Samskrit Kranti

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संस्कृतं मम जीवनध्येयम्

18/03/2026
29/01/2026

#सुभाषित_द्वारा_संस्कृतम्
सर्पश्चाग्निश्च सिंहश्च कुलपुत्रश्च भारत।
नावज्ञेया मनुष्येण सर्वे ह्येतेऽतितेजसः॥ -विदुरनीतिः-5.59
भावार्थ:- साँप, अग्नि, सिंह और उत्तम वंश में उत्पन्न पुत्र की उपेक्षा कभी भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये सभी तेजस्वी होते हैं। तेजस्वियों की उपेक्षा करने वाला कष्टों से घिर जाता है।

26/01/2026

#सुभाषित_द्वारा_संस्कृतम्
विना शीलेन विनता वाग्मिता विद्यया विना।
विनियोगैर्विना वित्तं मास्तु कस्यापि देहिनः॥
भावार्थ:- शील के बिना नम्रता व्यर्थ है, विद्या के बिना वाणी निरर्थक है, और उपयोग के बिना धन बेकार है। ऐसी वस्तुएँ किसी के पास न हों तो ही अच्छा है।

25/01/2026

#सुभाषित_द्वारा_संस्कृतम्
अनन्तशास्त्रं बहुलाश्च विद्या,
अल्पं च कालो बहुविघ्नता च।
यत्सारभूतं तदुपासनीयं
हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्॥
भावार्थ:- शास्त्र अनन्त हैं और विद्याएँ भी बहुत अधिक हैं। समय बहुत कम है तथा बाधाएँ भी अनेक हैं। इसलिए केवल सारभूत ज्ञान को ही ग्रहण करना चाहिए, जैसे हंस दूध को पानी से अलग करके के मात्र दूध को ग्रहण कर लेता है।

23/01/2026

#सुभाषित_द्वारा_संस्कृतम्
पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।
भावार्थ:- पृथ्वी पर तीन ही सच्चे रत्न हैं, जल, अन्न और सुभाषित (मधुर वाणी)। किन्तु मूर्ख लोग पत्थरों को ही रत्न समझते हैं।

23/01/2026

वसन्तपञ्चम्या: शुभकामना:

06/01/2026

हमारे पूर्वज नौकाओं से पूरे विश्व में व्यापार करते थे। यह ग्रन्थों में निबद्ध बात अब प्रत्यक्ष अनुभूत होगी।

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