20/03/2026
वाणिज्य विभाग द्वारा सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट एवं एंटरप्राइज फैसिलिटेशन सेंटर, लखनऊ के सहयोग से “उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन विश्वविद्यालय के अटल हॉल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम डेवलपमेंट कमिश्नर (एमएसएमई) के सौजन्य से आयोजित किया गया।
20/03/2026
Hon’ble VC Sir with the members of Admission Committee
20/03/2026
Team of Campus Talk in action
16/02/2026
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ के उर्दू विभाग में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार समकालीन उर्दू साहित्य में प्रगतिशील विचारधाराओं पर फिर से विचार पर आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो सौबान सईद ने सेमिनार में आए हुए विद्वानों का स्वागत करते हुए परिचय कराया। उन्होंने बताया कि हमारे समाज में आज उर्दू अदब एक महत्वपूर्ण किरदार अदा कर रहा है।, जनाब आमिर मेंहदी (चीफ एडिटर सहाफत , यू.के) ने अपने पेपर पढ़ते हुए तरक्की पसंद सोच को समाज के विकास के लिए बहुत जरूरी बताया। उन्होंने बताया कि जब तक दुनियां में जब तक ज़ुल्म और ज्यादती एवं नाइंसाफी रहेगी तब तक तरक्की पसंद आंदोलन की आवश्यकता रहेगी, तरक्की पसंद सोच की एक और कोशिश समाज में महिलाओं की आज़ादी है कि हमारे समाज में हमारे समाज में महिलाओं को बराबर दर्जा मिले बिना समाज का विकास नामुमकिन है। सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा से डॉ सैयद सिब्ते हसन नकवी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे । प्रो सैयद शफ़ीक़ अहमद अशरफी ने तरक्की पसंद तहरीक को समझने की आवश्यकता पर और काम करने पर जरूरत है इसी कड़ी में प्रो अशरफी ने एक महत्वपूर्ण पुस्तक विभाग की लाइब्रेरी को भेंट किया । प्रो ख़्वाजा इकरामुद्दीन, जे.एन.यू, बताया कि यह भाषा अब पूरी दुनियां में बोली जाती है, उन्होंने बताया कि वह पूरे तौर पर तरक्की पसंद तहरीक को सही नहीं मानते। उन्होंने उर्दू भाषा के इतिहास पर बात करते हुए कहा कि खुसरो के समय से अब तक उर्दू अदब पूरी तरह से बदल गया। खुसरो की उर्दू अदब का पहला शायर बताया और खुसरो की पहली शायरी में महबूब के बदलते हुए स्वरूप पर विशेष बात की और जब यही बात दक्कन की तरफ गई तो महबूब का नज़रीया बदल गया। यानि तखलीक और तनक़ीद पर गौर करने पर जोर दिया उन्होंने बताया कि दकन में महबूब को सूरज से पहचाना गया। संस्कृत के शब्द शब्दार्थम् को कोट करते हुए बताया की जब यूरोप में डार्क युग चल रहा था तब हमारी संस्कृत भाषा रस की बात कर रही थी। मीर की बात करते हुए कहा कि मीर का दौर उर्दू भाषा का स्वर्णिम काल था। और फिर उर्दू अदब के दो सेंटर दिल्ली और लखनऊ वजूद में आए। मशीन के दौर में अदब को आगे कैसे बढ़ाया जाए इस पर ध्यान देने की जरूरत है । प्रो अब्बास रज़ा नैय्यर अपने संबोधन में मंच पर बैठे हुए सभी विद्वानों को धन्यवाद करते हुए तरक्की पसंद विचार पर करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी ने डिक्शन को बदल दिया है। उन्होंने कार्ल मार्क्स की दास कैपिटल को कोट करते हुए बताया कि कार्ल मार्क्स के तरक्की पसंद सोच को वो पूरी तरह से नहीं मानते क्योंकि कार्ल मार्क्स ने एक समान तनख्वाह की बात तो करते है लेकिन इसके लिए वो कोई उदाहरण नहीं दे सके। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अजय तनेजा ने सेमिनार में आए हुए सभी विद्वानों का स्वागत किया और बताया कि उर्दू भाषा जो कि तरक्की पसंद सोच को आगे बढ़ाने हेतु वर्ष 1920 से कार्य कर रही है और आज भी इस सोच को बड़ी जिम्मेदारी से कर रही है। उन्होंने बताया कि आजादी की लड़ाई में उर्दू भाषा में विशेष भूमिका निभाई और इस भाषा को अंग्रेजों ने विद्रोह की भाषा कहा। प्रो अजय तनेजा ने बताया आज भी भाषा के माध्यम से ही समाज के विकास के लिए आंदोलन किए जा रहे हैं उदाहरण के लिए कॉलोनियालिज़्म, फेमिनिज्म, और मॉडर्निज़म आदि। उन्होंने उर्दू विभाग एवं सभी लोगों को कार्यक्रम की मुबारकबाद दी। कार्यक्रम में प्रो मसूद आलम अरबी विभाग, प्रो रेशमा परवीन लखनऊ, डॉ इशरत नाहीद मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्विद्यालय आदि मौजूद रहे। प्रो फ़खरे आलम अध्यक्ष उर्दू विभाग, ने कार्यक्रम का संचालन किया। डॉ मो अकमल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रतिभागी, डॉ मुर्तज़ा अली अतहर, कार्यक्रम के आयोजक सचिव डॉ वसी आज़म अंसारी, डॉ मुनव्वर हुसैन, डॉ ज़फरुन नकी, डॉ सिद्धार्थ सुदीप, प्रो तनवीर खदीजा अंग्रेजी विभाग, डॉ नलिनी मिश्रा शिक्षा विभाग, डॉ अब्दुल हाफिज अरबी विभाग, डॉ आरिफ अब्बास, फारसी विभाग, एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थी ।
26/01/2026
Republic Day Celebration 2026
07/01/2026
भाषा विश्वविद्यालय और हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट के बीच छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के मानसिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से इस समझौते पर ज़ोनल कोऑर्डिनेटर शालिनी मेहरोत्रा ने हस्ताक्षर किए।
इस MoU के तहत विश्वविद्यालय परिसर में हार्टफुलनेस रिलैक्सेशन, मेडिटेशन, जीवन कौशल, नेतृत्व विकास एवं मूल्य आधारित शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही शिक्षकों एवं प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र भी संचालित किए जाएंगे।
समझौते के अंतर्गत विश्वविद्यालय में हार्टफुलनेस कॉर्नर एवं मेडिटेशन प्रैक्टिस रूम की स्थापना की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, एकाग्रता वृद्धि एवं सकारात्मक सोच की दिशा में लाभ मिलेगा और शैक्षणिक वातावरण और अधिक अनुशासित व संतुलित बनेगा।
कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि आज के समय में उच्च शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों का मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से छात्र आत्मनियंत्रण, आत्मविश्वास और जीवन मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे, जो उन्हें बेहतर नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा।
इस अवसर पर MoU नोडल अधिकारी डॉ नीरज शुक्ला, रजिस्ट्रार डॉ महेश कुमार एवं डीन एकेडेमिक्स प्रो. सौबान सईद भी उपस्थित रहे।
यह MoU तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया ज