Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh

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विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान - उत्तर प्रदेश

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 06/05/2026

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत के प्रतिनिधि मंडल ने उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल जी से भेंट की। इस दौरान राज्यपाल महोदया को विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में लिखी गई 21 पुस्तकें भेंट की गई तथा उच्च शिक्षा संबंधी सांगठनिक विषयों पर महोदया का मार्गदर्शन प्राप्त किया गया। इसके साथ ही प्रो जय शंकर प्रसाद पांडेय जी के संपादन तथा डॉ सुभाष मिश्र एवं डॉ मंजुल त्रिवेदी के सह संपादन में लिखित पुस्तक भी महोदया को भेंट की गई। माननीय राज्यपाल महोदया द्वारा प्रांत सचिव डॉ मंजुल त्रिवेदी जी की नवीनतम पुस्तक “महान शिक्षाविद” का विमोचन भी किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन संबंधी विभिन्न पहलुओं, भारतीय भाषाओं में शिक्षा के प्रोत्साहन तथा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा छह फोकस विषयों पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाने आदि के संदर्भ में विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्र संयोजक प्रो. जय शंकर पांडेय जी के नेतृत्व में अवध प्रांत के अध्यक्ष डॉ सुभाष मिश्र जी, सचिव डॉ मंजुल त्रिवेदी जी, कोषाध्यक्ष डॉ सशक्त सिंह जी, उपाध्यक्ष प्रो सुनीता कुमार जी एवं सह-सचिव डॉ ऐश्वर्या सिंह जी सम्मिलित हुई।

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 23/03/2026

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रान्त की नई कार्यकारिणी का गठन।

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत की नई कार्यकारिणी का गठन आर्यकुल ग्रुप आफ कॉलेजेस बिजनौर, सरोजिनी नगर, लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर आयोजित प्रांत प्रशिक्षण वर्ग एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख माननीय स्वान्त रंजन जी, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री माननीय के एन रघुनंदन जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह प्रचार प्रमुख माननीय मनोज कांत जी तथा विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री माननीय हेमचंद्र जी सम्मिलित हुए। इस अवसर पर आर्यकुल ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के प्रबंध निदेशक डॉ सशक्त सिंह द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। इस वर्ग के उद्घाटन सत्र में विद्या भारती शिक्षण संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रघुनंदन जी ने विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के विजन, मिशन एवं कार्य प्रणाली पर चर्चा करते हुए बताया कि विद्या भारती उच्च शिक्षा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन एवं शिक्षा के भारतीयकरण हेतु प्रयासरत है। मुख्य अतिथि माननीय स्वान्त रंजन जी ने पंच परिवर्तन विषय पर अपने व्यापक विचार रखें। उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संयोजक प्रो जयशंकर पांडे द्वारा किया गया। इस सत्र का संचालन प्रान्त सचिव डॉ मञ्जुल त्रिवेदी के द्वारा किया गया।
द्वितीय सत्र में डॉ. सुभाष मिश्रा जी ने उच्च शिक्षा की पाठ्यचर्या में भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुशीलन विषय पर अपने विचार रखें। माननीय मनोज कांत जी ने कार्यकर्ता, कार्य पद्धति एवं कार्यप्रणाली विषय पर अपने विस्तृत विचार रखें। इस सत्र का संचालन डॉ ऐश्वर्या सिंह ने किया। भोजनावकाश के उपरांत तृतीय सत्र में मुक्त चिंतन पर केंद्रित रहा जहां सभी प्रतिभागियों ने उच्च शिक्षा के महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। इस सत्र का संचालन नारी शिक्षा निकेतन महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर सुनीता कुमार ने किया।
प्रशिक्षण वर्ग के समापन सत्र के अवसर पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संयोजक प्रो. जयशंकर पांडे जी के द्वारा अवध प्रांत की कार्यकारिणी की घोषणा की गई। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. सुभाष मिश्र जी को अवध प्रांत का अध्यक्ष घोषित किया गया तथा बीएसएनवी पीजी कॉलेज के डॉ. मंजुल त्रिवेदी को प्रांत सचिव का तथा आर्य कुल ग्रुप ऑफ़ कॉलेजेस के प्रबंध निदेशक डॉ सशक्त सिंह को प्रांत के कोषाध्यक्ष का दायित्व प्रदान किया गया। प्रान्त उपाध्यक्ष के रूप में प्रोफेसर (डॉ) सुनीता कुमार, डॉ शीर्षेन्दु शील त्रिवेदी, प्रोफेसर (डॉ) अभिषेक तिवारी, डॉ सुजीत चतुर्वेदी एवं डॉ रुचिता सुजय चौधरी के नाम की घोषणा की गई। सह-सचिव के रूप में डॉ जितेंद्र कुमार पाल, डॉ ऐश्वर्या सिंह तथा डॉ नेहा जैन के नाम की घोषणा की गयी। कार्यकारिणी सदस्य के रूप में प्रो. संजय गुप्ता, प्रो. श्रवण कुमार, प्रो पुनीत मिश्रा , डॉ आदित्य मोहंती, डॉ मुकुल चतुर्वेदी, डॉ हेमेंद्र कुमार , डॉ विजय वर्मा, डॉ मयंक त्रिवेदी, डॉ विजयप्रकाश , डॉ जे पी वर्मा तथा डॉ हिमांशु मिश्रा के नाम की घोषणा की गई।
Jai Shanker Pandey Subhash Misra Aishwarya Singh Sengar Sashakt Singh Aryakul Manjul Trivedi Jai Prakash Verma Ruchita Chowdhary Drsunitakumar Prasad

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 05/08/2025

मीडिया कवरेज, राष्ट्रीय संगोष्ठी (04/08/2025)

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 04/08/2025

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पाँच वर्ष पूर्ण होने पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं नवयुग कालेज के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन ।

नवयुग कन्या महाविद्यालय राजेन्द्र नगर लखनऊ केंद्रीय शिक्षाशास्त्र विभाग एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत तथा शारदा प्रसाद तिवारी मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफलतापूर्वक पांच वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित की गई । "राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 क्रियान्वयन एवं चुनौतियां "विषय पर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का प्रारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय एवं समागत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ । इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रोफेसर मनुका खन्ना कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर जयशंकर पांडे समाजशास्त्र विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय, मुख्य वक्ता डॉ सुभाष मिश्रा शिक्षाशास्त्र विभाग बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ , विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर चंदना डे शिक्षाशास्त्र विभाग ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय लखनऊ, उपस्थित रहीं। एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी शिक्षाशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा श्रीमती ऐश्वर्या सिंह के संयोजकतत्व में संपन्न हुई। माननीय कुलपति जी का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय द्वारा अंगवस्त्रम् ,स्मृति चिन्ह् एवं पौध देकर किया गया तथा अन्य समागत अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रवक्ताओं के द्वारा स्मृति चिन्ह् अंगवस्त्रम,पौध देकर किया गया।
सम्माननीय कुलपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति की पांच साल में उपलब्धियां भी मिली किंतु चुनौतियों भी थीं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय बना। राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा प्रणाली में सुधार हुआ बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा की शुरुआत और उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय कारण शामिल हुआ है । इसके अलावा 2020 का लक्ष्य 2025 तक सभी के लिए बुनियादी साक्षरता तथा विद्यार्थीयों का समग्र विकास, संख्यात्मकता प्राप्त करना है।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर जयशंकर पांडे ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य है कि छात्र-छात्राएं विज्ञानमय कोश, मनोमय कोश प्राणमय कोश से होते हुए विद्यार्थी आनंद मय कोश में प्रवेश करें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति मौखिक या लिखित परीक्षा तक सीमित न रहे बल्कि उसको आचरण में भी उतारना होगा। मुख्य वक्ता डॉ सुभाष मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अब नई शिक्षा नीति कहना अनुचित है अब यह नीति अपने राष्ट्रीय स्वरूप में विगत पाँच वर्षों से शैक्षिक प्रक्रियाओं की मार्गदर्शक है।शोध- बोध- प्रबोध, ज्ञान और विज्ञान आदि पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने ज्ञान और विज्ञान के संदर्भ में कहा कि ज्ञान शास्त्रीय ज्ञान है और विज्ञान विशिष्ट ज्ञान है हमारे शास्त्रीय ज्ञान में 18 विद्याओं और 64 कलाओं का वर्णन है। शास्त्र और विज्ञान विरोधी नहीं हैं दर्शन भी विज्ञान का विरोधी नहीं हैं बल्कि एक दूसरे का पूरक है चिंतन शाला और प्रयोग शाला दोनों का समन्वय , ज्ञानार्जन और उत्पादन राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समाहित है। कैरीकुलम, मल्टी डिसिप्लिनरी,तथा अधिन्यास आदि पर अपने विचार व्यक्त किये। विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर चन्दना डे ने अपने व्याख्यान में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करना है जिसमें कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं कौशल विकास पहल के साथ गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना है। राष्ट्रीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020का परिणाम पूर्ण रूप से सकारात्मक है क्योंकि यह सभी स्तरों पर शिक्षा तक गुणवत्ता, समानता और सामर्थ्य पहुंच प्रदान करने पर केंद्रित है। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षाशास्त्र विभाग की सहायक आचार्य श्रीमती नीलम के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत के सचिव डॉ मंजुल त्रिवेदी (बी एस एन वी पी जी कॉलेज) महाविद्यालय की विभिन्न संकायों की सम्मानित प्रवक्ताएं एवं शोधच्छात्र-छात्राएं तथा महाविद्यालय की सभी संकायों की छात्राएं और कर्मचारी गण उपस्थित रहें।h

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 02/08/2025

विद्या भारती उच्च शिक्षा द्वारा नवयुग में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की 164वीं जन्म जयंती कार्यक्रम का आयोजन

नवयुग कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय के संरक्षण में शिक्षाशास्त्र विभाग एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 1 अगस्त 2025 को महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद और समाजसेवी आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे की जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर व्याख्यान एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्राओं को आचार्य रे के जीवन, उनके वैज्ञानिक योगदान एवं उनके राष्ट्र निर्माण में किए गए कार्यों से अवगत कराना था। प्रतियोगिता में महाविद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के निर्णायक सदस्य में संस्कृत विभाग की डॉ. वंदना द्विवेदी एवं रसायनशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह उपस्थित रहीं।
प्रतियोगिता का निर्णय इस प्रकार है-
प्रथम स्थान- मुस्कान मिश्रा, बी
ए. तृतीय सेमेस्टर।
द्वितीय स्थान- अनुष्का द्विवेदी, बी.एस.सी. तृतीय सेमेस्टर एवं महिमा सिंह बी.एस.सी. पंचम सेमेस्टर।
तृतीय स्थान- सना कुरैशी, बी.
ए. तृतीय सेमेस्टर।
सांत्वना- आकृति यादव, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर को दिया गया।
इस अवसर पर रसायनशास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता सिंह ने आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे के जीवन वृत्त एवं उनके समस्त शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक कार्यों पर वृहद् प्रकाश डाला तथा छात्राओं को उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने हेतु अभिप्रेरित किया। उन्होंने बताया कि आचार्य रे भारत के पहले रसायनज्ञों में से एक थे, जिन्होंने ‘बेंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स’ की स्थापना की — जो न केवल भारत की पहली रासायनिक कंपनी थी, बल्कि स्वदेशी उद्योगों की प्रेरणा का भी एक उज्ज्वल उदाहरण बनी। डॉ सुनीता सिंह ने बताया कि उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “A History of Hindu Chemistry” भारत के प्राचीन वैज्ञानिक गौरव को विश्वपटल पर लाने का कार्य करती है। वे अपने ज्ञान को कभी भी सिर्फ पुस्तकों तक सीमित नहीं रखते थे; उन्होंने उसे समाज के कल्याण हेतु समर्पित कर दिया। संस्कृत विभाग की डॉ. वंदना द्विवेदी ने भाषण प्रतियोगिता का निर्णय छात्राओं के समक्ष प्रस्तुत किया तथा आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने छात्राओं को बताया कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे का जीवन केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं था। वे एक समाज सुधारक भी थे। उन्होंने जाति-पाति, छुआछूत और सामाजिक रूढ़ियों के विरुद्ध दृढ़ता से आवाज़ उठाई। विद्यार्थियों के लिए वे एक आदर्श गुरु थे — सरल जीवन, उच्च विचार और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक। शिक्षाशास्त्र की विभागाध्यक्ष ऐश्वर्या सिंह ने छात्राओं को बताया कि आज जब हम विज्ञान, तकनीक और शिक्षा में उन्नति की बात करते हैं, तब हमें यह याद रखना चाहिए कि इस नींव को रखने वाले महान व्यक्तित्वों में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रे का स्थान सर्वोपरि है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि एक सच्चा विद्वान वही है जो अपने ज्ञान का उपयोग जनहित और राष्ट्रहित में करे।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन शिक्षाशास्त्र की विभागाध्यक्ष तथा सदस्य, प्रांत कार्यकारिणी विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत एवं शिक्षाशास्त्र विभाग की नीलम यादव के द्वारा किया गया। इस अवसर पर हिंदी विभाग की डा. मेघना यादव रसायनशास्त्र विभाग की डॉ. ममता वर्मा एवं महाविद्यालय की सभी संकायों की छात्राएं उपस्थित थी।

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 02/08/2025

प्रफुल्ल चंद्र रॉय के जन्मदिन पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान ने आर्यकुल कालेज में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया

आर्यकुल ग्रुप ऑफ कालेज के फार्मेसी,मैनेजमेंट,एजुकेशन और विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान के संयुक्त प्रयास से लखनऊ बिजनौर स्थित कैम्पस में प्रफुल्ल चंद्र रॉय के जन्मदिन 2 अगस्त राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में लविवि के रसायन विभाग के प्रो.विनय सिंह के साथ विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान के पूर्वी उ.प्र.के क्षेत्रीय संयोजक प्रो.जय शंकर पांडेय,आर्यकुल कालेज के प्रबंध निदेशक और विद्या भारती के कोषाध्यक्ष डॉ.सशक्त सिंह,विद्या भारती के उपाध्यक्ष प्रो.सुभाष मिश्रा,विद्या भारती के सचिव डॉ.मंजुल त्रिवेदी, विद्या भारती के सदस्य एवं कार्यालय प्रभारी जितेन्द्र पाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सेमिनार में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के कोषाध्यक्ष डॉ.सशक्त सिंह ने मंच पर बैठे विद्या भारती के सम्मानित पदाधिकारियों का परिचय कराया और प्रफुल्ल चंद्र रॉय के बारे में बताते हुए कहा कि 2 अगस्त का दिन रसायन विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा विशेष दिन रहेगा। उन्होंने कहा कि विज्ञान और फार्मेसी के क्षेत्र में पढ़ाई कर रहे छात्र—छात्राओं को विलुप्त हो चुकी रसायन विधाओं को शोध करके समाज के सामने लाना चाहिए। जिससे भारत सहित अन्य देश विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ सके। वहीं दूसरे वक्ता के रूप में बोलते हुए विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संयोजक और लविवि के समाज शास्त्र के प्रो.जय शंकर पांडेय ने कहा कि भारतीय रसायन के क्षेत्र में प्रफुल्ल चंद्र रॉय का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है जिन्होंने अपनी योग्यता के दम पर भारत में रसायन को मजबूत किया। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए लविवि के रसायन विभाग के प्रो.विनय सिंह ने अपने संबोधन छात्र—छात्रओं को बताया कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र रॉय भारतीय रसायन विज्ञान के जनक के रूप में विख्यात वैज्ञानिक और शिक्षक थे और पहले "आधुनिक" भारतीय रासायनिक शोधकर्ताओं में से एक थे। उन्होंने 1896 में स्थिर यौगिक मर्क्युरस नाइट्राइट की खोज की और 1901 में भारत की पहली दवा कंपनी बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स लिमिटेड की स्थापना की। वह एक बहुत ही भावुक और समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता थे, उन्होंने जाति व्यवस्था का समर्थन नहीं किया। कार्यक्रम में आर्यकुल की मुख्य कार्यकारी अधिकरी श्रीमति रूचि सिंह,रजिस्ट्रार सुदेश तिवारी, डॉ.अंकिता अग्रवाल, डॉ.आदित्य सिंह, प्रो.बी.के.सिंह, डॉ.स्नेहा सिंह, आस्था तिवारी, दीपिका कुमारी, स्वर्णिमा श्रीवास्तव, डॉ.राहुल शर्मा, आशीष तिवारी, रूकसार बानो, शदब, स्वेता मिश्रा, वर्तिका सिंह, शकिब ​अंसारी, आरती कुमारी, महेश शर्मा, रजत ​मिश्रा, मंजरी सहित फार्मेसी, मैनेजमेंट, एजुकेशन के छात्र—छात्राओं के साथ अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 22/02/2025

#अखिल_भारतीय_संस्थागत_नेतृत्व_समागम_2025
01 एवं 02 मार्च 2025
दून विश्वविद्यालय, देहरादून, उत्तराखंड।

21/12/2024

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Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 16/11/2024

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत एवं शिक्षाशास्त्र विभाग नवयुग कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में जनजातीय गौरव दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन।

नवयुग कन्या महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, अवध प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में "जनजातीय गौरव दिवस" के उपलक्ष्य में महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय की अध्यक्षता में भाषण प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का आयोजन महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र की विभागाध्यक्ष एवं सदस्य, प्रांत कार्यकारिणी विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, अवध प्रांत श्रीमती ऐश्वर्या सिंह के द्वारा किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल के सदस्यों में हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मंजुला यादव,, समाजशास्त्र विभागाध्यक्षा डॉ विनीता सिंह, संस्कृत विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर वंदना द्विवेदी शामिल रहीं। प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार रहा-
प्रथम प्रतियोगिता भाषण प्रतियोगिता के रुप में आयोजित की गयी जिसमें प्रथम पुरस्कार- मुस्कान, बीए प्रथम सेमेस्टर,द्वितीय पुरस्कार- अंजलि जायसवाल एवं अमीषा द्विवेदी, बीए तृतीय सेमेस्टर तथा तृतीय पुरस्कार- आस्था त्रिपाठी, बीए प्रथम सेमेस्टर को प्राप्त हुआ।
सांत्वना पुरस्कार- शांभवी गुप्ता, बीए प्रथम सेमेस्टर को मिला।
इसके साथ ही पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार- महिमा सिंह, बीएससी तृतीय सेमेस्टर तथा द्वितीय पुरस्कार- सिमरन, बीए पंचम सेमेस्टर,तथा तृतीय पुरस्कार- प्रियंका यादव, B.Ed प्रथम सेमेस्टर को, एवं तृतीय पुरस्कार- भूमि कुमारी बीए पंचम सेमेस्टर को मिला। साथ में स्लोगन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार
दीक्षा वर्मा, बी.एड. प्रथम सेमेस्टर को द्वितीय पुरस्कार- रिचा यादव, बीएससी पंचम सेमेस्टर को
तृतीय पुरस्कार- रिया घई, बीए प्रथम सेमेस्टर को तथा सांत्वना पुरस्कार- सिमरन, बी ए पंचम सेमेस्टर को प्राप्त हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने शोषण मुक्त समाज की संकल्पना तथा सामुदायिक हितों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया। स्वतंत्रता संग्राम में उनके संघर्षों को हमेशा इतिहास के पन्नों में याद रखा जाएगा । सांस्कृतिक विविधता एवं सांस्कृतिक संरक्षण में जनजातियों का योगदान सराहनीय रहा है। इसके पश्चात मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. वंदना द्विवेदी ने बिरसा मुंडा जी के स्वतंत्रता-संग्राम में सराहनीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जनजाति समुदाय के लोगों को अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया। उनके जीवन पर्यंत संघर्ष की गाथा हमें जीवन में सतत् प्रयत्नशील होकर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
कार्यक्रम का संयोजन तथा संचालन श्रीमती ऐश्वर्या सिंह के द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की सभी संकायों की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया तथा साथ में अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज की स्नातकोत्तर की छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया, जो वर्तमान में ऐश्वर्या सिंह के निर्देशन में इंटर्नशिप कर रही है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 16/11/2024

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत एवं समाजशास्त्र विभाग बीएसएनवी पीजी कॉलेज लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन।

अतीत का पुनर्बोध न केवल हमें हमारे गौरवशाली इतिहास एवं महापुरुषों से परिचित कराता है बल्कि यह भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त करता है। यह विचार बीएसएनवी पीजी कॉलेज में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत एवं समाजशास्त्र विभाग बीएसएनवी पीजी कॉलेज लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री टी एन मिश्र ने दिए। बीएसएनवी पीजी कॉलेज (केकेवी) में शनिवार को जनजातीय गौरव दिवस का आयोजन महाविद्यालय के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के प्रांत सचिव डॉ. मंजुल त्रिवेदी ने जनजातीय गौरव दिवस की पृष्ठभूमि को बताते हुए भगवान बिरसा मुंडा के योगदान पर प्रकाश डाला। डॉ त्रिवेदी ने बताया कि जनजातीय संस्कृति सनातन संस्कृति का ही आदि स्वरूप है। इस दौरान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सम्मिलित हुए विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्र संयोजक प्रो जयशंकर पांडे जी ने बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह अंग्रेजी राज में उन्होंने अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए भी तत्कालीन समाज मे चेतना जागृत करने का कार्य किया था। इस दौरान उन्होंने राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज के योगदान का भी उल्लेख किया। महाविद्यालय के विज्ञान संकाय के डीन प्रो. संजीव शुक्ला जी ने भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हुए कहा कि यह प्रशंसनीय है कि हमने विगत कुछ वर्षों में अपने अतीत के उन महापुरुषों के योगदान को याद करना प्रारंभ किया है जिनका अप्रतिम योगदान देश के लिए रहा है, उन्होंने इस आयोजन के लिए समाजशास्त्र विभाग एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रान्त को बधाई दी। समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर वंदना ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए जनजातीय गौरव दिवस के महत्व से सभी को परिचित कराया। विशिष्ट वक्ता के रूप में सम्मिलित हुई नारी शिक्षा निकेतन स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्रोफेसर सुनीता कुमार ने बिरसा मुंडा जी के व्यक्तित्व पर अपने विचार रखते हुए बताया कि आज भारत सरकार अनेक योजनाओं के माध्यम से जनजातीय समाज को मुख्य धारा में लाने का कार्य कर रही है। इस संदर्भ में उन्होंने विभिन्न आंकड़ों का भी उल्लेख किया। विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार रखते हुए प्रोफेसर विजय कुमार ने बिरसा मुंडा जी के जीवन वृत पर विशेष प्रकाश डाला और आज के इस कार्यक्रम की सार्थकता का विवेचन किया। कार्यक्रम के अंत में समाजशास्त्र विभाग के डॉ एम एल मौर्य के द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्यगण प्रोफेसर अनीता ओझा, प्रोफेसर एन के अवस्थी, प्रोफेसर गोविंद कृष्ण मिश्र सहित महाविद्यालय के अनेक विभागों के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Photos from Vidya Bharti Uchch Shiksha Sansthan- Uttar Pradesh's post 02/10/2024

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा शिक्षक समागम एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्विद्यालय एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान (अवध प्रान्त) के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के सफल क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्विद्यालय के अटल सभागार में किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय डॉ. दिनेश शर्मा जी, पूर्व उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश एवं राज्य सभा सदस्य, मौजूद थे। डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति -2020 के आने के बाद शिक्षा व्यवस्था में बदलाव हो रहा है। ऐसे में जो शिक्षक विद्यार्थी बनकर सीखता रहेगा वही विद्यार्थियों के बीच सम्मान पाएगा।
डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि हम गर्व करते हैं कि भारत को सोने की चिड़िया और विश्व गुरु कहा जाता था। हमें विचार करना चाहिए कि ऐसा क्यों था। वास्तव में भारतीय शिक्षा और अध्यापन व्यवस्था के चलते ऐसा था। शिक्षा की वजह से ही विश्व में भारत की संप्रभुता थी। समय के साथ तमाम आक्रांता हमारे देश में आए। उन्होंने यहां की ज्ञान परंपरा को नष्ट किया। नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में लगाई गई आग कई दिनों तक धधकती रही। गुलामी के बाद देश की शिक्षण व्यवस्था अंग्रेजी प्रणाली पर ही चलती रही। कहने को वर्ष 1986 में शिक्षा नीति बनी पर उसमें भारतीकरण के बजाय अंग्रेजी का बोलबाला था। नई शिक्षा नीति-2020 में इसमें सुधार किया गया है। भारतीय भाषाओं के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को इससे जोड़ा गया है। इसके साथ ही सबसे बड़ी विशेषता शिक्षकों के प्रशिक्षण की है। शिक्षकों का समय-समय पर प्रशिक्षण करते रहना चाहिए। इससे वे समय के साथ चल सकेंगे। डॉ. शर्मा ने कहा कि शिक्षा का कोई धर्म या संप्रदाय नहीं होता है। शिक्षा का सिर्फ राष्ट्रधर्म होता है। इससे पहले प्रो. जय शंकर प्रसाद पाण्डेय, क्षेत्र संयोजक, विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान, पूर्वी उत्तर-प्रदेश, ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। विषय प्रवर्तन करते हुए प्रो. एन. के तनेजा, राष्ट्रीय महामंत्री, विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान, ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 आने से पहले हम शिक्षण की भारतीय संस्कृति को भूल चुके थे। भारत में शिक्षा का व्यापक अर्थ है। पश्चिमी शिक्षा प्रणाली में जहां अर्थ को महत्व दिया गया है तो वहीं भारतीय शिक्षा प्रणाली में इसका अर्थ व्यापक है। यहां धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे पुरुषार्थों को शिक्षा में समाहित किया गया है। इसी अवधारणा पर नई शिक्षा नीति की नींव डाली गई है। नई शिक्षा नीति को इस तरह से तैयार किया गया है कि इससे विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव का भाव हो। प्राचीन काल में देश में तक्षशिला, नालंदा और उज्जियनी जैसे विश्वविद्यालय थे। इन विश्वविद्यालयों में पूरे विश्व का मार्गदर्शन किया है। इन विश्वविद्यालयों में पूरे विश्व से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। नई शिक्षा नीति आने के बाद उसी ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना है। इसके लिए हमें विश्वस्तरीय शोध करने होंगे। उन्होंने बताया कि शिक्षा को व्यवसाय से जोड़ने के लिए नई शिक्षा नीति में वोकेशलन कोर्स जोड़े गए हैं। संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि प्रो. सच्चिदानन्द मिश्र, सदस्य सचिव, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, ने कहा कि प्राचीन काल से ऋषि ऋण की परंपरा रही है। इसका मतलब है कि शिक्षा के बाद गुरुदक्षिणा के रूप में आश्रम को कुछ वापस देना। शिक्षकों को भी इसका पालन करना चाहिए। शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब उनकी बारी समाज को कुछ देने की है। शोध और नवाचार के माध्यम से शिक्षक ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए भाषा की नहीं ज्ञान और अभ्यास की जरूरत है। शोध और नवाचार की कोई भाषा नहीं होती है। भारतीय ज्ञान प्रणाली को लेकर आगे चलेंगे तो ऐसा किया जा सकता है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रो. एन. बी. सिंह, माननीय कुलपति, ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षक के रूप में हमें अपनी भूमिका निभानी है। आज भले ही हम आर्थिक मामलों में पांचवी अर्थव्यवस्था बन गए हों, लेकिन शिक्षा के मामले में विश्व गुरु बनने के लिए हमें अभी और प्रयास करने होंगे। उद्धाटन समारोह में आभार ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नीरज शुक्ल ने दिया। सत्र का संचालन डॉ. नलिनी मिश्रा, आयोजन सचिव ने किया।
उद्धाटन समारोह के बाद तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय सिंह, कुलपति, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने की। इस दौरान समानांतर सत्र का आयोजन किया गया जिसमें शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय गुप्ता जी ने की तथा सत्र का समन्वयन डॉ जितेन्द्र पाल एवं डॉ ऐश्वर्या सिंह ने किया।
प्रथम तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखें जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में शिक्षकों का दायित्व प्रो. जे. एन. बलिया, जम्मू केन्द्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू,
उच्च शिक्षा संस्थानों में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेशन एवं शिक्षकों की भूमिका- प्रो. राजशरण शाही, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर वि.वि, लखनऊ
शिक्षण पद्धतियों में नवाचार: पारंपरिक से आधुनिक प्रो. सुरेन्द्र शर्मा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला
प्रौद्योगिकी के एकीकरण, शोध और नवाचार को प्रोत्साहित करने में शिक्षकों की भागीदारी प्रो. मधुसुदन जे. वी., हैदराबाद विश्वविद्यालय, तेलंगाना
शिक्षा में समग्र विकास, कौशल विकास और बहुविषयक दृष्टिकोण- प्रो. ऐ. पी. तिवारी, पूर्व आचार्य, डॉ. शकुंतला मिश्र रा. पु. विश्वविध्यालय, लखनऊ ने अपना विद्वतापूर्ण उद्बोधन दिया।
दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. संजय सिंह, निदेशक, गिरी इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवेलपमेंट स्टडीज, लखनऊ ने की। इस सत्र की समन्वयक - प्रो. सुनीता कुमार, उपाध्यक्ष-अवध प्रान्त, विद्या भारतीउच्च शिक्षा संस्थान रही।
सत्र में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई-
समावेशी शिक्षा की दिशा में शिक्षकों का योगदान - प्रो. रजनी रंजन सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय,
शिक्षक प्रशिक्षण, अनुसन्धान, नवाचार और निरंतर व्यावसायिक विकास-प्रो. मनोज अग्रवाल, लखनऊ विश्वविद्यालय
भविष्य की दिशाः उच्च शिक्षा में सुधार और शिक्षकों की भूमिका-प्रो. मनीष वर्मा, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर वि.वि, लखनऊ
हितधारकों के मुद्दों की समझ एवं नीति के क्रियान्वयन में चुनौतियां और समाधान- प्रो. शिशिर कुमार, बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर वि.वि, लखनऊ
इस दौरान द्वितीय समानांतर तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ सुभाष मिश्र, शिक्षा विभाग,बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ द्वारा की गई जिसके समन्वयन का दायित्व डॉ ऐश्वर्या सिंह एवं डॉ जितेंद्र पाल, कार्यकारिणी सदस्य अवध प्रांत ने निर्वाह किया।
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जे पी पांडेय उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के साथ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एन. बी. सिंह, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्र संयोजक प्रो. जयशंकर पांडेय, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अवध प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ सुभाष मिश्रा, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अवध प्रांत के सचिव डॉ. मंजुल त्रिवेदी एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अवध प्रांत के कोषाध्यक्ष डॉ सशक्त सिंह एवं संगोष्ठी की आयोजन सचिव डॉ नलिनी मिश्रा आदि इस दौरान मंच पर उपस्थित रहे।समापन सत्र में अवध प्रांत विद्या भारती के कोषाध्यक्ष डॉ सशक्त सिंह ने स्वागत परिचय दिया। शिक्षक समागम संगोष्ठी सार प्रस्तुतीकरण प्रो. सुनीता कुमार, उपाध्यक्ष अवध प्रान्त, विद्याभारती उच्च शिक्षा संस्थान ने दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन- प्रो. जे.पी. पाण्डेय, माननीय कुलपति, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविध्यालय, लखनऊ ने दिया। आभार ज्ञापन डॉ. नलिनी मिश्रा और सत्र संचालन डॉ. नीरज शुक्ल ने किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी गणों के साथ विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान अवध प्रांत के पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य डॉ नेहा जैन, डॉ ऐश्वर्या सिंह, डॉ. संजय शुक्ला, डॉ. जितेंद्र कुमार पाल, डॉ योगेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

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