21/09/2025
प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी ।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ॥
पंचमं स्कंदमातेति षष्ठं कात्यायनी तथा ।
सप्तमं कालरात्रिश्च महागौरीति चाष्टमम् ॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।
उक्तानयेतानि नामानि ब्राह्मणैव महात्मना ॥
अर्थ : प्रथम स्वरुप शैलपुत्री (हिमालय पर्वत की बेटी),
दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी (जो ब्रह्म में विचरण करती हैं, एक तपस्वी),
तीसरा स्वरुप चंद्रघण्टा (जिनके पास घंटी के आकार का अर्धचंद्र है)
चौथा स्वरुप कूष्माण्डा (ब्रह्मांड को बनाने वाली देवी),
पांचवा स्वरुप स्कन्दमाता (भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता),
छठा स्वरुप कात्यायनी (कात्यायन ऋषि की बेटी),
सातवा स्वरुप कालरात्रि (विनाश की अंधेरी रात),
आठवा स्वरुप महागौरी (महान चमकदार सफेद रूप),
नौवा स्वरुप सिद्धिदात्री है। (सिद्धियों या सिद्धियों की दाता)
ये देवी दुर्गा के नौ स्वरुप हैं (नौ दुर्गाओं के नाम हैं, इन्हें नव दुर्गा के रूप में स्तुति की जाती है),
जिनके नाम ब्रह्मा जी के द्वारा बताए गए हैं और प्रसिद्ध हैं।
**आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ||**