Civil services preparation jeetu tiwari

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21/11/2022

#सूर्यदृष्टि-1
गलत तथ्य- पुस्तक में वर्णित।

सही तथ्य-
आफरासियाब तूरान का शासक था ना कि ईरान का। उसने ईरान की विजय की थी।

बलबन स्वयं को आफरासियाब का वंशज मानता है ना कि अफरासियाब बलबन का वंशज था।

इतिहास की प्रचलित पुस्तकों में गलत तथ्यों के संदर्भ संबंध में मैंने #सूर्यदृष्टि श्रृंखला शुरू की है। अपेक्षा है कि आपको मेरी पूर्व प्रचलित विभिन्न श्रृंखलाओं के समान ही यह भी लाभान्वित करेगी।

21/10/2021

#अकाट्य_तथ्य

"1906 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में अध्यक्ष रहे दादा भाई नौरोजी का भाषण गोपाल कृष्ण गोखले ने पढ़ा था ना कि मोहम्मद अली जिन्ना ने।"
जीतेंद्र तिवारी असिस्टेंट प्रोफेसर, इतिहास

उक्त कथन मैंने कुछ वर्ष पूर्व किसी प्रामाणिक पुस्तक में पढ़ा था । यदि किसी परीक्षा में उक्त प्रश्न आया है और आपको आपत्ति दर्ज करानी है तो मैं इसके स्रोत ढूंढने में अपना समय व्यय करूं अन्यथा आप उक्त कथन को सत्य माने फिर आपकी इच्छा।

स्क्रीनशॉट ले लो।

06/07/2021

अलंकार ट्रिक नोट! Jeetu Tiwari

06/01/2021

प्रिय दोस्तों,
यूँ तो बूकलिस्ट पीडीएफ यहाँ कई बार बताया जा चुका है परन्तु प्रायः यह देखा गया है कि अभ्यर्थी इतिहास की पुस्तकों को लेकर अक्सर कंफ्यूज रहता है। अतः मानक पुस्तकों को यहाँ लिख रहा हूँ। यहीं से आपकी तैयारी शुरू होनी चाहिए, मैं मुख्य परीक्षा के लिहाज से कह रहा, हालाँकि NCERT तो पढ़ना ही चाहिए, चाहे कोई भी विषय हो।
प्राचीन इतिहास: RS SHARMA
मध्यकालीन इतिहास: सतीश चंद्र
आधुनिक इतिहास: बिपिन चंद्र

ये तीनों ही वामपंथी इतिहासकार हैं परन्तु ये सारगर्भित हैं।

Photos from Civil services preparation jeetu tiwari's post 10/08/2020

संस्कृत हस्तलिखित नोटस
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जीतू तिवारी👌💞

23/07/2019

3


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#संधि:- दो पदों में संयोजन होने पर जब दो वर्ण पास -पास आते हैं , तब उनमें जो विकार सहित मेल होता है , उसे संधि कहते हैं !

संधि के प्रकार:

1. स्वर संधि :

दो स्वरों के पास -पास आने पर उनमें जो रूपान्तरण होता है , उसे स्वर कहते है ! स्वर संधि के पांच भेद हैं :-

दीर्घ स्वर संधिगुण स्वर संधियण स्वर संधिवृद्धि स्वर संधिअयादि स्वर संधि

A- दीर्घ संधि- जब दो सवर्णी स्वर पास -पास आते हैं , तो मिलकर दीर्घ हो जाते हैं !

जैसे:- अ+अ = आ, भाव +अर्थ = भावार्थ

इ +ई = ई, गिरि +ईश = गिरीश

उ +उ = ऊ, अनु +उदित = अनूदित

ऊ +उ =ऊ, वधू +उत्सव =वधूत्सव

B- गुण संधि :- अ तथा आ के बाद इ , ई , उ , ऊ तथा ऋ आने पर क्रमश: ए , ओ तथा अनतस्थ र होता है इस विकार को गुण संधि कहते है !

जैसे :- अ +इ =ए देव +इन्द्र = देवेन्द्र

अ +ऊ =ओ जल +ऊर्मि = जलोर्मि

अ +ई =ए नर +ईश = नरेश

आ +इ =ए महा +इन्द्र = महेन्द्र

आ +उ =ओ नयन +उत्सव = नयनोत्सव

C- यण संधि :- यदि इ , ई , उ , ऊ ,और ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो इनका परिवर्तन क्रमश: य , व् और र में हो जाता है !

जैसे - इ का य = इति +आदि = इत्यादि

ई का य = देवी +आवाहन = देव्यावाहन

उ का व = सु +आगत = स्वागत

ऊ का व = वधू +आगमन = वध्वागमन

ऋ का र = पितृ +आदेश = पित्रादेश

D- वृद्धि संधि :- यदि अ अथवा आ के बाद ए अथवा ऐ हो तो दोनों को मिलाकर ऐ और यदि ओ अथवा औ हो तो दोनों को मिलाकर औ हो जाता है ! जैसे -

अ +ए =ऐ एक +एक = एकैक

अ +ऐ =ऐ मत +ऐक्य = मतैक्य

अ +औ=औ परम +औषध = परमौषध

आ +औ =औ महा +औषध = महौषध

आ +ओ =औ महा +ओघ = महौघ

E- अयादि संधि :- यदि ए , ऐ और ओ , औ के पशचात इन्हें छोड़कर कोई अन्य स्वर हो तो इनका परिवर्तन क्रमश: अय , आय , अव , आव में हो जाता है जैसे -

ए का अय ने +अन = नयन

ऐ का आय नै +अक = नायक

ओ का अव पो +अन = पवन

औ का आव पौ +अन = पावन

न का परिवर्तन ण में = श्रो +अन = श्रवण

2- व्यंजन संधि :

व्यंजन के साथ स्वर अथवा व्यंजन के मेल से उस व्यंजन में जो रुपान्तरण होता है , उसे व्यंजन संधि कहते हैं जैसे :-

प्रति +छवि = प्रतिच्छवि

दिक् +अन्त = दिगन्त

दिक् +गज = दिग्गज

अनु +छेद =अनुच्छेद

अच +अन्त = अजन्त

3 - विसर्ग संधि : - विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन का मेल होने पर जो विकार होता है , उसे विसर्ग संधि कहते हैं ! जैसे -

मन: +रथ = मनोरथ

यश: +अभिलाषा = यशोभिलाषा

अध: +गति = अधोगति

नि: +छल = निश्छल

दु: +गम = दुर्गम

Photos from Civil services preparation jeetu tiwari's post 13/03/2019

मराठा साम्राज्य।

Photos 12/03/2019
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