Central Sanskrit University, Lucknow Campus

Central Sanskrit University, Lucknow Campus

Share

CSU, Lucknow Campus is located at Vishal Khand, Gomati Nagar, Lucknow. It was established in 1986.

Photos from Central Sanskrit University, Lucknow Campus's post 20/08/2026

‘Bring out the Arjun within’ से विद्यार्थियों को मिला आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता का संदेश Central Sanskrit University, Lucknow Campus
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, एकाग्रता एवं जीवन-मूल्यों के विकास के उद्देश्य से दिनांक 20 अगस्त 2026 को विशेष प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रतिपाद्य विषय “Bring out the Arjun within”रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इस्कॉन, लखनऊ के उपाध्यक्ष श्रीमान् दीनदयाल प्रभु ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए जीवन में लक्ष्य, अनुशासन, एकाग्रता एवं अच्छे संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर अर्जुन जैसी प्रतिभा और क्षमता विद्यमान है; आवश्यकता केवल उसे पहचानकर उचित दिशा देने की है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल एवं अन्य भटकाव उत्पन्न करने वाले साधनों से दूर रहकर अपने लक्ष्य पर केन्द्रित रहने तथा असफलताओं से निराश न होकर उनसे सीख लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ज्योतिषशास्त्र विद्याशाखा के वरिष्ठ आचार्य प्रो. मदनमोहन पाठक ने की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में अपार प्रतिभा और क्षमता होती है। आज के डिजिटल युग में युवाओं को भटकाव से बचते हुए लक्ष्य, अनुशासन, चरित्र, कर्तव्यबोध एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने भीतर के ‘अर्जुन’ को जागृत करें और अपनी प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में करें।
कार्यक्रम में भारतीय वैदिक परम्परा के अनुरूप विद्यार्थियों द्वारा ऋग्वेद, शुक्लयजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद तथा शुक्लयजुर्वेद (काण्व) के मन्त्रों का सस्वर पाठ किया गया। इसके साथ ही कुलगीत एवं वन्देमातरम्की प्रस्तुति भी हुई।

कार्यक्रम में प्रो. श्यामदेव मिश्र द्वारा अतिथि-सत्कार, स्वागत भाषण एवं विषय-प्रवर्तन किया गया। प्रो. भारतभूषण त्रिपाठी ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा प्रो. गणेश शंकर विद्यार्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।





20/08/2026
Photos from Central Sanskrit University, Lucknow Campus's post 20/08/2026

संस्कृतभाषायामुपनिबद्धं बौद्धवाङ्मयम्’ विषय पर विशेष व्याख्यान सम्पन्न
लखनऊ, 20 अगस्त 2026। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के बौद्धदर्शन विद्याशाखा एवं पालि अध्ययन-अनुसन्धान केन्द्र के संयुक्त तत्त्वावधान में संस्कृतसप्ताह-महोत्सव के उपलक्ष्य में ‘बौद्धदर्शन-विशिष्ट-व्याख्यानमाला’ के अन्तर्गत ‘संस्कृतभाषायामुपनिबद्धं बौद्धवाङ्मयम्’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन 20 अगस्त 2026 को प्रातः 10:00 बजे ऑनलाइन माध्यम से किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. विजय कुमार जैन, निदेशक, भोगीलाल लेहरचन्द प्राच्य अध्ययन संस्थान, दिल्ली ने मुख्य वक्ता के रूप में उक्त विषय पर विस्तृत एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रो. जैन पालि साहित्य एवं बौद्ध वाङ्मय के प्रख्यात विद्वान् हैं तथा वे केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर के पूर्व प्राचार्य एवं निदेशक भी रह चुके हैं।
अपने व्याख्यान में प्रो. जैन ने सर्वजन की भाषा के रूप में संस्कृत के स्वरूप को प्रतिपादित करते हुए संस्कृत भाषा में विरचित बौद्ध साहित्य की समृद्ध परम्परा, उसके दार्शनिक एवं साहित्यिक महत्त्व तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण एवं प्रसार में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि बौद्ध साहित्य का अध्ययन केवल धार्मिक अथवा दार्शनिक दृष्टि से ही महत्त्वपूर्ण नहीं है, अपितु भारतीय भाषायी, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक इतिहास को समझने की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्त्व है।
ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान में बौद्धदर्शन, पालि एवं संस्कृत के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा अध्यापकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। व्याख्यान के दौरान संस्कृत में उपलब्ध बौद्ध ग्रन्थों, बौद्ध दार्शनिक परम्पराओं तथा भारतीय ज्ञान-विरासत में संस्कृत बौद्ध वाङ्मय के योगदान से सम्बन्धित विभिन्न महत्त्वपूर्ण पक्षों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. प्रफुल्ल गडपाल तथा सह-समन्वयक डॉ. कृष्णा कुमारी, डॉ. प्रदीप कुमार द्विवेदी, डॉ. जयवन्त खण्डारे एवं डॉ. प्रियंका सहित अन्य सहयोगियों ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अन्त में डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रफुल्ल गडपाल ने कहा कि संस्कृत एवं पालि में उपलब्ध बौद्ध साहित्य भारतीय ज्ञान-परम्परा की अमूल्य निधि है। इसके गहन अध्ययन, अनुसंधान एवं प्रचार-प्रसार से बौद्धदर्शन के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक एवं दार्शनिक विरासत को वैश्विक स्तर पर समझने में महत्त्वपूर्ण सहायता मिलेगी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं अध्येताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी बौद्धदर्शन तथा पालि-संस्कृत अध्ययन से सम्बन्धित ऐसे अकादमिक कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

Photos from Central Sanskrit University, Lucknow Campus's post 19/08/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती के अवसर पर 19 अगस्त 2026 को लखनऊ परिसर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. मदन मोहन पाठक ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. पाठक ने कहा कि तुलसीदास केवल भक्ति के कवि नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों, लोकमंगल और सामाजिक समरसता के महान चिंतक थे। उनकी रचनाएँ आज भी सत्य, मर्यादा, विनम्रता, करुणा, कर्तव्य एवं सदाचार का संदेश देती हैं।
संगोष्ठी में आचार्य भारत भूषण त्रिपाठी, आचार्य धनीन्द्र कुमार झा, डॉ. कविता बिसारिया, डॉ. कृति रस्तोगी, डॉ. रविकान्त सहित छात्र-छात्राओं ने तुलसीदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. संजय कुमार मिश्र के संयोजकत्व में हुआ। मंगलाचरण, कुलगीत एवं वन्दे मातरम् से कार्यक्रम का शुभारम्भ तथा राष्ट्रगान के साथ समापन हुआ। Central Sanskrit University Central Sanskrit University, Lucknow Campus
#लोकमंगल

19/08/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती के अवसर पर 19 अगस्त 2026 को लखनऊ परिसर में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. मदन मोहन पाठक ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. पाठक ने कहा कि तुलसीदास केवल भक्ति के कवि नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-मूल्यों, लोकमंगल और सामाजिक समरसता के महान चिंतक थे। उनकी रचनाएँ आज भी सत्य, मर्यादा, विनम्रता, करुणा, कर्तव्य एवं सदाचार का संदेश देती हैं।
संगोष्ठी में आचार्य भारत भूषण त्रिपाठी, आचार्य धनीन्द्र कुमार झा, डॉ. कविता बिसारिया, डॉ. कृति रस्तोगी, डॉ. रविकान्त सहित छात्र-छात्राओं ने तुलसीदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. संजय कुमार मिश्र के संयोजकत्व में हुआ। मंगलाचरण, कुलगीत एवं वन्दे मातरम् से कार्यक्रम का शुभारम्भ तथा राष्ट्रगान के साथ समापन हुआ। Central Sanskrit University Central Sanskrit University, Lucknow Campus
#लोकमंगल

17/08/2026

Regarding Revision of Dates for Walk-in-Interviews for engagement of Part-Time Teachers. Central Sanskrit UniversityIct CellIct Cell

Photos from Central Sanskrit University, Lucknow Campus's post 16/08/2026

WALK-IN-INTERVIEW Central Sanskrit University, Lucknow CampusCentral Sanskrit University

Photos from Central Sanskrit University, Lucknow Campus's post 15/08/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति, गौरव और उत्साह के साथ मनाया गया।
ध्वजारोहण के साथ देश के वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। विद्यार्थियों एवं परिसर परिवार ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

संस्कृत की गौरवशाली परंपरा और राष्ट्रप्रेम के इस संगम ने स्वतंत्रता दिवस समारोह को विशेष बना दिया।

जय हिन्द! | वन्दे मातरम्!

िन्द #वन्दे_मातरम् 🇮🇳

Photos from Central Sanskrit University, Lucknow Campus's post 14/08/2026

शास्त्रार्थ से निखरेगी विद्यार्थियों की तर्कशक्ति :
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में शास्त्रार्थ सभा का आयोजन
कार्यक्रम का शुभारम्भ ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद कुलगीत, राष्ट्रगीत एवं सरस्वती स्तुति तथा नृत्य की प्रस्तुति की गई। अतिथियों के अभिनन्दन एवं स्वागतगीत के पश्चात परिसर निदेशक प्रो. सर्वनारायण झा ने अपने स्वागत भाषण में भारतीय ज्ञान-परम्परा में शास्त्रार्थ के महत्त्व को रेखांकित करते हुए इसे तर्क, संवाद और वैचारिक समन्वय की सशक्त परम्परा बताया। उन्होंने कहा कि शास्त्रार्थ केवल विचारों की प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सत्य की खोज और ज्ञान के निरंतर परिष्कार का माध्यम है।
प्रो. झा ने कहा कि भारतीय परम्परा में विद्वानों के बीच स्वस्थ संवाद के माध्यम से जटिल विषयों पर गहन विमर्श की समृद्ध परम्परा रही है। वर्तमान समय में भी समाज और शिक्षा जगत के सामने उपस्थित विविध चुनौतियों के समाधान के लिए तार्किक एवं रचनात्मक संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे शास्त्रार्थ की मूल भावना-तथ्य, तर्क, विनम्रता और परस्पर सम्मान को बनाए रखते हुए अपने विचार प्रस्तुत करें।
उन्होंने कहा कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य केवल सूचना का संचय नहीं, बल्कि विवेक का विकास है। शास्त्रार्थसभा विद्यार्थियों एवं विद्वानों को अपने विचारों को प्रमाण और तर्क के आधार पर अभिव्यक्त करने तथा दूसरे पक्ष को धैर्यपूर्वक समझने का अवसर प्रदान करती है। ऐसी गतिविधियाँ अकादमिक वातावरण को समृद्ध करने के साथ-साथ युवाओं में तार्किक चिंतन और संवाद-कौशल का विकास करती हैं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण व्याकरणशास्त्र एवं ज्योतिषशास्त्र पर आधारित शास्त्रार्थ रहा। व्याकरणशास्त्र के शास्त्रार्थ में तुषार मिश्र, उज्ज्वल पाण्डेय, शिखर शुक्ल एवं गौरव मिश्र तथा ज्योतिषशास्त्र के शास्त्रार्थ में कुलदीप दीक्षित, अंशु कुमार चौबे ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों के बीच होने वाला यह शास्त्रार्थ भारतीय शास्त्रीय परम्परा में निहित तर्क, संवाद और ज्ञान-विमर्श की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि प्रमोद पण्डित, क्षेत्र-संगठन मन्त्री, संस्कृत भारती (पूर्वी-उत्तर-प्रदेश क्षेत्र) द्वारा विशेष उद्बोधन दिया गया। सभा के अध्यक्ष के रूप में परमसम्माननीय स्वान्तरञ्जन, अखिल भारतीय प्रचारक-प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उपस्थित रहे। भारतीय शास्त्रपरम्परा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आज समाज के समक्ष उपस्थित विभिन्न प्रश्नों एवं चुनौतियों के समाधान शास्त्रों में निहित ज्ञान, तर्क और सिद्धान्तों के आधार पर खोजे जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों का अध्ययन, मनन एवं तर्कपूर्ण व्याख्या कर उनके प्रासंगिक समाधानों को प्रमाण और विवेक के साथ समाज के समक्ष प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में योगासन परिसर के विद्यार्थी माधवेश तथा खुशबू ने प्रस्तुत किया। समापन अवसर पर प्रो. मदन मोहन पाठक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन हरिओम मणि त्रिपाठी एवं सुमेधा आर्या द्वारा किया गया तथा अन्त में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में परिसर के प्राध्यापक गण, अधिकारी गण, कर्मचारी गण, शोधछात्र तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
शास्त्रार्थ केवल वाद-विवाद नहीं, बल्कि ज्ञान को परखने और विचारों को परिष्कृत करने की भारतीय परम्परा है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित यह सभा विद्यार्थियों में तर्कशक्ति, आत्मविश्वास, शास्त्रीय दृष्टि एवं प्रभावी अभिव्यक्ति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
Central Sanskrit University Central Sanskrit University, Lucknow Campus Ict Cell PMO India Chief Minister Office Uttar Pradesh #भारतीय_ज्ञान_परंपरा

13/08/2026

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर Central Sanskrit University Central Sanskrit University, Lucknow Campus Central Sanskrit University, Nashik Campus PMO India Chief Minister Office Uttar Pradesh Ict Cell

Want your school to be the top-listed School/college in Lucknow?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Telephone

Address


Vishal Khand 4, Gomti Nagar
Lucknow
226010

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm