठगिनी मीठी वाणी, सुन्दर रूप एवं रसमय पदार्थों से सबको प्रसन्न कर लेती है। छल से चतुराई और टेढ़ाई दिखाकर अपनी बुद्धि कौशल से सबको अपना बना लेती है। इसके स्वभाव में दावनल कीइ सी ज्वाला, बगुले जैसी कुटिलता है किन्तु व्यवहार में कोमलता और सम्मोहन है। यह चंचला है, चतुर हैं और तीव्र स्वभाव वाली चपला है। इस माया का वाणी ग्रंथों में कई स्थानों पर उल्लेख हुआ हैं। कुछ अन्य चौपाइयां उद्धृत हैं।

*पहले पेड़ देखो माया को, जाको न पाइये पार।*
*जगत जनेता जोगनी, सो कहावत वाल कुमार।।*
कि. २८/३.

श्री महामति कहते हैं कि पहले आप माया का मूल देखो। उसके ओर-छोर का पार नहीं पाया जा सकता। यह माया सारे जगत् की जननी है फिर भी यह योगिनी और बाल कुमारी कहलाती है

🙏
*प्रेम प्रणाम जी*
*सुन्दर साथ जी*
🌹🌼🏵️☘️🍁

16/07/2024
Good Morning Pranamji
16/07/2024

Good Morning Pranamji

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