S.Kumar Kahani

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I am Santosh kumar Mishra

21/03/2023

नारी को तो अपने महत्व का आभास ही तब होता है, जब पुरुष उसके लिए अपने प्राणों का दांव लगाता है

19/03/2023

बिखरने का मुझको शौक है बड़ा समेटेगा तू, मुझको यह तो बता ?

19/03/2023

मलकीट मल में ही बिलबिलाता रहता है और वही प्रसन्न रहता है जिस समाज का अंग है वैसा ही तो व्यवहार करेगा l

19/03/2023

राजनीति में अंधविश्वास अपराध है- अंधविश्वास ही क्यों विश्वास भी l

19/03/2023

राजनीति का आधार कहीं विश्वास भी हुआ है क्या ? सच्चा राजनीतिज्ञ अपने निकट के व्यक्ति को भी संदेह की दृष्टि से देखा करता है l यदपि ऐसा नहीं राजनीतिज्ञ का सदा अविश्वास ही करना चाहिए, किंतु यह मानता हूं उससे सावधान रहना चाहिए l

19/03/2023

चतुर व्यक्ति वही है, जो दूसरे को उसी के सिद्धांत में बांध दे l
मिश्र

07/03/2023

चतुर व्यक्ति का मंत्र,
चतुर ब्यक्ति वह होता है जो दूसरों की सोच और विचार विधियों को समझता है और अपनी विचारधारा को उनकी समझ में आसान ढंग से समझा सकता है। उसे दूसरों की सोच के साथ सहमत होने का तरीका जानना चाहिए ताकि वह उनके विचारों को समझ सके और उन्हें अपने सिद्धांतों की ओर आकर्षित कर सके। चतुर व्यक्ति को दूसरों के साथ अच्छे संबंध बनाने की कला का ज्ञान होता है जिससे वह दूसरों को अपनी ओर खींच सकता है।
एक चतुर व्यक्ति का मूल मंत्र होता है कि वह दूसरों की सोच को समझने और समानता के साथ अपने सिद्धांतों को साझा करने के लिए तैयार रहता है। वह दूसरों की दृष्टिकोण से भी विषयों को देखने की क्षमता रखता है और अपने आप को उनके स्थान पर रखकर समझाने का प्रयास करता है। इस तरह से, वह दूसरों को अपने सिद्धांतों के साथ जुड़ने के लिए उनके विश्वासों और मूल्यों का सम्मान करता हुआ, उन्हें अपनी ओर आकर्षित करता है।
सन्तोष कुमार मिश्र

06/03/2023

होलिका दहन होली के त्योहार के पहले दिन मनाया जाता है। यह पूजनीय रस्म है जो होली के पूर्व संध्या को मनाई जाती है। इस रस्म में, लोग एक छोटी जलती हुई मूर्ति को जलाते हैं जिसे होलिका कहते हैं। होलिका दहन के लिए लोग सभी उम्र के लोगों को एकत्रित करते हैं।

इस पूजा का इतिहास पुरातन है और इसमें प्रहलाद की कथा का जिक्र होता है। प्रहलाद एक भक्त था जो अपनी भक्ति से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करता था। प्रहलाद के बाप ने अपनी बहन होलिका के साथ साजिश रची थी जिससे प्रहलाद जलकर मर जाता है। लेकिन होलिका अपनी साजिश के फलस्वरूप खुद ही जल जाती है जबकि प्रहलाद को कुछ नहीं होता। इस पूजा के माध्यम से, होलिका दहन भक्तों को भगवान की कृपा और शुभकामनाएं देने के लिए किया जाता है।

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