12/07/2023
" #सेल्फी विद #झोला " ........ एक पर्यावरणीय सरोकार
👉 नीचे लिखी हुई पोस्ट को अवश्य पढ़ें और दिए गए नंबर 9918317707 पर , झोले के साथ अपनी खींची हुई सेल्फी या फोटो हमको भेजें ताकि सोशल मीडिया पर अपलोड कर के अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जुड़ने के लिये प्रेरित कर सकें ।
🌳🌳जय वृक्ष देव , जय धरती मां 🌳🌳 प्रिय प्रकृति प्रेमी साथियों , *एक बार फिर से " बाल चौपाल सेवा संस्थान " ने धरती मां को सुंदर - स्वच्छ बनाने की दिशा में पर्यावरण संरक्षण मुहिम " पॉलिथीन मुक्त अपना गांव - अपना शहर " को सार्थक रूप देने के लिये के लिए जन जागरूकता अभियान पूरे जोरों के साथ 01 जुलाई से आरम्भ किया है l* इस मुहिम के तहत आम जनमानस के साथ - साथ स्कूल में पढ़ने वाले छात्र - छात्राओं , बच्चों , महिलाओं और दुकानदारों को विशेष रूप से जोड़ा जा रहा है l पिछले 11 दिनों में हम लोगों के द्वारा किये गये संयुक्त प्रयास और " 🏷️ *सेल्फी विद झोला अभियान* " से हम उम्मीद करते हैं की पॉलिथीन के इस्तेमाल में काफी कमी आई है , यही नहीं *बाल चौपाल परिवार के ग्रीन कॉम्बेट्स बच्चों - महिलाओं द्वारा बनाए गए झोले* का लोगों ने अपने दैनिक जीवन में उपयोग करना भी शुरू कर दिया है l व्यापारी संगठनों के सहयोग से बाजार में बहुत से दुकानदार साथियों ने पॉलीथीन की थैलियों में सामान देना बंद कर दिया है । हम उम्मीद करते हैं कि बहुत जल्द हम लोग देश प्रदेश में पॉलिथीन मुक्त गांव - शहर देखेंगे l
मेरे प्यारे भाइयों - बहनों " सेल्फी विद झोला " पर्यावरणीय सरोकार से आप सभी लोग जुड़ें और अपना असीमित सहयोग 👇प्रदान करें । इस मुहिम को सहयोग देकर आप ईश्वरीय कृपा के पात्र बन सकते हैं । 👉 *सहयोग के रूप में आपको पॉलीथीन की थैलियों ( पॉलीबैग्स ) की जगह अब कपड़े के बने का थैला उपयोग में लाना है* । आइये हम सब मिलकर कदम बढ़ायें............🌳🌳
*हमने तहे दिल से ठाना है l*
*पॉलिथीन मुक्त गांव - शहर बनाना हैl*
🌳🌳🌳🌳🌳
*सोच बदलो समाज बदलेगा l*
*देश पॉलिथीन मुक्त होकर रहेगा l*
🙏🙏 🇮🇳जय हिन्द - जय भारत 🇮🇳 🍁🍁🍁🍁 👉पर्यावरण प्रहरी :- अनूप मिश्रा अपूर्व (सीनियर सब इंस्पेक्टर उत्तर प्रदेश पुलिस )संयोजक - सेल्फी विद झोला आभियान 👉📱:- 7355907832, 9918317707...... 🌳🌳🌳🌳निवेदक :- आशीष अवस्थी " मुन्ना अवस्थी "। सह संयोजक - सेल्फी विद झोला अभियान
18/02/2023
ये हैं हमारे प्यारे आनंद जो छोटी सी उम्र में अपनी हमउम्र बच्चों को शिक्षा देने के लिए " बाल चौपाल " लगाते थे , बच्चे आनंद को छोटे मास्टर जी कहते थे ....अब ये छोटा मास्टर सात समंदर पार अमेरिका में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहा है ।
07/07/2020
#बाल चौपाल यंग चेंज मेकर ...में आज मिलिये रियल लाइफ के रियल हीरो से
#ड्रोन साइंटिस्ट: कर्नाटक का वो युवा वैज्ञानिक जो अब तक कबाड़ से बना चुका है 600 कमाल के ड्रोन
देश के #युवा वैज्ञानिक #प्रताप एन .एम. के जज्बे को #बाल चौपाल का सलाम
ज़िंदगी हमारा जमकर इम्तिहान लेती है और हमें इसका सामना डटकर करना होता है क्योंकि अगर हम ऐसा कर लेते हैं, तो सफ़लता एक दिन हमारे कदम ज़रूर चूमती है ।कर्नाटक के छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले #प्रताप एन.एम ने भी अपनी ज़िंदगी में कुछ कड़े इम्तिहानों का मज़बूती से सामना किया है. आज उन्हें पूरी दुनिया ड्रोन साइंटिस्ट के नाम से जानती हैं. इनकी कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं ।
प्रताप जब 15 साल के थे तब उन्हें चील को देख कर ड्रोन बनाने का आइडिया आया था. पर तब उनके पास न तो पैसे थे और न ही स्मार्टफ़ोन. अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एक साइबर कैफ़े में साफ़-सफ़ाई का काम कर लिया.यहां उन्हें इस काम के बदले 45 मिनट तक इंटरनेट सर्फ़िंग करने दिया जाता था ।
यहीं से उन्होंने ड्रोन बनाना सीखा. दूसरी समस्या ये थी कि अब उनके पास ड्रोन बनाने के लिए सामान ख़रीदने के पैसे नहीं थे. तब प्रताप ने कबाड़ जैसे टूटे हुए ड्रोन, मोटर, कैपेसिटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीज़ों से ड्रोन तैयार करना शुरू कर दिया. कई बार असफ़ल रहने के बाद वो एक ड्रोन बनाने में कामयाब रहे जो उड़ भी सकता था और तस्वीरें भी खींच सकता था ।
इसके बाद प्रताप ने मैसूर के जेएसएस कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स एंड कॉमर्स से बीएससी की. यहां भी ड्रोन पर रिसर्च जारी रही और इन्होंने कम लागत में ऐसे ड्रोन तैयार किए जो पर्यावरण के अनुकूल भी थे ।
यह सरकारी बस स्टैंड पर रहने सोने लगे, कपड़े वहीं के पब्लिक टॉयलेट में धोते रहे ... इंटरनेट की मदद से कम्प्यूटर लैंग्वेजेस जैसे C, C++, java, Python सब सीखा ...
इलेक्ट्रोनिक्स कचरे से ड्रोन बनाना सीख लिया।
भारत कुमार लिखते हैं कि 80 बार असफल होने के बाद आखिरकार वह ड्रोन बनाने में सफल रहे ... उस ड्रोन को लेकर वह IIT Delhi में हो रहे एक प्रतिस्पर्धा में चले गये... और वहाँ जाकर "द्वितीय पुरस्कार" प्राप्त किया... वहाँ उन्हें किसी ने जापान में होने वाले ड्रोन कॉम्पटिशन में भाग लेने को कहा...
उसके लिये उन्हें अपने प्रोजेक्ट को चेन्नई के एक प्रोफसेर से अप्रूव करवाना आवश्यक था... दिल्ली से वह पहली बार चेन्नई चले गये... काफी मुश्किल से अप्रूवल मिल गया... जापान जाने के लिये 60000 रूपयों की जरूरत थी... मैसूर के ही एक भले इंसान ने उनकी मदद की ...प्रताप ने अपनी माता जी का मंगलसूत्र बेच दिया और जापान चले गये।...
जब जापान पहूंचे तो सिर्फ 1400 रूपये बचे थे।... इसलिये जिस स्थान तक उन्हें जाना था, उसके लिये बुलेट ट्रेन ना लेकर सादी ट्रेन पकड़ी।... 16 स्टॉप पर ट्रेन बदली... उसके बाद 8 किलोमीटर तक पैदल चलकर हॉल तक पहुंचे।...
प्रतिस्पर्धा स्थल पर उनकी ही तरह 127 देशों से लोग भाग लेने आये हुये थे।... बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी के बच्चे भाग ले रहे थे।... नतीजे घोषित हुये।... ग्रेड अनुसार नतीजे बताये जा रहे थे।... प्रताप का नाम किसी ग्रेड में नहीं आया।... वह निराश हो गये।
अंत में टॉप टेन की घोषणा होने लगी। प्रताप वहाँ से जाने की तैयारी कर रहे थे।
10 वें नंबर के विजेता की घोषणा हुई ...
9 वें नंबर की हुई ...
8 वें नंबर की हुई ...
7..6..5..4..3..2 की हुई, और अंत में पहला पुरस्कार मिला हमारे भारत के प्रताप को।
अमेरिकी झंडा जो सदैव वहाँ ऊपर रहता था, वह थोड़ा नीचे आया, और सबसे ऊपर तिरंगा लहराने लगा 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
प्रताप की आँखें आँसू से भर गयीं, वह रोने लगे।उन्हें 10 हजार डॉलर (सात लाख से ज्यादा) का पुरस्कार मिला।
तुरंत बाद फ्रांस ने इन्हें जॉब ऑफर की ।
उल्लेखनीय बात ये है कि साल 2017 में प्रताप ने जापान में होने जा रहे International Robotic Exhibition में हिस्सा लेने की ठानी लेकिन तब उनके पास वहां जाने के लिए फ़्लाइट का टिकट ख़रीदने तक के पैसे नहीं थे ऐसे में तब उनकी मां ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के अपने गहने बेचकर उनकी टिकट का इंतज़ाम किया था ।
इस Exhibition में प्रताप को गोल्ड और सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया था. इसके बाद साल 2018 में जर्मनी में हुए Drone Expo में प्रताप ने Einstein Innovation Medal जीत कर अपना और देश का नाम रौशन किया था । तब से लेकर अब तक वो कई देशों में जाकर ड्रोन से संबधिंत सेमिनार में भाषण दे चुके हैं. वो आईआईटी बॉम्बे और आईआईएससी में लेक्चर भी दे चुके हैं. फ़िलहाल प्रताप डीआरडीओ के एक प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं।
प्रताप ने अब तक 600 से भी अधिक ड्रोन तैयार किए हैं. इसके अलावा उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया है, जिनमें सीमा सुरक्षा के लिए टेलीग्राफ़ी, यातायात प्रबंधन के लिए ड्रोन तैयार करना, रेसक्यू ऑपरेशन के लिए यूएवी बनाना शामिल है। 2018 में जब कर्नाटक में भीषण बाढ़ ने तबाही मचाई थी, तब इनके बनाए ड्रोन ने आपदा राहत कार्य में काफ़ी मदद की थी ड्रोन की हेल्प से बचाव कर्मियों ने पीड़ितों को दवाई और भोजन पहुंचाया था ।
सच में प्रताप इनोवेशन के क्षेत्र में लगे युवाओं और विशेष रूप से संसाधनों की कमी को कामयाबी की राह का रोड़ा समझने वाले बच्चों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं।
बाल चौपाल की ओर से माँ भारती के होनहार सपूत वैज्ञानिक प्रताप को बहुत -बहुत बधाई और अनंत शुभकामनाएं ,साथ ही हम प्रताप के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना करते हैं ।
जय हिंद ...!!