Aaroh Foundation

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विद्यार्थी संघ (अराजनैतिक )
लखनऊ विश्व

25/01/2022

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं....

#गणतंत्र_दिवस

08/06/2021

World Ocean Day, 8 June

Key Highlights

1.World Ocean Day is celebrated on June 8.

2.This year's theme is The Oceans: Life and Livelihoods

3.UN General Assembly passed the resolution on December 5 for this day to be celebrated

UNESCO states that this day is observed to remind everyone that oceans are the lungs of our planet. Awareness is raised about how to conserve it and rescue it from the eventual degradation that is caused by our careless activities. Therefore, World Ocean Day is celebrated for this reason all across the world.

06/06/2021
03/06/2021

"One can speak poetry just by arranging colours well..."

-Vincent van Gogh

Painting Credit: Shweta Yadav

30/05/2021

"वेदना बुरी होती है। वह व्यक्ति को व्यक्तिबद्ध कर देती है।"
-मुक्तिबोध

Via Hindwi

27/05/2021

🌹🌹🌹🌹🌹


via Ayush Chaturvedi

26/05/2021

बुद्ध🌸🌸

19/05/2021

🌸🌸🌸

11/05/2021

"ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है ।"
- सआदत हसन मन्टो

#मंटो 🌸🌸🌸🌸🌸

13/04/2021

🌸🌸

22/03/2021

Study so that you are able to meet arguments of your opponents. Equip your ideology with supporting arguments. If you oppose a prevailing belief, if you criticize a great person who is considered to be an incarnation, you will find that your criticism will be answered by calling you vain and egoist. The reason for this is mental ignorance. Logic and free thinking are the twin qualities that a revolutionary must inevitably possess. To say that Mahatmas, who are great, should not be criticized because they are above criticism and for this reason, whatever they say about politics, religion, economics and ethics is correct and that whatever they say will have to be accepted, whether you believe it or not, reveals a mentality which cannot lead us to progress and is clearly regressive.
- Bhagat Singh

इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से,
अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूँ तो इंक़लाब लिखा जाता है।

*शहीद दिवस, 23 मार्च*

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शत शत नमन❤️❤️✨

30/01/2021

#राष्ट्रपिता की हत्या
#बापू
एक बहुत ही मनहूस दिन. नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे और विष्णु करकरे दिल्ली रेलवे स्टेशन के रेस्तराँ से नाश्ता करके बिड़ला मंदिर के लिए निकल गए.
गोडसे ने बिड़ला मंदिर के पीछे के जंगल में तीन या चार राउंड फ़ायर करके पिस्टल को परखा. दिन के 11.30 बजे गोडसे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन निकल गए और करकरे मद्रास होटल. दोपहर बाद दो बजे करकरे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुँचे. वहाँ गोडसे और आप्टे से मिले.
शाम के 4.30 बजे रेलवे स्टेशन से तांगे से तीनों बिड़ला मंदिर के लिए निकल गए. गोडसे ने बिड़ला मंदिर के पीछे लगी शिवाजी की मूर्ति के दर्शन किए. आप्टे और करकरे वहां से क़रीब चार किलोमीटर दूर बिड़ला भवन चले गए, बिड़ला भवन अलबुकर्क रोड पर था, जिसे आज तीस जनवरी मार्ग के नाम से जाना जाता है.

बिड़ला भवन को अब 'गांधी स्म़ति' के नाम से भी जाना जाता है, गोडसे ने प्रार्थना स्थल की ओर बढ़े रहे महात्मा गांधी को शाम के 5.17 बजे गोली मार दी. गोडसे को गिरफ़्तार कर लिया गया लेकिन आप्टे और करकरे दिल्ली से भाग गए.

गांधी की हत्या के 17 साल बाद जाँच आयोग का क्यों गठन क्यों किया गया? यह एक ज़रूरी सवाल है जिसका जवाब बहुत मुश्किल नहीं है.

गांधी की हत्या कोई अचानक नहीं हुई थी. हम कह सकते हैं कि आज़ाद भारत में पुलिस की लापरवाही की कहानी गांधी की हत्या से ही शुरू होती है. कई लोग मानते हैं कि गांधी की हत्या होने दी गई. बापू की हत्या के 17 साल बाद 22 मार्च 1965 को इसकी जाँच के लिए एक आयोग का गठन किया गया. इस जाँच आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जीवन लाल कपूर को मिली. इसे कपूर कमिशन की जाँच के नाम से जाना जाता है.

12 अक्टूबर 1964 को नाथूराम गोडसे के छोटे भाई गोपाल गोडसे के अलावा विष्णु करकरे और मदनलाल पाहवा आजीवन क़ैद की सज़ा काटकर रिहा हुए.

जब गोपाल गोडसे और विष्णु करकरे पुणे पहुँचे तो उनके दोस्तों ने किसी नायक की तरह उनका स्वागत करने का फ़ैसला किया. इसके लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनी, जिसमें इनके कारनामे यानी गांधी की हत्या में इनकी भूमिका की सराहना और उसका उत्सव मनाने का फ़ैसला हुआ.

पूरी रिपोर्ट BBC News हिन्दी पर पढ़े.

अंश साभार- बीबीसी हिंदी

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