02/10/2024
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा शिक्षक समागम एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्विद्यालय एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान (अवध प्रान्त) के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के सफल क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्विद्यालय के अटल सभागार में किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय डॉ. दिनेश शर्मा जी, पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश एवं राज्य सभा सदस्य, मौजूद थे। डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति -2020 के आने के बाद शिक्षा व्यवस्था में बदलाव हो रहा है। ऐसे में जो शिक्षक विद्यार्थी बनकर सीखता रहेगा वही विद्यार्थियों के बीच सम्मान पाएगा।
डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि हम गर्व करते हैं कि भारत को सोने की चिड़िया और विश्व गुरु कहा जाता था। हमें विचार करना चाहिए कि ऐसा क्यों था। वास्तव में भारतीय शिक्षा और अध्यापन व्यवस्था के चलते ऐसा था। शिक्षा की वजह से ही विश्व में भारत की संप्रभुता थी। समय के साथ तमाम आक्रांता हमारे देश में आए। उन्होंने यहां की ज्ञान परंपरा को नष्ट किया। नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में लगाई गई आग कई दिनों तक धधकती रही। गुलामी के बाद देश की शिक्षण व्यवस्था अंग्रेजी प्रणाली पर ही चलती रही। कहने को वर्ष 1986 में शिक्षा नीति बनी पर उसमें भारतीकरण के बजाय अंग्रेजी का बोलबाला था। नई शिक्षा नीति-2020 में इसमें सुधार किया गया है। भारतीय भाषाओं के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को इससे जोड़ा गया है। इसके साथ ही सबसे बड़ी विशेषता शिक्षकों के प्रशिक्षण की है। शिक्षकों का समय-समय पर प्रशिक्षण करते रहना चाहिए। इससे वे समय के साथ चल सकेंगे। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा का कोई धर्म या संप्रदाय नहीं होता है। शिक्षा का सिर्फ राष्ट्रधर्म होता है। इससे पहले प्रो. जय शंकर प्रसाद पाण्डेय, क्षेत्र संयोजक, विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान, पूर्वी उत्तर-प्रदेश, ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. एन. के तनेजा, राष्ट्रीय महामंत्री, विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान, ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 आने से पहले हम शिक्षण की भारतीय संस्कृति को भूल चुके थे। भारत में शिक्षा का व्यापक अर्थ है। पश्चिमी शिक्षा प्रणाली में जहां अर्थ को महत्व दिया गया है तो वहीं भारतीय शिक्षा प्रणाली में इसका अर्थ व्यापक है। यहां धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरुषार्थों को शिक्षा में समाहित किया गया है। इसी अवधारणा पर नई शिक्षा नीति की नींव डाली गई है। नई शिक्षा नीति को इस तरह से तैयार किया गया है कि इससे विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव का भाव हो। प्राचीन काल में देश में तक्षशिला, नालंदा और उज्जियनी जैसे विश्वविद्यालय थे। इन विश्वविद्यालयों में पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया है। इन विश्वविद्यालयों में पूरे विश्व से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। नई शिक्षा नीति आने के बाद उसी ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना है। इसके लिए हमें विश्वस्तरीय शोध करने होंगे। उन्होंने बताया कि शिक्षा को व्यवसाय से जोड़ने के लिए नई शिक्षा नीति में वोकेशलन कोर्स जोड़े गए हैं। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि प्रो. सच्चिदानन्द मिश्र, सदस्य सचिव, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, ने कहा कि प्राचीन काल से ऋषि ऋण की परंपरा रही है। इसका मतलब है कि शिक्षा के बाद गुरुदक्षिणा के रूप में आश्रम को कुछ वापस देना। शिक्षकों को भी इसका पालन करना चाहिए। शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब उनकी बारी समाज को कुछ देने की है। शोध और नवाचार के माध्यम से शिक्षक ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए भाषा की नहीं ज्ञान और अभ्यास की जरूरत है। शोध और नवाचार की कोई भाषा नहीं होती है। भारतीय ज्ञान प्रणाली को लेकर आगे चलेंगे तो ऐसा किया जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रो. एन. बी. सिंह, माननीय कुलपति, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षक के रूप में हमें अपनी भूमिका निभानी है। आज भले ही हम आर्थिक मामलों में पांचवी अर्थव्यवस्था बन गए हों, लेकिन शिक्षा के मामले में विश्व गुरु बनने के लिए हमें अभी और प्रयास करने होंगे। उद्धाटन समारोह में आभार ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नीरज शुक्ल ने दिया। सत्र का संचालन डॉ. नलिनी मिश्रा, आयोजन सचिव ने किया।
उद्धाटन समारोह के बाद तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय सिंह, कुलपति, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने की। इस दौरान समानांतर सत्र का आयोजन किया गया जिसमें शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय गुप्ता जी ने की तथा सत्र का समन्वयन डॉ जितेन्द्र पाल एवं डॉ ऐश्वर्या सिंह ने किया।
प्रथम तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखें जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में शिक्षकों का दायित्व प्रो. जे. एन. बलिया, जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू,
उच्च शिक्षा संस्थानों में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेशन एवं शिक्षकों की भूमिका- प्रो. राजशरण शाही, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर वि.वि, लखनऊ
शिक्षण पद्धतियों में नवाचार: पारंपरिक से आधुनिक प्रो. सुरेन्द्र शर्मा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला
प्रौद्योगिकी के एकीकरण, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने में शिक्षकों की भागीदारी प्रो. मधुसुदन जे. वी., हैदराबाद विश्वविद्यालय, तेलंगाना
शिक्षा में समग्र विकास, कौशल विकास और बहुविषयक दृष्टिकोण- प्रो. ऐ. पी. तिवारी, पूर्व आचार्य, डॉ. शकुंतला मिश्र रा. पु. विश्वविध्यालय, लखनऊ ने अपना विद्वतापूर्ण उद्बोधन दिया।
दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय सिंह, निदेशक, गिरी इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवेलपमेंट स्टडीज, लखनऊ ने की। इस सत्र की समन्वयक - प्रो. सुनीता कुमार, उपाध्यक्ष-अवध प्रान्त, विद्या भारतीउच्च शिक्षा संस्थान रही।
सत्र में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई-
समावेशी शिक्षा की दिशा में शिक्षकों का योगदान - प्रो. रजनी रंजन सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय,
शिक्षक प्रशिक्षण, अनुसन्धान, नवाचार और निरंतर व्यावसायिक विकास-प्रो. मनोज अग्रवाल, लखनऊ विश्वविद्यालय
भविष्य की दिशाः उच्च शिक्षा में सुधार और शिक्षकों की भूमिका-प्रो. मनीष वर्मा, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर वि.वि, लखनऊ
हितधारकों के मुद्दों की समझ एवं नीति के क्रियान्वयन में चुनौतियां और समाधान- प्रो. शिशिर कुमार, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर वि.वि, लखनऊ
इस दौरान द्वितीय समानांतर तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ सुभाष मिश्र, शिक्षा विभाग,बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा की गई जिसके समन्वयन का दायित्व डॉ ऐश्वर्या सिंह एवं डॉ जितेंद्र पाल, कार्यकारिणी सदस्य अवध प्रांत ने निर्वाह किया।
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जे पी पांडेय उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के साथ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एन. बी. सिंह, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्र संयोजक प्रो. जयशंकर पांडेय, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अवध प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ सुभाष मिश्रा, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अवध प्रांत के सचिव डॉ. मंजुल त्रिवेदी एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अवध प्रांत के कोषाध्यक्ष डॉ सशक्त सिंह एवं संगोष्ठी की आयोजन सचिव डॉ नलिनी मिश्रा आदि इस दौरान मंच पर उपस्थित रहे।समापन सत्र में अवध प्रांत विद्या भारती के कोषाध्यक्ष डॉ सशक्त सिंह ने स्वागत परिचय दिया। शिक्षक समागम संगोष्ठी सार प्रस्तुतीकरण प्रो. सुनीता कुमार, उपाध्यक्ष अवध प्रान्त, विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान ने दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन- प्रो. जे.पी. पाण्डेय, माननीय कुलपति, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविध्यालय, लखनऊ ने दिया। आभार ज्ञापन डॉ. नलिनी मिश्रा और सत्र संचालन डॉ. नीरज शुक्ल ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी गणों के साथ विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत के पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य डॉ नेहा जैन, डॉ ऐश्वर्या सिंह, डॉ. संजय शुक्ला, डॉ. जितेंद्र कुमार पाल, डॉ योगेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।