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31/07/2026

🏆 संस्कृत भाषा दक्षता (शब्द शिल्पी) ऐप!
यह संस्कृत भाषा को खेल-खेल में सीखने के लिए बनाया गया एक बेहतरीन डिजिटल ऐप है। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित होने वाली संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता की शत-प्रतिशत सटीक तैयारी की जा सकती है!
हालांकि यह बीटा टेस्ट के लिए जारी किया गया है। एक माह के बाद इसका नया संस्करण जारी कर दिया जाएगा।

इसका निर्माण जगदानन्द झा तथा जयेश कृष्ण ने किया है।

📱 ऐप की मुख्य विशेषताएँ:

* कठिनाई स्तर: बच्चों के लिए 'सरल से कठिन की ओर' क्रमिक श्रेणियाँ।
* साइज़: 96 MB (समग्र क्विज़ और अध्ययन सामग्री के साथ पूर्ण पैक)।
* विधि: क्विज़ खेलते हुए खेल-खेल में भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान का संवर्द्धन।

🔽 ऐप की APK फ़ाइल डाउनलोड करने का लिंक नीचे दिया गया है। वहाँ से इसे अपने मोबाइल में इंस्टॉल करें और तैयारी शुरू करें!

आज के इस अति-आधुनिक और तकनीकी युग में जब हम भाषाओं के डिजिटल रूपान्तरण की बात करते हैं, तो अक्सर देववाणी संस्कृत को .....

03/06/2026

संस्कृत प्रतिभा खोज की प्रतियोगिता

18.08.2016 लखनऊ विश्वविद्यालय
17/07/2024

18.08.2016 लखनऊ विश्वविद्यालय

Let's celebrate *संस्कृतदिनम् in Sanskrit!!*The directions for the video making:1) The video of *your introduction (मम प...
10/07/2024

Let's celebrate *संस्कृतदिनम् in Sanskrit!!*

The directions for the video making:

1) The video of *your introduction (मम परिचयः) should be in Sanskrit* language only and the recited shloka meaning in Marathi, English OR Hindi.

2) The video should *not exceed 2 minutes.*

3) Mail us the written *script at [email protected]*

4) Post the Video/Reel and collaborate with us on *Instagram profile *

04/07/2024

आज मुझे दादाजी की एक बात याद आ रही है। दादा जी (पांडुरंग शास्त्री आठवले) कहा करते थे कि यह जो समय चल रहा है उसमें धर्म और भक्ति की बाढ़ आई हुई है । बाढ़ जब आती है तो क्या स्थिति होती इससे सभी परिचित हैं। हाथरस की घटना इसका उदाहरण है।

16/06/2024

गंगा दशहरा की शुभकामनाएं।
आज के दिन इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए 👇
अथ स्कन्दपुराणोक्त-गङ्गास्तोत्रम्
ब्रह्मोवाच
नमः शिवाये गङ्गाये शिवदायै नमोनमः ।
नमस्ते रुद्ररूपिण्य शाङ्कर्यै ते नमोनमः ॥ १ ॥
नमस्ते विश्वरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोनमः । सर्वदेवस्वरूपिण्यै नमो भेषजमूर्तये ॥ २ ॥
सर्वस्य सर्वव्याधीनां भिषक्श्रेष्ठ्यै नमोस्तु ते ।
स्थाणुजङ्गमसंभूतविषहन्त्र्यै नमोनमः ॥ ३ ॥
भोगोपभोगदायिन्ये भोगवत्यै नमोनमः ।
मन्दाकिन्यै नमस्तेस्तु स्वर्गदायै नमः सदा ॥ ४ ॥
नमस्त्रैलोक्यभूषायै जगद्धात्र्यै नमोनमः । नमस्त्रिशुक्लसंस्थायै तेजोवत्यै नमोनमः ॥ ५ ॥ नन्दायै लिङ्गधारिण्यै नारायण्यै नमोनमः ।
नमस्ते विश्वमुख्यायै रेवत्यै ते नमोनमः ॥ ६ ॥
बृहत्यै ते नमस्तेस्तु लोकधात्र्यै नमोनमः ।
नमस्ते विश्वमित्रायै नन्दिन्यै ते नमोनमः ॥ ७ ॥
पृथ्व्यै शिवामृतायै च सुवृषायै नमोनमः ।
शान्तायै च वरिष्ठायै वरदायै नमोनमः ॥ ८ ॥
उस्रायै सुखदोग्ध्यै च संजीविन्यै नमोनमः ।
ब्रह्मिष्ठायै ब्रह्मदायै दुरितघ्न्यै नमोनमः ॥ ९ ॥
प्रणतातिप्रभञ्जिन्यै जगन्मात्रे नमोस्तु ते ।
सर्वापत्प्रतिपक्षायै मङ्गलायै नमोनमः ॥ १०॥ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यातिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ॥११॥ निर्लेपायै दुर्गहन्त्र्यै दक्षायै ते नमोनमः ।
परात्परतरे तुभ्यं नमस्ते मोक्षदे सदा ॥१२॥
गङ्गे ममाग्रतो भूया गङ्गे मे देवि पृष्ठतः ।
गङ्गे मे पार्श्वयोरेहि त्वयि गङ्गेऽस्तु मे स्थितिः॥
१३॥
आदौ त्वमन्ते मध्ये च सर्व त्वं गां गते शिवे ।
त्वमेव मूलप्रकृतिस्त्वं हि नारायणः परः ॥ १४ ॥
गङ्गे त्वं परमात्मा च शिवस्तुभ्यं नमः शिवे ॥१५॥
य इदं पठति स्तोत्रं भवत्या नित्यं नरोऽपि यः । शृणुयाच्छूद्धया युक्तः कायवाक्चित्तसंभवैः॥ १६॥
दशधा संस्थितैर्दोषैः सर्वैरेव प्रमुच्यते । सर्वान्कामानवाप्नोति प्रेत्य ब्रह्मणि लीयत्वे॥१७॥
ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता ।
तस्यां दशम्यामेतच्च स्तोत्रं गङ्गाजले स्थितः॥ १८॥
यः पठेद्दाकृत्वस्तु दरिद्रो वापि चाक्षमः ।
सोपि तत्फलमाप्नोति गङ्गां संपूज्य यत्नतः॥१९॥
अदत्तानामुपादानं हिसा चैवाविधानतः ।
परदारोपसेवा च कायिकं विविधं स्मृतम् ॥२०॥
पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः । असंबद्धप्रलापश्च वाङ्मयं स्याच्चतुविधम् ॥ं
ँ२१॥ परद्रव्येष्वभिध्यानं मनसाऽनिष्टचिन्तनम् । वितथाभिनिवेशश्च मानसं त्रिविधं स्मृतम् ॥ २२ ॥ एतानि दश पापानि हर त्वं मम जाह्नवि ।
दशपापहरा यस्मात्तस्माद्दशहरा स्मृता ॥२३॥
त्रयस्त्रिंशच्छतं पूर्वान्पितृनथ पितामहान् ।
उद्धरत्येव संसारान्मन्त्रेणानेन पूजिता ॥२४॥
नमो भगवत्यै दशपापहरायै गङ्गायै नारायण्यै रेवत्यै शिवायै दक्षाये अमृतायै विश्वरूपिण्यै नन्दिन्यै ते नमोनमः ।
सितमकरनिषण्णां शुभ्रवर्णा त्रिनेत्रां करधृतकलशोद्य त्सोत्पलामत्यभीष्टाम् । विधिहरिहररूपां सेन्दुकोटोरजुष्टां कलितसितदुकूलां जाह्नवीं तां नमामि ॥२५॥
आदावादिपितामहस्य निगमव्यापारपात्रे जलं पश्चात्पन्नगशायिनो भगवतः पादोदकं पावनम् ।
भूयः शंभुजटाविभूषणमणिजंतोर्महर्षेरियं देवीकल्मषनाशिनी भगवती भागीरथी दृश्यते॥२६॥
गङ्गागङ्गेति यो ब्रूयाद्योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति॥ २७॥

06/06/2024

वट सावित्री की पूजा के लिए जो लोग वटवृक्ष की शाखाओं को काट कर पूजा करते हैं न, इसीलिए उनके दाम्पत्य जीवन का यह हाल है। अरे इतनी भी बुद्धि नहीं है कि आखिर वटवृक्ष की पूजा क्यों करते हैं? यदि इतनी बुद्धि होती तो वटवृक्ष के पास जाकर पूजन करते इस तरह तोड़ कर नहीं।

05/06/2024

मार्निंग वॉक के दौरान कुछ दिनों से एक दादा जी से मुलाकात हुई। उम्र करीब 70 के आस पास की रही होगी। बहुत विनम्र और नियम के पक्के । आज प्रेम और संबंधों पर चर्चा होने लगी उनसे। बात करते करते मैंने उनसे एक प्रश्न पूछा कि क्या प्रेमी होना कोई संबंध है? जिसका कोई नाम न हो बस किसी का प्रेमी/प्रेमिका हो?
तो उन्होंने उत्तर दिया कि - यही तो एकलौता संबंध है। इसकी व्याख्या नहीं कर सकते। यह अनिर्वचनीय है। लेकिन तुम्हें एक बात जरूर कहेंगे कि संसार में प्रेमी होना अत्यंत कठिन है। आजकल की युवा पीढ़ी जिसे प्रेम कह कर फांसी लगा रही है वह तो वासना और पल भर का दंभ है मात्र।
अब पति पत्नी को ही ले लो, पति पत्नी सोचते हैं सात फेरे ले लिया तो सात जन्मों का उनका साथ रहेगा किंतु ऐसा नहीं है, सात जन्मों का साथ होने के लिए भी उस स्तर का निश्छल प्रेम चाहिए। जब तक प्रेम ना हो तब तक यह संभव है ही नहीं ।
जैसे राधा के साथ कृष्ण का प्रेम। ऐसे ही नहीं शिव ने अपनी स्तुति में कृष्ण को योगीराज कहा है।

02/06/2024

ज़िन्दगी का हर पल आखरी समझ कर जीना चाहिए, तब ज़िन्दगी का असली मजा आता है।

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा संचाल्यमान संस्कृत प्रतिभा खोज की जनपद /मंडल प्रतियोगिता हेतु विद्यालयों को जो...
15/05/2024

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा संचाल्यमान संस्कृत प्रतिभा खोज की जनपद /मंडल प्रतियोगिता हेतु विद्यालयों को जोड़ा जा रहा है।

जनपद की प्रतियोगिता हेतु विद्यालय को आयोजन के उपरांत रूपये 10000 तथा मंडल की प्रतियोगिता हेतु 15000 दिये जाते हैं।

उत्तर प्रदेश में स्थित जो विद्यालय अपने यहाँ संस्कृत प्रतियोगिता आयोजित कराने को इच्छुक हो, उनसे नीचे दिए लिंक पर आवेदन करा दें। विद्यालय को इसे अवसर के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि इस शैक्षिक गतिविधि के लिए उसे आर्थिक सहयोग उपलब्ध है।

जितेंद्र कुमार आई०ए०एस० अपर मुख्य सचिव, भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन

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