U P Sericulture Technical Employees Association

U P Sericulture Technical Employees Association

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U. P. Sericulture Technical Employees Association
is a staff organisation of Department of Sericulture Development
Governmet of Uttar Pradesh, India.

11/08/2025

सीतापुर उत्तर प्रदेश मे "मेरा रेशम मेरा अभिमान" MRMA के तहत जागरुकता कार्यक्रम दिनांक 11.08.2025 को राजकीय रेशम फार्म परसेंडी में आयोजित किया गया. जिसमें रेशम कृषकों सहित कुल 48 लोगों ने सहभागिता किया. इस अवसर पर सीएसबी बीटीएसएसओ बिलासपुर के वैज्ञानिक डॉ जयप्रकाश पाण्डेय, श्री अमित रघुवंशी सहायक निदेशक रेशम सीतापुर, श्री प्रमोद कुमार एसडीओ एवं श्री सतीश कुमार, एएसडीओ राज्य रेशम विभाग उत्तर प्रदेश व श्री बीरेन्द्र कुमार रेशम सहायक ने कृषकों की जागरूकता हेतु व्याख्यान दिया. साथ ही इस टीम ने तकनीकी के प्रदर्शन हेतु सीतापुर के राजकीय रेशम फार्म परसेंडी एवं आस पास के क्षेत्रों का भ्रमण किया, रेशम कृषकों से चर्चा किया एवं रेशम से जुड़े लोगों से जानकारी एकत्र किया एवं रेशम कीटपालन के विषयों पर चर्चा किया। इसके साथ ही राज्य रेशम विभाग के अधिकारियों से "मेरा रेशम मेरा अभिमान" के तहत सीतापुर जनपद में रेशम उद्योग को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया ।

Photos from U P Sericulture Technical Employees Association's post 29/07/2025

MRMA के तहत दिनांक 29.07.2025 को सीएसबी बीटीएसएसओ बिलासपुर के वैज्ञानिक डॉ जयप्रकाश पाण्डेय ने श्री अमित रघुवंशी सहायक निदेशक रेशम सीतापुर एवं श्री सतीश कुमार, एएसडीओ, राज्य रेशम विभाग उत्तर प्रदेश के साथ सीतापुर के राजकीय रेशम फार्म परसेंडी एवं आस पास के क्षेत्रों का भ्रमण किया, रेशम कृषकों से चर्चा किया एवं रेशम से जुड़े लोगों से जानकारी एकत्र किया एवं रेशम कीटपालन के विषयों पर चर्चा किया। इसके साथ ही रेशम विकास विभाग के अधिकारियों से "मेरा रेशम मेरा अभिमान" के तहत सीतापुर जनपद में रेशम उद्योग को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया ।

11/07/2025

मुर्गी अंडे दे रही थी और मालिक बेंच रहा था।
मुर्गी देशहित में अंडे दे रही थी।
उसके मालिक ने कहा था-
’’ आज राष्ट्र को तुम्हारे अंडों की जरूरत है।
यदि तुम चाहती हो कि तुम्हारा घर सोने का बन जाये तो जम के अंडे दिया करो। आज तक तुमसे अंडे तो लिये गये लेकिन तुम्हारा घर किसी ने सोने का नही बनवाया। हम करेंगे। तुम्हारा विकास करके छोड़ेंगे।’’
मुर्गी खुशी से नाचने लगी।
उसने सोचा देश को मेरी भी जरूरत पड़ती है।
वाह मैं एक क्या कल से दो अंडे दूंगी।
देश है तो मैं हूं।
वह दो अंडे देने लगी।
मालिक खुश था।
अंडे बेचकर खूब पैसे कमा रहा था।
मालिक निहायत लालची सेठ था।
उसने मुर्गी की खुराक कम कर दी।
मुर्गी चौंकी। -’’ आज मुझे पर्याप्त खुराक नहीं दी गई। कोई समस्या है क्या ?’’
-’’ देश आज संकट में है। किसी भी मुर्गी को पूरा अन्न खाने का हक नहीं। जब तक एक भी मुर्गी भूखी है मैं खुद पूरा आहार नहीं लूंगी। हम देश के लिए संकट सहेंगे।’’
मुर्गी आधा पेट खाकर अंडे देने लगी। मालिक अंडे बेचकर अपना घर भर रहा था।
बरसात में मुर्गी का घर नहीं बन पाया।
मुर्गी बोली- आप मेरे सारे अंडे ले रहे हैं। मुझे आधा पेट खाने को दे रहे है। कहा था कि घर सोने का बनेगा। नहीं बना। मेरे घर की मरम्मत तो करवा दो।
मालिक भावुक हो गया।
बोला "तुमने कभी सोचा है इस देश में कितनी मुर्गियां हैं जिनके सर पर छत नहीं हैं। रात-रात भर रोती रहती हैं। तुम्हें अपनी पड़ी है। तुम्हें देश के बारे में सोचना चाहिए। अपने लिए सोचना तो स्वार्थ है।’’
मुर्गी चुप हो गई। देशहित में मौन रहने में ही उसने भलाई समझी।
अब वह अंडे नहीं दे पा रही थी।
कमजोर हो गई थी।
न खाने का ठिकाना न रहने का।
वह बोलना चाहती थी लेकिन भयभीत थी।
वह पूछना चाहती थी-
"इतने पैसे जो जमा कर रहे हो- वह क्यों और किसके लिए?
देशहित में कितना लगाया है?"
लेकिन पूछ नहीं पाई।
एक दिन मालिक आया और बोला- ’’ मेरी प्यारी मुर्गी तुझे देशहित में मरना पड़ेगा। देश तुमसे बलिदान मांग रहा है। तुम्हारी मौत हजारों मुर्गियों को जीवन देगा।’’
मुर्गी बोली "लेकिन मालिक मैने तो देश के लिय बहुत कुछ किया है,"
मालिक ने कहा अब तुम्हे शहीद होने पड़ेगा।
बेचारी मुर्गी को अब सब कुछ समझ आ गया था
लेकिन अब वक्त जा चुका था और मुर्गी कमज़ोर हो चुकी थी, मालिक ने मुर्गी को बेच दिया।
मुर्गी किसी बड़े भूखे सेठ के पेट का भोजन बन चुकी थी।
*मुर्गी देशहित में शहीद हो गई.*🐔🙊🙈
(नोट- जो आप सोच रहे हैं ऐसा बिल्कुल भी नही है।
ये सिर्फ एक मुर्गी की कहानी है।
युवा बेरोजगारों, किसानों ,मध्यवर्गीय नागरिकों, मजदूरों,गरीबों , कर्मचारियों को और अधिक उन्मादी होकर राष्ट्रभक्ति में *बिना चू चप्पड़ किये* देशी नेताओ और कॉरपोरेट्स की तिजोरी भरना महान राष्ट्रभक्ति और युगधर्म की कसौटी है। इसपर चलते रहें ")
*जब पेंशन के रूप में अपना अधिकार मांगेंगे तो कहेंगे कि देश पर बोझ पड़ेगा और जब अपने वेतन भत्ते बढ़ाने होंगे तो हाथ उठाकर बिना बहस किये बढा लेंगे,हमे एक भी पेंशन नही देंगे और स्वयं तीन तीन पेंशन लेंगे*
*देशहित में ज्यादा से ज्यादा शेयर करे*🙏
*जय युवा जय अटेवा*

01/01/2024
Photos from U P Sericulture Technical Employees Association's post 06/11/2023

Silk Directorate and Khadi Village Industries Department are organising a grand fashion show on 7th November at 07:00 pm at Jupiter Hall, Indira Gandhi Pratishthan, Gomti Nagar, Lucknow.

Famous fashion designers and will present the and garments made by the weavers of the state through famous models.

You are invited with your family to and grand fashion show.



Rakesh Sachan
Sunil Kumar Verma IAS

20/07/2021

सत्ता के द्वारा किया गया निष्पक्ष न्याय आम जनता को भी दिखना चाहिए। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था 1 अप्रैल 2004 से समाप्त कर दी गयी थी। कर्मचारियों द्वारा विगत कई वर्षों से पुरानी पेंशन बहाल करने की लगातार मांग की जा रही है। यदि कर्मचारियों को पेंशन का अधिकार नही है, तो जनप्रतिनिधियों व मा0 न्यायमूर्तियों को भी पेंशन लेने का कोई नैतिक अधिकार नही है।

हमारी सरकार से मांग है या तो कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए या फिर जनप्रतिनिधियों / न्यायधीशों को भी नई पेंशन व्यवस्था की परिधि लाया जाए।

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