SSC CGL 2016

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26/03/2021

One Time Registration process has been started in UPSSSC.

15/03/2021

*विज्ञापन का प्रकाशन 11 मई,*
*ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रारंभ-18 मई से,*

12/03/2021

रतन टाटा साहब ने 5 कमाल की बातें कहीं हैं -
1. कोई आप पर पत्थर फेंकें तो फेंकने देना, उन पत्थरों से एक सुन्दर इमारत बना देना
2. ज़िन्दगी में Ups and Downs आने दीजिये क्यूंकि ECG में भी Straight Line का मतलब है कि हम मर चुके हैं
3. लोहे को उसकी जंग खाती है वैसे ही इंसान को उसका Mindset बर्बाद करता है
4. जो दूसरों की नकल करते हैं वो थोड़े समय के लिए जीत जाते हैं लेकिन ज़्यादा समय के लिए जीत नहीं पाते
5. तेज़ चलना चाहते हैं तो अकेले चलिए लेकिन अगर दूर तक जाना चाहते हैं तो सबके साथ चलिए :)
Thank you so much everyone. God bless us all :)

14/04/2020

# # # # & Best Wishes to all for 14th Apr2020 is
.
Celebrate 129th Birthday Anniversay of Baba Saheb Dr. BR Ambedkar ji, Architect of Indian Constitution, Symbol of Knowledge with your family at your Home. Safe@Home with Keep Distance.

13/04/2020

आज जलियांवाला बाग हत्याकांड के 101 वर्ष पूरे हो गये। 13 अप्रैल 1919 को लगभग शाम के साढ़े चार बज रहे थे, जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में वैशाखी के मेले में आये हुये हज़ारों लोगों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के गोलियां बरसाने का आदेश दे दिया। जनरल डायर के आदेश पर ब्रिटिश आर्मी ने बिना रुके लगभग 10 मिनट तक गोलियां बरसाईं।
इस घटना में करीब 1,650 राउंड फायरिंग हुई थी। बताया जाता है कि सैनिकों के पास जब गोलियां खत्‍म हो गईं, तभी उनके हाथ रुके।कमेन्ट बॉक्स में उस कुएं का चित्र है जिसमें लोग गोलियों से जान बचाने के लिए कूदे और डूबकर मर गए। कुआँ लाशों से पट गया था।
यह घटना मानव इतिहास के क्रूरतम अपराधों में एक है। 1997 में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि "ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।''

01/03/2019

ानिए_जब_कोई_सैनिक_किसी_दूसरे_देश_की_सीमा_में_पकड़ा_जाता_है
ो_क्या_होता_है,
ुद्ध_मे_बंदियों_के_नियम

ंतरराष्ट्रीय_जिनेवा_संधि_के_तहत युद्धबंदियों को लेकर क्या नियम हैं।
जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता।

उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता।

इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या फिर युद्ध के बाद उन्हें लैटाना होता है। हालांकि पकड़ गए युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने होते हैं।

ंधि_की_मुख्य_बातें

सन 1949 से लागू हुई संधि का मकसद ऐसे सैनिकों की रक्षा करना है जिसे दुश्मन देश की सेना ने पकड़ लिया हो।

इस संधि के मुताबिक पकड़े गए सैनिक के साथ मानवीय बर्ताव किया जाएगा।

जैसे ही किसी देश के सैनिक, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, उसे पकड़ा जाता है, संधि उसी समय लागू हो जाती है।

इस संधि के तहत किसी भी युद्धबंदी को प्रताड़ित करना गैर-कानूनी है।

सैनिक के पकड़ते समय उसकी जाति, उसका रंग, धर्म, जन्म या पैसा और इस तरह की बातों के बारे में नहीं पूछा जाएगा।

संधि में साफ कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी तो कैदी सिर्फ अपना नाम, जन्मतिथि, रैंक और सर्विस नंबर को ही बताएगा।

्ष_1947_से_अब_तक_भारत_के_कितने_पायलटों_को_पाकिस्तान_ने_पकड़ा_कैसा_हुआ_सलूक

ये पहला मौका नहीं है जब युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाया हो. करीब सभी भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय पायलटों को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाया है.

ारत_पाक_युद्ध_1965_एयर_मार्शल (रिटा.) बृजपाल सिंह सिकंद

भारत-पाक युद्ध 1965 के दौरान तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर बृजपाल सिंह सिकंद को पाक सीमा में पकड़ लिया गया. युद्ध के दौरान वो एक जीनाट विमान उड़ा रहे थे. हवा में अपना पूरा कर वो सुरक्षित जमीन पर उतर चुके थे. लेकिन विमान उतारने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने गलती से दुश्मन देश की सीमा के पसरूर में विमान उतार दिया.

जब उन्होंने उड़ान भरनी चाहिए तब तक रनवे पर पाकिस्तानी सेना की जीप पहुंच गई, जिसने उड़ान में बाधा पहुंचाई. उन्हें घेरकर विमान से नीचे उतरने पर मजबूर कर दिया गया.

हालांकि बाद में जेनेवा संधि के तहत उन्हें पाकिस्तान ने रिहा कर दिया. वे एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए.

उन्होंने साल 1950 में एक फाइटर पायलट के पद से इंडियन एयरफोर्स में शुरुआत की थी. बृजपाल सिंह सिकंद के अनुसार, तब उन्हें पाकिस्तानी सेना ने प्रताड़ित किया था.

ारत_पाक_युद्ध_1971_एयर_वाइस_मार्शल (रिटा.) आदित्य विक्रम पेठिया

भोपाल में रह रहे वायुसेना के रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल आदित्य विक्रम पेठिया 1971 में युद्ध के दौरान पाकिस्तान में युद्ध बंदी रह चुके हैं.

रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल आदित्य विक्रम पेठिया भारतीय वायुसेना की उस कमान में शामिल थे, जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर एयर अटैक किया. आदित्य विक्रम पेठिया पाकिस्तान की सीमा में युध्द बंदी बना लिए गए. वो पांच महीने वहां युद्ध बंदी रहे. उन्हें जो यातनाएं दी गयीं, उसे बयां करते हुए आज भी उनकी आंखों में गुस्सा उतर आता है. जिनेवा संधि के ज़रिए पांच महीने बाद उनकी रिहाई हुई.

ारत_पाक_युद्ध_1971_विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल

भारत-पाक युद्ध 1971 के दौरान 3 दिसंबर से 13 दिसंबर तक विंग कमांडर हरसरन सिंह ने वेस्‍टर्न विंग का नेतृत्व किया. वे एक जांबाज सेनानी थे. उन्होंने कई दुश्मन विमानों को धूल चटाई. 13 दिसंबर को हवा में युद्ध के दौरान उन्होंने चार दुश्मन विमानों के छक्के छुड़ा दिए. लेकिन जब चारों दुश्मन जहाज वापस भागने लगे तो उन्होंने अकेले ही अपने मिग 21 विमान से चारों को खदेड़ लिया.

लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान ने जमीन से हमला कर उनके विमान को गिरा दिया. इसमें वे शहीद हो गए. उनके इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया.

ारगिल_युद्ध_1999_लेफ्टिनेंट_नचिकेता

कारगिल ऑपरेशन के दौरान सीमाई इलाके में पहाड़ियों पर बैठे घुसपैठियों को भगाने की कार्रवाई में एक मिग दुर्घटना का शिकार हो गया था. पायलट के विमान को छोड़ने के दौरान पैराशूट अनियंत्रित हो गया, जिसकी वजह से पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्तान के इलाके में उतरना पड़ा.
ये जानकारी होते ही भारत ने रेडक्रॉस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नचिकेता को छुड़ाने की कोशिशें तेज कर दी थीं.

विंग कमांडर रिटायर्ड एके सिंह से बात की तो उन्होंने बताया, “27 मई 1999 के दिन, नचिकेता अपने मिग-27 विमान से दुश्मनों के ठिकानों पर हमला कर रहे थे. उन्होंने जैसे ही एक ठिकाने को निशाना बनाकर उसपर 30 एमएम की एक मिसाइल चलाई, उनके मिग-27 विमान का इंजन बंद हो गया. इंजन से चिंगारी और धुआं निकलने लगा.

एक कुशल पायलट की तरह उन्होंने हवा में ही विमान के इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश की, लेकिन इंजन शुरू नहीं हुआ. विमान से निकलकर वह पैराशूट द्वारा जिस जगह पर उतरे वह बर्फ से ढका दुश्मन का पहाड़ी इलाका था.

नचिकेता को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया. उन्हें रावलपिंडी की कालकोठरी में बंद कर दिया गया. भारतीय कोशिश, रेडक्रॉस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दखल के चलते पाकिस्तान को झुकना. उसे नचिकेता को रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा

नचिकेता को आठ दिन बाद 3 जून 1999 को पाकिस्तान ने रिहा कर दिया था. नचिकेता 26 मई से पाकिस्तानी हिरासत में थे.
हालांकि नचिकेता भारत लौटने के तीन साल बाद तक इलाज चलता रहा. वे दोबारा साल 2003 में फिर से उड़ान भरने के काबिल हुए. इसकी वजह उन्होंने खुद ही भारत लौटने के बाद कई मीडिया संस्‍थानों को दिए अपने इंटरव्यू में बताई है.

ारगिल_युद्ध_1999_स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा

कारगिल युद्ध में जिस दिन लेफ्टिनेंट के नचिकेता पाकिस्तानी चपेट में आए थे, ठीक उसी दिन अजय आहूजा भी एक मिग-21 में हवा में मोर्चा संभाले हुए थे. युद्ध के दौरान एक पाकिस्तानी मिसाइल उनके विमान से आ टकराई. उनका विमान गिर गया. लेकिन इसमें उनकी जान नहीं गई.

एक रिपोर्ट के अनुसार जब स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा पाकिस्तान में गिरे तो वे जिंदा थे. लेकिन वहां गिरने के बाद उन्हें गोली मार दी गई. भारत के एयर वाइस-मार्शल एसके मलिक के अनुसार, "आहूजा की हत्या की गई थी. उनके सिर और सीने में गोली लगने के पुख्ता सबूत थे." भारत ने तब पाकिस्तान पर जेनेवा संधि के उल्लंघन का आरोप भी लगाया था.

अजय आहूजा राजस्‍थान के कोटा के रहने वाले थे. साल 1985 में उनका चयन फाइटर पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना में हुआ था.

21/02/2019

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

Photos from SSC CGL 2016's post 25/01/2019

सम्मलित अवर अधीनस्थ सेवा (सामान्य चयन) प्रतियोगितात्मक परीक्षा 2019...
कुल पोस्ट-- 672

25/01/2019

#ज्ञानपीठ_पुरस्कार से सम्मानित लेखिका #कृष्णा_सोबती का #निधन

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित सुप्रसिद्ध लेखिका कृष्णा सोबती का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। लंबी बीमारी के बाद उनका निधन आज सुबह साढ़े आठ बजे एक निजी अस्पताल में हो गया। कृष्णा सोबती का जन्म पाकिस्तान के गुजरात में हुआ था और वह विभाजन के बाद भारत आ गयीं थीं। अपने शुरुआती दौर में छोटी कहानियां लिखकर उन्होंने लेखिका के तौर पर अपनी पहचान बनायी।

1980 में उन्हें उनके उपन्यास 'ज़िंदगीनामा' के लिए #साहित्य_अकादमी_पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 1996 में #साहित्य_अकादमी_फैलोशिप से नवाज़ा गया। साल 2017 में उन्हें साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ' #ज्ञानपीठ_पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाओं में मित्रो मरजानी, डार से बिछुड़ी, ऐ लड़की आदि शामिल हैं।

Photos from SSC CGL 2016's post 29/12/2018

(mathematics)
बहुत ही कम समय में और आसानी से समझने के लिए नोट्स

19/11/2018
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