18/09/2019
पुराणों की उत्पत्ति
पुराण, हिंदुओं के धर्मसंबंधी आख्यानग्रंथ हैं जिनमें सृष्टि, लय, प्राचीन ऋषियों, मुनियों और राजाओं के वृत्तात आदि हैं। ये वैदिक काल के काफ़ी बाद के ग्रन्थ हैं, जो स्मृति विभाग में आते हैं। भारतीय जीवन-धारा में जिन ग्रन्थों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति-ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अठारह पुराणों में अलग-अलग देवी-देवताओं को केन्द्र मानकर पाप और पुण्य, धर्म और अधर्म, कर्म और अकर्म की गाथाएँ कही गई हैं। कुछ पुराणों में सृष्टि के आरम्भ से अन्त तक का विवरण किया गया है। इनमें हिन्दू देवी-देवताओं का और पौराणिक मिथकों का बहुत अच्छा वर्णन है।
ब्रम्ह पुराण में 10000 श्लोक है ,
नारदिए पुराण में 25000 श्लोक हैं,
पदम् पुराण में 55000 श्लोक है ,
विष्णु पुराण में 23000 श्लोक है ,
शिव पुराण में 24000 श्लोक है ,
श्री मद भागवत पुराण में 18000 श्लोक है ,
मार्कंडेय पुराण में 9000 श्लोक है ,
अग्नि पुराण में 15400 श्लोक है ,
भविष्य पुराण में 14500 श्लोक है ,
लिंग पुराण में 11000 श्लोक है ,
वराह पुराण में 24000 श्लोक है ,
इस्कंद पुराण ने 81100 श्लोक है ,
वामन पुराण में 10000 श्लोक है ,
कुर्म पुराण में 17000 श्लोक है ,
ब्रम्हा वैवर्त पुराण में 18000 श्लोक है ,
मत्सत्य पुराण में 14000 श्लोक है ,
गरुण पुराण में 19000 श्लोक है ,
ब्रह्माण्ड पुराण में 12000 श्लोक है ,
इस प्रकार सब पुराणों की श्लोक संख्या 4 लाख होती है भगवद जी की श्लोक संख्या 18000 है और कुल स्कंद 12 है जिनमे 326अध्याय है तथा इन 326 अध्यायों के अंतर्गत 763 कथाये।।
सनातन धर्म की जय हो।
विशेष निवेदन:-
अगर आप इस पेज के पोस्टों को सच में पसंद करते हैं और चाहते हैंकि इस पेज की पहुॅच सर्वाधिक समाज तक हो सके तो कृपया
कर इस पेज को ज्यादा से ज्यादा लाइक एवं शेयर कर अपना बहुमूल्य योगदान प्रदान करे ताकि हम सर्व समाज में ज्ञान का विस्तार करने में सफल हों सकें ।
धन्यवाद ।
राधेकृष्ण
श्री राधा विजयते नमः