06/05/2024
*ब्रादरान ए तरीक़त के साथ बर्ताव !!*
*ब्रादरान ए तरीक़त के साथ मेल जोल इस तरह हो कि जहां तक मुमकिन हो उनके साथ मुवाफिक़त की जाए और उनकी मुखालफत को तर्क किया (छोड़ा) जाए। सिवाए उन बातों के जिनको शरीअत ने जाइज़ नहीं रखा। और की़ना और हसद से परहेज़ किया जाए। और उस चीज़ को इख्तियार किया जाए जिसमें एक दूसरे की सलामती हो।*
*[आदाब अल मुरीदीन - पेज 66]*
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05/05/2024
*लड़कों के साथ मेल जोल !!*
*कम उम्र लड़कों के साथ सोहबत रखना मकरूह है, क्योंकि इसमें आफतें हैं। और अगर किसी को इस मुसीबत में गिरफ्तार होना ही पड़े तो उसको चाहिए कि सलामत रवी और दिल व आजा़ की हिफाज़त के साथ उनसे मेल जोल रखे और उनको रियाज़त करने और अदब सीखने और लह़्व लइब(खेल कूद) से बचने की तर्बियत देता रहे।*
*[आदाब अल मुरीदीन - पेज 66]*
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03/05/2024
*अपने नफ्स की निगहदाश्त करनी चाहिए !!*
*मुरीद को चाहिए कि वह अपने नफ़्स की निगहदाश्त करता रहे और उसके अखलाक़ को पहचाने। क्योंकि वह बुराई का हुक्म देने वाला है। और उससे कभी गफलत ना करे अगरचे वह मार्फत में इंतहा को पहुंचा हुआ ही क्यों ना हो।*
*[आदाब अल मुरीदीन - पेज 55]*
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22/04/2024
*इल्म पुकार कर अमल की जानिब तवज्जो दिलाता है !!*
*जो कुछ तुम दोनों कानों से सुनते हो वह किस्सा कहानी है। और जो तुमने क़ल्ब (दिल) से सुना तो उसको तुमने महफूज़ रखा। और जिसने जो कुछ सुना उस पर अमल किया तो उसने हिदायत पाई। और दूसरों को हिदायत दी। इल्म पुकार पुकार कर अमल की जानिब तवज्जो दिलाता है। और अगर उसकी बात को ना सुना जाए तो वह रुखसत हो जाता (चला) जाता है।*
*[आदाब अल मुरीदीन - पेज 45]*
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19/04/2024
*इल्म तीन हैं !!*
*एक वह इल्म जो अल्लाह की जानिब से हो, और वह इल्म ए जा़हिर है। जैसा की हुक्म और मुमानअत और अहकाम व हुदूद(सजा़एं)। दूसरा इल्म अल्लाह के साथ है, और वह खौफ और उम्मीद और मोहब्बत और शौक़ है। और तीसरा इल्म अल्लाह से मुतअल्लिक़ है और वह उसके सिफात और औसाफ का इल्म है।*
*[आदाब अल मुरीदीन - पेज 44]*
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13/04/2024
*क़ल्ब रूह के साथ है या नफ़्स के ??*
*रूह भलाई की कान, और नफ़्स बुराई की कान है। अक़्ल रूह का लश्कर, और ख्वाहिशें नफ्स का लश्कर हैं। तौफीक़ अल्लाह की तरफ से रूह की मदद है। और शर्म सारी और शर्मिंदगी नफ़्स की मदद है। और क़ल्ब (दिल) इन दोनों लश्कारों में से (जो) गालिब (है उस) के साथ है।*
*[आदाब अल मुरीदीन - पेज 57]*
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11/04/2024
*ईद हुक्म ए इलाही है !!*
*ईद कोई दुनियावी तक़रीब नहीं, अल्लाह का हुक्म है। जब शरीअत के मुताबिक ना हो महज़ बेकार बल्कि गुनाह है।*
*[ फतावा रज़विय्या - जिल्द 10- मुलख्खसन]*
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08/04/2024
*उम्मत की मग़फिरत !!*
*रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक लम्बी हदीस में फरमाया जब रमज़ान की आखरी रात होती है तो अल्लाह तआला उम्मत की मग़फिरत फरमा देता है। किसी ने अर्ज़ किया : क्या वह शब ए क़द्र है ? फरमाया: नहीं। क्या तू नहीं देखता कि काम करने वाले काम करते हैं जब काम से फारिग़ होते हैं उस वक़्त मज़दूरी पाते हैं।*
*[शुअब अल ईमान - जिल्द 3 - हदीस 3603]*
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07/04/2024
*रोजा़ की पाकीज़गी!!*
*रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने सदक़ ए फित्र को फर्ज़ क़रार दिया। ताकि रोजे़ के लिए फालतू और बेहूदा बातों और कामों से पाकीज़गी हो जाए। और मिस्कीनों को खुराक हासिल हो। जिसने इसे नमाज़ ए ईद से पहले पहले अदा कर दिया तो यह ऐसी ज़कात है जो क़बूल कर ली गई। और जिसने इसे नमाज़ के बाद अदा किया तो यह आम सदाका़त में से एक सदका़ है।*
*[अबू दाऊद :1609]*
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06/04/2024
*जिब्राइल अलैहिस्सलाम उतरते हैं!!*
*रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : जब शबे क़द्र होती है तो हज़रत ए जिब्राइल अलैहिस्सलाम फरिश्तों की जमाअत में उतरते हैं। और हर उस खड़े बैठे बंदे को दुआएं देते हैं जो अल्लाह तआला का ज़िक्र कर रहा हो।*
*[शुअब अल ईमान - जिल्द 3 - हदीस 3717]*
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04/04/2024
*रोज़ा लटका रहता है !!*
*हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: बंदा का रोजा़ आसमान और ज़मीन के बीच लटका रहता है जब तक सदका़ ए फित्र अदा ना करे।*
*[तारीख ए बग़दाद - जिल्द - 9- 4735]*
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04/04/2024
*पिछले गुनाहों की बख्शिश !!*
*रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया: जिसने इस रात (शबे क़द्र) में ईमान और इखलास स के साथ शब बेदारी करके इबादत की तो अल्लाह तआला उसके पिछले गुनाह बख्श देता है।*
*[बुखारी शरीफ:35]*
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