25/06/2016
#गुड_मॉर्निंग
ये सन् 2010-11 की बात रही होगी। आईआईटी की कोचिंग करने के दौरान मैं अपनी ही तरह के एक लड़के से मिला था,जोशी क्लासेस में! उसकी ईमेल आईडी भी मैंने बनाई थी। लेकिन कोचिंग के दौरान भी मेरी दोस्ती उसके साथ ऐसी नहीं थी जिसे मैं पक्की दोस्ती कहूँ। फिर अचानक से मेरा वही दोस्त मुझे 2011-12 में बीबीडीऐनआईटीएम(जहां मैंने इसी साल इंजिनीरिंग में दाखिला लिया था) में मिला। चुप-चुप सा रहने वाला वो लड़का मुझे देखते ही बहुत बहुत गर्मजोशी और आत्मीयता से मिला।उस दिन उसने मुझसे मेरा मोबईल नंबर भी लिया था। मैं भी बदले हुए कोचिंग वाले मेरे उस दोस्त से मिलकर बहुत खुश हुआ था। लेकिन मुझे नहीं पता था कि उसकी इस आत्मीयता और गर्म जोशी के पीछे का राज क्या था। एक दिन सुबह-सुबह मेरे पास मेरे उस दोस्त का फोन आता है-"हैलो मोहित! मैं अमित(बदला हुआ नाम) बोल रहा हूँ। कहाँ हो तुम ? मैं सोकर उठा था, कुछ समझ पता, कुछ कह पाता, उससे पहले ही उसने कहा- अरे ! तुमको पता नहीं है आज लखनऊ में क्या होने जा रहा है। आज एक ऐसा इवेंट होने जा रहा है, जिसमें अगर तुम आ गए, तो विश्वास मानो, तुम्हारी ज़िन्दगी बदल जाएगी। किस्मत के ताले खुल जाएंगे। जैसे कि मेरी ज़िन्दगी बदलने लगी है। मेरे पास सिर्फ एक पास बचा है। मैं चाहता तो किसी और को भी दे सकता था, लेकिन मुझे लगा पहले मेरे भाई को ये अवसर मिले। अगर नहीं आए तो मौका हाथ से निकल जाएगा, फिर मत कहना मैंने बुलाया नहीं।" मेरे दोस्त ने रविवार को ही जयपुरिया स्कूल पर बुलाया था, ज़िन्दगी बदलने वाला इवेंट वही होना था। वहां इवेंट ebiz.com प्राइवेट लिमिटेड नामक एक नेटवर्क मार्केटिंग की कंपनी का था। वहां सबको बताया जा रहा था कि कैसे कुछ हज़ार रुपए लगाकर, और सिर्फ 2 तक इस बिज़नेस को प्रोमोट करके कोई 32 लाख कमा सकता है और करोड़ो रुपए बना सकता है, वो भी महज 1 से 2 साल में। मुझे ये सब देखने में अच्छा तो बहुत लगा था लेकिन मन में शंका भी थी कि कहीं मेरे पैसे फस गए तो। इवेंट से बाहर निकलते ही मन्याल सर जो मेरे दोस्त के सर थे इस बिज़नेस में, से मेरे दोस्त ने मिलाया। जिन्होने एक मैली सफेद शर्ट पहन रखी थी। वो लगे मुझे समझाने कि पापा को कैसे बताना है। क्या नहीं बताना है ? क्योंकि पूरी फिल्म तो मैंने देखी है अगर मैं घर जाकर समझाता हूँ तो किसी को कुछ समझ नहीं आएगा और मैं पैसे नहीं इंतज़ाम कर पाउँगा। फिर मेरी ज़िन्दगी कैसे बदलेगी ? और भी बहुत कुछ समझाया गया। मेरे दोस्त के बार बार फोन करने पर मैंने घर पर सबका जीना हराम करके पैसे ले लिए थे। अब मुझे लगने लगा था कि मैं करोडपति तो बन ही जाऊंगा वो भी 2 साल में। सब कुछ ठीक चल रहा था, एक दिन मेरी बेसिक ट्रेनिंग की गई जिसमें मुझे सबसे पहले यह बताया गया कि आपके सीनियर ने अगर आम को इमली कहा है तो वह इमली ही होगी। और दूसरा यह कि अगर आपको कभी लगे कि आपका सीनियर गलत है तो पहला रूल देख लें। अक्ल ठिकाने रहेगी और पैसा कमाना जारी रहेगा। मुझे कंपनी को लेकर एंटीनेगटिव पॉइंट्स भी लिखवाए गए। मुझे सिखाया गया चाहे दिन हो या रात मुझे गुड मॉर्निंग ही कहना है जब भी मैं किसी कंपनी मेंबर से बात करूं। साल बीतने को था । मेरी एक हैसियत बन रही थी कंपनी में। मेरी टीम में बहुत तेजी से लोग जुड़ रहे थे। इनकम भी हो रही थी। लेकिन जितना मैंने लगाया मैं उतना कमा पाने में अभी पीछे थे। मेरी टीम एक लेग में तेजी से बढ़ रही थी, एक तरफ सूखा था, जिसके चलत 4:5 या 3:6 नहीं बन पा रहा था। दरअसल यह कंपनी की रणनीति थी। जिसमें फसकर बहुत से अभिमन्यु मारे जाते। कुछ लोगों का लक साथ देता और अच्छी कमाई भी कर रहे थे। फिर एक साल कम्प्लीट होने को था। मुझे रीनेवल करवाना था अपने कंपनी की आईडी को जिसमें कुछ हजार रुपए मैंने फिर दिए थे। तभी मुझे अचानक से एक बात और पता चली कि मेरी आईडी में जुड़े हुए लोगों तभी बने रहेंगे मेरी आईडी में जब मेरे तुरंत नीचे की 2 आईडी भी पैसे देकर जीवित की जाए। ये सब मुझे पहले से नहीं बताया गया था। फिर मुझे कंपनी के कन्वेंशन में कई बार जाना हुआ। वहां मेरी तरह ही बहुत से युवावों की भीड़ थी। जो जल्दी से जल्दी अमीर बन जाना चाहते थे। वहां जो चीज़ मुझे खराब लगी वह ये थी कि कंपनी के मालिक के लड़के को वो लोग जो कंपनी में बुलंदी पर थे, दण्डवत प्रणाम कर रहे थे उम्र में बड़े होते हुए भी। मालिक के लड़के ने पस्तूनि दाढ़ी रखी थी जो की कंपनी के कायदे-कानून में नहीं आती थी। वहां खाने-पीने की चीज़ें बहुत ज्यादा महंगी बिक रही थीं। कंपनी से कमाने की बात तो दूर बल्कि हर महीने मुझे घर से मिलने वाला मेरा पॉकेट खर्च वेन्यू मीटिंग्स के पासेस और कन्वेंशन आने जाने, किसी के घटे हुए पैसे में 500-1000 लगाने में खर्च होने लगा था। यह सब देखकर मैं धीरे-धीरे कंपनी से कब अलग होता गया, मुझे पता ही नहीं चला। अलग होने के कुछ दिन बाद मुझे मेरा वो दोस्त मिला, उसने कहा कि तुम सिविल सर्विस के तैयारी करके क्या कर लोगे। मैं तो करोड़पति होने जा रहा हूँ। मैं ऐसा हो गया था कि जब भी कोई दोस्त गुड मॉर्निंग कहता मैं हिल जाता अंदर से , शब्द नहीं निकलते थे। खाने पीने की सुध न रहती थी। मुझे 'गुड मॉर्निंग' शब्द से चिढ़ हो रही थी। खैर मुझे इस कंपनी में बहुत से अच्छे लोगों का साथ भी मिला,बहुत सारी अच्छी यादें भी थी। बस कुछ सपने टूट गए थे। बहुत से लोग रूठ गए थे।मैं अकेला नहीं था,मेरे जैसे बहुत से थे। मेरे बहुत से दोस्त मुझसे नाराज हो चुके थे, उन्हें लगता था मैंने उन्हें फसाया था। मेरा वो दोस्त जो मुझे इस नेटवर्क मार्केटिंग की कम्पनी में लेकर आया था हमेशा मुझे याद करता था, लेकिन कंपनी से अलग होने के बाद मुझे भूल चुका था। इधर उसने बिना मुझे बताए शादी भी कर ली। सच या झूठ उसने नेटवर्क मार्केटिंग से हुई कमाई के दम पर एक फ्लैट खरीद लिया है। जिनके लिए ये बिज़नेस जीने मरने का प्रश्न था, उन मन्याल भाईयों में से एक कंपनी को छोड़ चुके हैं। मेरे जैसे बहुत से लोग यहां बर्बाद होकर जीना सीख गए हैं। अब वो बेवकूफ नहीं बन सकते।
this information provided by mohit pandey bbdnitm cse dept. 2011-2015 batch
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