25 अप्रैल 2026 World malaria day 2026
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25/04/2026
विश्व पशु चिकित्सा दिवस 2026, 25 अप्रैल 2026 (शनिवार) को मनाया जा रहा है। इस वर्ष का विषय "पशु चिकित्सक: भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक" (Veterinarians: Guardians of Food and Health) है। यह दिन पशु स्वास्थ्य, कल्याण और जन स्वास्थ्य के लिए पशु चिकित्सकों के अमूल्य योगदान और समर्पण को सम्मानित करता है।
मुख्य विवरण:
दिनांक: 25 अप्रैल 2026
थीम: 'पशु चिकित्सक: भोजन और स्वास्थ्य के संरक्षक'
25/04/2026
#विश्व_मलेरिया_दिवस_2026
(World Malaria Day 2026)
हर साल की तरह 25 अप्रैल को मनाया जा रहा है। यह दिन मलेरिया के खिलाफ वैश्विक जागरूकता, नियंत्रण और उन्मूलन (elimination) के प्रयासों को तेज करने के लिए समर्पित है।
2026 की #थीम:
इस वर्ष की थीम "Driven to End Malaria: Now We Can. Now We Must" (मलेरिया को समाप्त करने के लिए प्रेरित: अब हम कर सकते हैं। अब हमें करना ही होगा) है। यह थीम वैज्ञानिक प्रगति, नए टीकों और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से मलेरिया-मुक्त दुनिया की संभावना पर जोर देती है।
बाबू वीर कुंवर सिंह (1777–1858)
परिचय
बाबू वीर कुंवर सिंह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानायक थे।
वे जगदीशपुर (आरा, बिहार) के राजपूत जमींदार थे।
1857 के विद्रोह में बिहार क्षेत्र के सबसे प्रभावी सैन्य नेता माने जाते हैं।
****महत्वपूर्ण तिथियाँ****
जन्म: 13 नवंबर 1777
विजय दिवस: 23 अप्रैल 1858
मृत्यु: 26 अप्रैल 1858
****1857 विद्रोह में भूमिका***
विद्रोह के दौरान उन्होंने आरा और जगदीशपुर को विद्रोह का केंद्र बनाया।
अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने बिहार से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक संघर्ष किया।
उन्होंने ब्रिटिश सेना को कई बार पराजित किया और लंबे समय तक संघर्ष जारी रखा।
23 अप्रैल 1858 – विजय दिवस
23 अप्रैल 1858 को उन्होंने जगदीशपुर किले पर पुनः कब्जा किया।
यूनियन जैक उतारकर अपना ध्वज फहराया।
यह दिन बिहार में “विजयोत्सव” के रूप में मनाया जाता है।
रणनीति और युद्ध कौशल
वे गोरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) में निपुण थे।
कम संसाधनों के बावजूद मोबाइल युद्ध रणनीति अपनाकर अंग्रेजों को लगातार चुनौती दी।
विशेष तथ्य (Prelims Ready)
उन्होंने लगभग 80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध किया।
घायल होने पर उन्होंने अपना हाथ काटकर गंगा को समर्पित कर दिया (लोकप्रचलित घटना)।
उन्हें 1857 के विद्रोह का “अमर नायक” कहा जाता है।
23/04/2026
**परमाणु शीतकाल (Nuclear Winter)**
परमाणु शीतकाल वह काल्पनिक स्थिति है जो बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध के बाद उत्पन्न हो सकती है। इस स्थिति में विस्फोटों से उठने वाला धुआँ, धूल और कालिख वायुमंडल में फैलकर सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने से रोक देते हैं।
**व्याख्या (Explanation):**
जब सूर्य का प्रकाश अवरुद्ध हो जाता है, तो पृथ्वी का तापमान अचानक गिरने लगता है। इससे जलवायु प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जैसे—
* वैश्विक तापमान में तीव्र गिरावट
* वर्षा चक्र में असंतुलन
* कृषि उत्पादन में भारी कमी
* खाद्य संकट और पारिस्थितिकी तंत्र का विघटन
**परिणाम (Consequences):**
* पृथ्वी पर जीवन के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है
* कई जीव-जंतु और पौधों की प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं
* मानव सभ्यता पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है
निष्कर्ष
परमाणु शीतकाल एक ऐसी विनाशकारी पर्यावरणीय स्थिति है, जो परमाणु युद्ध के बाद वैश्विक स्तर पर ठंड, अंधकार और जीवन संकट को जन्म देती है।
22/04/2026
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