26/09/2026
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मैं हूँ सिंधु ताई सपकाल
⭐पात्र परिचय : एक विद्यार्थी सिंधु ताई बनकर कक्षा के सामने अभिनय करेगा। साथ में 2-3 अनाथ बच्चे, समाज सेवक और पत्रकार बन सकते हैं।
to school Mrs Savita Khosla.
नमस्ते बच्चों!
⭐मैं हूँ सिंधु ताई सपकाल!
लोग मुझे माई कहते हैं - हज़ारों अनाथ बच्चों की माई। ⭐मेरा जन्म 14 नवंबर 1948 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में हुआ था।
⭐मेरी , संघर्ष से ममता तक की कहानी है, सुनो :
⭐बचपन की सिंधु : मेरे पिता मुझे पढ़ाना चाहते थे, पर गरीबी के कारण चौथी कक्षा के बाद स्कूल छूट गया। 10 साल की उम्र में मेरी शादी मुझसे 20 साल बड़े व्यक्ति से कर दी गई।
⭐पति द्वारा ठुकराई सिंधु : पति ने मुझे घर से निकाल दिया। मैं गर्भवती थी, रेलवे स्टेशन पर मैंने बेटी को जन्म दिया। भीख माँगकर मैंने अपनी बेटी को पाला।
⭐सिंधु ताई (संकल्प लेकर) : रेलवे प्लेटफॉर्म पर मैंने देखा - कितने ही अनाथ बच्चे भूखे सोते हैं! तभी मैंने ठान लिया - अब जो अनाथ मिलेगा, वही मेरा बच्चा होगा!
⭐अनाथ बच्चे (दौड़कर) : माई! माई! हमें भूख लगी है!
⭐सिंधु ताई (गले लगाकर) : आओ मेरे बच्चों! भीख माँगकर भी मैं तुम्हें पालूँगी, पढ़ाऊँगी। तुम ही मेरा परिवार हो!
और देखो!👁️
मैंने 1,000 से अधिक अनाथ बच्चों को पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया। उनमें से कई डॉक्टर, वकील, इंजीनियर बने।
मैंने “सप्तसिंधु महिला आधार बाल निकेतन" जैसे कई आश्रम बनाए।
⭐पत्रकार : ताई! आपको पद्मश्री सहित 700 से अधिक पुरस्कार मिले। आप क्या कहना चाहेंगी?
सिंधु ताई :
⭐मैं सिर्फ इतना जानती हूँ -
"मेरे जीवन का दुःख ही मेरी शक्ति बना।"
जिसने दुःख देखा है, वही दूसरों का दुःख समझ सकता है।
तो याद रखो बच्चों -
जब ममता स्वार्थ से बड़ी हो जाती है, तो एक माँ हज़ार बच्चों की माई बन जाती है। मैं हूँ सिंधु ताई!
धन्यवाद!
to school Mrs Savita Khosla.