Astrology Guidance

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Vedic Astrology -- Jyotish. Services of world-renowned astrologer. Personalized predictions.

25/11/2018
23/08/2018

The best blush to use is laughter: It puts roses in your cheeks and in your soul.
- Linda Knight

Laughter is a tranquilizer with no side effects.
- Arnold Glasow

Laughter is the most healthful exertion.
- Christoph Wilhelm Hufeland

Laughter is part of the human survival kit.
- David Nathan

The most wasted of all days is one without laughter.
-Cummings

He who laughs, lasts.
-Victor Borge

Comedy is simply a funny way of being serious.
- Edison

Laughter is the language of the Gods
- Russ Dudley.

19/08/2018

ऐम श्रीम हरींग क्लीम ॐ माँ
ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ 卐ॐ
वन्दे वाणी विनायकौ

मित्रो कालजयी बनाये आप सबको आपके कर्म व् आपके लिए व् स्वयम के इसी कामना के साथ मै इस का प्रारम्भ करता हूँ
मै और आप सब पैदा हो चुके है और जन्म कुंडली निर्धारित हो चुकी है
सम्भवता कई कुंडली में काल सर्प होगा व् कईयों में विष या दरिद्र या और कोई और अशुभ योग होगा ! अतः क्या उसे भोगने के सिवा कोई उपाय नही है !
मै अल्पबुद्धि व्यक्ति समझता हूँ की ऎसी भावना तो ब्रह्मा जी की नही रही होगी और पूर्वार्जित पाप पूरे इस जन्म को सर्वकष्टमयी तो नही बनाते होंगे !
इस ही सन्दर्भ में मै कहने लिखने की कोशिश कर रहा हूँ इस उम्मीद में की शायद आपके मतलब का हो व् कुछ मेरे परिश्रम का लाभ सबको मिले
वैसे उपाय तो अनगिनित है और उल्लेख भी कई जगह मिलता है और लोगों द्वारा अनुभूत भी है पर चिकित्सा के लिए चिकित्सक अनिवार्य है और निपुण चिकित्सक सहज उपलब्ध नही है और सर्वजनिक भी नही है
एक दोहे में वैसे एक सर्व कष्ट निवारक उपाय की आर इशारा है
जो तप करै कुमारी तुम्हारी
भावी मेट सके त्रिपुरारी
पर क्या तप का भाव समझना सरल है व् इसको करना सरल है क्यूँ ना ये सर्वोत्तम ही हो!
अगर मेरे भाव से आप भी सहमत है तो देखते है की क्या मेरी औषधी ग्रह में कोई दवा है हम सबके लिए उपयुक्त - और ये विवाह को और जिनका समय पूर्वनिश्चित को छोड़ – लगभग सब जगह काम आ सकती है !
कुंडली कैसी भी हो समय कैसा भी हो इस युक्ति को अपनाने से कुछ सफलता की सम्भावनाये बढ़ जाने की आशा होती है ऐसा मेरा अनुभव है!
१.जिस ग्रह के नक्षत्र में आपका जन्म हुआ है उस गृह के तीनों नक्षत्र तो लिख ले!
२. अब वे तीनो नक्षत्र किस तिथि को पड़ने वाले है वह तिथि व् वार नोट कर ले!
३. उस नक्षत्र तिथि और वार जब तीनो हो उस समय कौन कौन से लग्न
उदय हो रहे है नोट कर लें !
४. पूर्णिमा व् अमावस्या को इस गणना से हटा दे
५. अब आपके पास चार चीज़े है तिथि वार नक्षत्र व् लग्न
६. जो भी लग्न है उसे मेष से गिन ले
७. तिथि का अंक तो समझाने की आवश्यकता नही है प्रथम तो एक पंचमी
तो ५ नौमी तो ९ वगैरह
८. वार की गणना रविवार से शुरू होगी सो वह १ है इसी तरह गुरूवार ५ है
और शनिवार ७
९. नक्षत्र की गणना अश्विनी से होगी
१०.अब सब को जोड़ ले और जो योग आये उसे ९ से भाग दे दें
११. अब देखे शेष क्या बचा है
१२. अगर शून्य या ३ य़ा ५ या ७ है तो यह मुहूर्त जो इस गणना से निकला है
वह किसी काम को शुरू करने के लिए उपयुक्त है परन्तु अभी यह भी
देख ले की उस मुहूर्त में शुक्र या/और गुरु अस्तगत अथवा त्रिक भाव्में
तो नही है!
१३. अगर है तो और मुहूर्त देखे व् उससे महत्वपूर्ण कार्य शुरू करे

इसमें ये देखने की अनिवार्यता नहीं होती की नक्षत्र शुभ है या वार शुभ है या तिथि शुभ है या पंचक है या चातुर्मास है वगैरह

इनके इलावा अबूझे मुहूर्त भी होते है जो निम्नलिखित है
१. चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा
२. वैशाख शुक्ल तृतीया
३. विजय दशमी
४. दीपावली प्रदोष काल का आधा भाग
५. बसंत पंचमी
६. फुलेरा द्दोज ( फाल्गुन शुक्ल द्वितीया)
७. राम नवमी
८. बुध पूर्णिमा
९. ज्येष्ठ शुक्ल दशमी अथवा गंगा दशमी
१०. भ्द्ल्या नवमी अथवा आषाढ़ शुक्ल नवमी जब गुप्त नव रात्रि का अंतिम दिन होता है
११. मकर संक्रान्ती
१२.देवउठनी एकादशी मतानुसार सिर्फ विवाह के लिए
१३ मेष संक्रांति अथवा बैसाखी

ये मुहूर्त लोक मान्यता पर आधारित है व् कई जगह इन्हें महत्व नही दिया जाता !
इनके इलावा ब्रह्म, अम्रत व् अभिजीत मुहूर्त भी शुभ माने गये है
अभीजीत मुहूर्त सोमवार व् शुक्रवार को त्याज्य है और लगभग तब पड़ते है जब सूर्य देव सर पर होते है

ब्रह्म व् अम्रत अगर ये माने की सूर्योदय ६ बजे हो रहा है और दिनमान व् रात्रिमान दोनों १२-१२ घंटे के है तो वह ४.२४ से ५.१२ व् २.०० से २.४८ के बीच रात्री में होते है!

इसके इलावा गौधूली मुहूर्त अथवा गौधूली लग्न का भी वर्णन मिलता है पर इसमें मतभेद बहुत है ज्ञानियों के बीच ! किसी के अनुसार ये सूर्यास्त से १२ मिनट पहले शुरू होकर १२ मिनट बाद तक रहती है , किसी के अनुसार सूर्योदय लग्न से ७ वि राशी होती है और जब तक वह लग्न में रहे तब तक ये मुहूर्त रहता हैं, किसी के अनुसार ये ६ घटी सूर्यास्त के बाद तक रहती है सूर्यास्त से जो की सूर्यास्त और मध्यरात्री का मध्य है और कुछ के अनुसार ये सूर्यास्त से २४ मिनट पहले से २४ मिनट बाद तक रहती है !
उत्तम मेरे हिसाब से पहली गणना ही है
---पं अतुल कौल मोजज़ा --- ९१४०८२०६७२
मंगलामुखी
सदैव सुखी इति शुभम

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