Sanskritsarjana

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संस्कृत सर्जना ई पत्रिका का पेज

17/07/2024

18.08.2016 लखनऊ विश्वविद्यालय

10/07/2024

Let's celebrate *संस्कृतदिनम् in Sanskrit!!*

The directions for the video making:

1) The video of *your introduction (मम परिचयः) should be in Sanskrit* language only and the recited shloka meaning in Marathi, English OR Hindi.

2) The video should *not exceed 2 minutes.*

3) Mail us the written *script at [email protected]*

4) Post the Video/Reel and collaborate with us on *Instagram profile *

04/07/2024

आज मुझे दादाजी की एक बात याद आ रही है। दादा जी (पांडुरंग शास्त्री आठवले) कहा करते थे कि यह जो समय चल रहा है उसमें धर्म और भक्ति की बाढ़ आई हुई है । बाढ़ जब आती है तो क्या स्थिति होती इससे सभी परिचित हैं। हाथरस की घटना इसका उदाहरण है।

16/06/2024

गंगा दशहरा की शुभकामनाएं।
आज के दिन इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए 👇
अथ स्कन्दपुराणोक्त-गङ्गास्तोत्रम्
ब्रह्मोवाच
नमः शिवाये गङ्गाये शिवदायै नमोनमः ।
नमस्ते रुद्ररूपिण्य शाङ्कर्यै ते नमोनमः ॥ १ ॥
नमस्ते विश्वरूपिण्यै ब्रह्ममूर्त्यै नमोनमः । सर्वदेवस्वरूपिण्यै नमो भेषजमूर्तये ॥ २ ॥
सर्वस्य सर्वव्याधीनां भिषक्श्रेष्ठ्यै नमोस्तु ते ।
स्थाणुजङ्गमसंभूतविषहन्त्र्यै नमोनमः ॥ ३ ॥
भोगोपभोगदायिन्ये भोगवत्यै नमोनमः ।
मन्दाकिन्यै नमस्तेस्तु स्वर्गदायै नमः सदा ॥ ४ ॥
नमस्त्रैलोक्यभूषायै जगद्धात्र्यै नमोनमः । नमस्त्रिशुक्लसंस्थायै तेजोवत्यै नमोनमः ॥ ५ ॥ नन्दायै लिङ्गधारिण्यै नारायण्यै नमोनमः ।
नमस्ते विश्वमुख्यायै रेवत्यै ते नमोनमः ॥ ६ ॥
बृहत्यै ते नमस्तेस्तु लोकधात्र्यै नमोनमः ।
नमस्ते विश्वमित्रायै नन्दिन्यै ते नमोनमः ॥ ७ ॥
पृथ्व्यै शिवामृतायै च सुवृषायै नमोनमः ।
शान्तायै च वरिष्ठायै वरदायै नमोनमः ॥ ८ ॥
उस्रायै सुखदोग्ध्यै च संजीविन्यै नमोनमः ।
ब्रह्मिष्ठायै ब्रह्मदायै दुरितघ्न्यै नमोनमः ॥ ९ ॥
प्रणतातिप्रभञ्जिन्यै जगन्मात्रे नमोस्तु ते ।
सर्वापत्प्रतिपक्षायै मङ्गलायै नमोनमः ॥ १०॥ शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यातिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ॥११॥ निर्लेपायै दुर्गहन्त्र्यै दक्षायै ते नमोनमः ।
परात्परतरे तुभ्यं नमस्ते मोक्षदे सदा ॥१२॥
गङ्गे ममाग्रतो भूया गङ्गे मे देवि पृष्ठतः ।
गङ्गे मे पार्श्वयोरेहि त्वयि गङ्गेऽस्तु मे स्थितिः॥
१३॥
आदौ त्वमन्ते मध्ये च सर्व त्वं गां गते शिवे ।
त्वमेव मूलप्रकृतिस्त्वं हि नारायणः परः ॥ १४ ॥
गङ्गे त्वं परमात्मा च शिवस्तुभ्यं नमः शिवे ॥१५॥
य इदं पठति स्तोत्रं भवत्या नित्यं नरोऽपि यः । शृणुयाच्छूद्धया युक्तः कायवाक्चित्तसंभवैः॥ १६॥
दशधा संस्थितैर्दोषैः सर्वैरेव प्रमुच्यते । सर्वान्कामानवाप्नोति प्रेत्य ब्रह्मणि लीयत्वे॥१७॥
ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता ।
तस्यां दशम्यामेतच्च स्तोत्रं गङ्गाजले स्थितः॥ १८॥
यः पठेद्दाकृत्वस्तु दरिद्रो वापि चाक्षमः ।
सोपि तत्फलमाप्नोति गङ्गां संपूज्य यत्नतः॥१९॥
अदत्तानामुपादानं हिसा चैवाविधानतः ।
परदारोपसेवा च कायिकं विविधं स्मृतम् ॥२०॥
पारुष्यमनृतं चैव पैशुन्यं चापि सर्वशः । असंबद्धप्रलापश्च वाङ्मयं स्याच्चतुविधम् ॥ं
ँ२१॥ परद्रव्येष्वभिध्यानं मनसाऽनिष्टचिन्तनम् । वितथाभिनिवेशश्च मानसं त्रिविधं स्मृतम् ॥ २२ ॥ एतानि दश पापानि हर त्वं मम जाह्नवि ।
दशपापहरा यस्मात्तस्माद्दशहरा स्मृता ॥२३॥
त्रयस्त्रिंशच्छतं पूर्वान्पितृनथ पितामहान् ।
उद्धरत्येव संसारान्मन्त्रेणानेन पूजिता ॥२४॥
नमो भगवत्यै दशपापहरायै गङ्गायै नारायण्यै रेवत्यै शिवायै दक्षाये अमृतायै विश्वरूपिण्यै नन्दिन्यै ते नमोनमः ।
सितमकरनिषण्णां शुभ्रवर्णा त्रिनेत्रां करधृतकलशोद्य त्सोत्पलामत्यभीष्टाम् । विधिहरिहररूपां सेन्दुकोटोरजुष्टां कलितसितदुकूलां जाह्नवीं तां नमामि ॥२५॥
आदावादिपितामहस्य निगमव्यापारपात्रे जलं पश्चात्पन्नगशायिनो भगवतः पादोदकं पावनम् ।
भूयः शंभुजटाविभूषणमणिजंतोर्महर्षेरियं देवीकल्मषनाशिनी भगवती भागीरथी दृश्यते॥२६॥
गङ्गागङ्गेति यो ब्रूयाद्योजनानां शतैरपि ।
मुच्यते सर्वपापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति॥ २७॥

06/06/2024

वट सावित्री की पूजा के लिए जो लोग वटवृक्ष की शाखाओं को काट कर पूजा करते हैं न, इसीलिए उनके दाम्पत्य जीवन का यह हाल है। अरे इतनी भी बुद्धि नहीं है कि आखिर वटवृक्ष की पूजा क्यों करते हैं? यदि इतनी बुद्धि होती तो वटवृक्ष के पास जाकर पूजन करते इस तरह तोड़ कर नहीं।

05/06/2024

मार्निंग वॉक के दौरान कुछ दिनों से एक दादा जी से मुलाकात हुई। उम्र करीब 70 के आस पास की रही होगी। बहुत विनम्र और नियम के पक्के । आज प्रेम और संबंधों पर चर्चा होने लगी उनसे। बात करते करते मैंने उनसे एक प्रश्न पूछा कि क्या प्रेमी होना कोई संबंध है? जिसका कोई नाम न हो बस किसी का प्रेमी/प्रेमिका हो?
तो उन्होंने उत्तर दिया कि - यही तो एकलौता संबंध है। इसकी व्याख्या नहीं कर सकते। यह अनिर्वचनीय है। लेकिन तुम्हें एक बात जरूर कहेंगे कि संसार में प्रेमी होना अत्यंत कठिन है। आजकल की युवा पीढ़ी जिसे प्रेम कह कर फांसी लगा रही है वह तो वासना और पल भर का दंभ है मात्र।
अब पति पत्नी को ही ले लो, पति पत्नी सोचते हैं सात फेरे ले लिया तो सात जन्मों का उनका साथ रहेगा किंतु ऐसा नहीं है, सात जन्मों का साथ होने के लिए भी उस स्तर का निश्छल प्रेम चाहिए। जब तक प्रेम ना हो तब तक यह संभव है ही नहीं ।
जैसे राधा के साथ कृष्ण का प्रेम। ऐसे ही नहीं शिव ने अपनी स्तुति में कृष्ण को योगीराज कहा है।

02/06/2024

ज़िन्दगी का हर पल आखरी समझ कर जीना चाहिए, तब ज़िन्दगी का असली मजा आता है।

upsanskritpratibhakhoj.com 15/05/2024

उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा संचाल्यमान संस्कृत प्रतिभा खोज की जनपद /मंडल प्रतियोगिता हेतु विद्यालयों को जोड़ा जा रहा है।

जनपद की प्रतियोगिता हेतु विद्यालय को आयोजन के उपरांत रूपये 10000 तथा मंडल की प्रतियोगिता हेतु 15000 दिये जाते हैं।

उत्तर प्रदेश में स्थित जो विद्यालय अपने यहाँ संस्कृत प्रतियोगिता आयोजित कराने को इच्छुक हो, उनसे नीचे दिए लिंक पर आवेदन करा दें। विद्यालय को इसे अवसर के रूप में देखना चाहिए, क्योंकि इस शैक्षिक गतिविधि के लिए उसे आर्थिक सहयोग उपलब्ध है।

upsanskritpratibhakhoj.com जितेंद्र कुमार आई०ए०एस० अपर मुख्य सचिव, भाषा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन

03/04/2024

शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतमस्तके ।
शनैः विद्या शनैः वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः ॥

29/03/2024

सबसे प्यारा चीज खोने पर भी आपका आराध्य आपसे जुदा नहीं होता।

21/03/2024

अप्रैल 2024 से संस्कृत में लेखन करने वाले के लिए मैं मददगार बनूंगा।

1.क्या आप संस्कृत में मौलिक लेखन करते हैं?
2. क्या आपने अन्य भाषा में लिखित पुस्तक का संस्कृत में अनुवाद कर सकते हैं?
3. क्या आप किसी लुप्त होती संस्कृत पुस्तक को संरक्षित करना चाहते हैं?
4. क्या आप किसी संस्कृत पुस्तक की सरल संस्कृत में व्याख्या करके उसे बोध गम्य बनाना चाहते हैं?
यदि हाँ तो आपको ही मैं ढूंढ रहा हूँ। आपको रूपये 50 हजार तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए यह पोस्ट लिख रहा हूँ।
आपसे मैं एक फोन कॉल/वाट्सअप की दूरी पर हूँ। आप पोस्ट पढ़ते ही तत्काल मुझसे 7388883306 पर सम्पर्क करें ।

उत्तर-प्रदेश-संस्कृत-संस्थान 12/03/2024

यदि आप उत्तर प्रदेश में निवास करते हैं और उच्च शिक्षण संस्थान में शोध करा रहें तब आपके लिए यह पोस्ट है।
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ की सर्वेक्षण एवं अनुसंधान योजना के अन्तर्गत बीसवीं शताब्दी में उत्तर प्रदेशीय विद्वत् परम्परा विषयक अनुसन्धानात्मक कार्य में मार्गदर्शक का कार्य करने के इच्छुक अनुभवी संस्कृत के विद्वानों से निर्दिष्ट जनपद / जनपदों हेतु निर्धारित प्रारूप पर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित है।

मार्गदर्शक एवं सम्पादक के कार्यों के बीच समन्वय के लिए 01 परियोजना समन्वयक के लिए आवेदन आमंत्रित है।

आवेदन की अंतिम तिथि 16.03.2024 है।

ऑनलाइन आवेदकों के वायोडाटा तथा कार्यानुभव के आधार पर उन्हें एतदर्थ सूचीबद्ध किया जाएगा। सौंपे गए कार्य पूर्ण होने पर एक मार्गदर्शक को सम्बन्धित जनपद/ जनपदों के पूर्ण कार्य हेतु एकमुश्त रूपये 20,000/- (रूपये बीस हजार) तथा 01 गवेषक को एक जनपद में सर्वेक्षण हेतु एकमुश्त रूपये 15,000/- (रूपये पन्द्रह हजार) मात्र अध्येतावृत्ति दिया जाएगा।

आवेदनपत्र का प्रारूप, कार्य की प्रकृति, समयावधि आदि की पूर्ण जानकारी संस्थान की वेबसाइट https://sanskritvidwan.com पर उपलब्ध है। इस लिंक पर जाकर आवेदन करें।

जनपदों के नाम निम्नवत् है -
1 अमरोहा 18 बरेली 35 ललितपुर
2 अमेठी 19 बलिया 36 वाराणसी
3 आजमगढ़ 20 बस्ती 37 शामली
4 उन्नाव 21 बांदा 38 शाहजहाँपुर
5 एटा 22 बाग़पत 39 श्रावस्ती
6 कन्नौज 23 बुलन्दशहर 40 संत रविदास नगर
7 कानपुर नगर 24 मऊ 41 सहारनपुर
8 गाजियाबाद 25 मथुरा 42 सिद्धार्थनगर
9 गाजीपुर 26 महाराजगंज 43 सोनभद्र
10 गौतम बुद्ध नगर 27 महोबा 44 हमीरपुर
11 चंदौली 28 मिर्जापुर 45 हाथरस
12 चित्रकूट 29 मुजफ्फरनगर
13 पीलीभीत 30 मुरादाबाद
14 प्रतापगढ़ 31 मेरठ
15 प्रयागराज 32 रामपुर
16 फर्रूखाबाद 33 रायबरेली
17 बदायूँ 34 लखनऊ

दिनांक 6 मार्च 2024 के समाचार पत्रों में प्रकाशित होने वाला विज्ञापन

उत्तर-प्रदेश-संस्कृत-संस्थान 20 वीं शताब्दी की उत्तरप्रदेशीय विद्वत् परम्परा

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