05/10/2024
इक तो रंगत तेरी सांवरी, सांवरी
उस पे ज़ुल्फ़ें घटा बन के छाई हुईं
तेरी रहमत पे दिल राहे-अंजान पर
डाल कर चल दिए हम तेरे राहगी'
हम को आवाज़ दो खो गए तुम कहां
हम यहीं हैं यहां ज़र्फ़ मिलता नहीं
सख़्त बेचैन हैं, दिल पशेमान है
आ सको जाओ आ जां निकलती नहीं
इक तो रंगत तेरी सांवरी, सांवरी....
'अंस'
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