BAPSA Lucknow

BAPSA  Lucknow

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Birsa Ambedkar Phule Socialist Students Association , Lucknow
Works for the rights of SC ST OBC , students and minorities

10/01/2025

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किसी समस्या के लिए उपर दिये नमबर पर संपर्क करें।
जय भीम💙
नमो बुद्धाय✨




30/12/2024

Jai bhim 💙
Bapsa stands in solidarity with BHU students.












24/12/2024

बाबासाहेब द्वारा 25 दिसम्बर 1927 मे मनुस्मृति दहन की गई थी। आज भी मनुस्मृति दहन ब्राह्मणवाद व पितृसत्ता की संरचना को तोडने का प्रतीक है।

जय भीम💙
नमो बुद्धाय ✨









Photos from BAPSA  Lucknow's post 06/12/2024

आज लखनऊ विश्वविद्यालय में बाबा साहब की प्रतिमा परिसर में BAPSA की ओर से उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर पुष्प अर्पित हुआ।





Photos from BAPSA  Lucknow's post 05/12/2024

"विरांगना: महिला सशक्तिकरण का मार्ग"

दिनांक-04/12/2024

लखनऊ विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग ने बिरसा अंबेडकर फुले स्टूडेंट एसोसिएशन के सहयोग से मनोविज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. अर्चना शुक्ला की अध्यक्षता में "वीरांगना" शीर्षक से महिला सशक्तिकरण पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में दो महिला नेताओं - वीरांगना झलकारी बाई और वीरांगना उदा देवी की बहादुरी का जश्न मनाया गया, जिन्होंने हमारे देश के उत्थान के लिए लड़ाई लड़ी और अपनी शक्ति से अधिकारों के लिए खड़ी हुईं। सत्र की शुरुआत डॉ. अर्चना शुक्ला और डॉ. मेघा सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। डॉ. अर्चना शुक्ला ने महिला सशक्तिकरण पर एक अद्भुत भाषण दिया और समकालीन दुनिया में महिलाओं की भूमिका और समानता पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने यह भी कहा कि अब समाज को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है क्योंकि महिलाएं पहले से ही आगे बढ़ रही हैं और बढ़ रही हैं। इसमें विभिन्न विभागों के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया एवं अपने विचार साझा किये। इंटरैक्टिव सत्र के बाद, विषय पर आधारित प्रश्नोत्तरी का एक दौर आयोजित किया गया। कार्यक्रम संपन्न हुआ

16/10/2024

महाराजा लाखन पासी जयंती पर लखनऊ निर्माता को शत शत नमन ✨

वीर शिरोमणि लाखन पासी ने लखनऊ की स्थापना की थी आज जिस टिल्ले पर किंग जार्ज मेडीकल कॉलेज की भव्य ईमारत खड़ी हुई हैं उसी टिल्ले पर राजा लाखन पासी का किला हुआ करता था लाखन पासी का राज्य 10-11 वि शताब्दी में था उनका किला डेढ़ किलो मीटर लम्बा और डेढ़ किलो मीटर चौड़ा था और धरा तल से 20 मीटर ऊँचे पर था लाखन पासी के पत्नी का नाम लखनावती था संभवता इस लिए लखनऊ का नाम लखनावती चलता था राजा लाखन पासी ने लखनावती वाटिका का निर्माण कराया था जिसके पूर्वी किनारे में नाग मंदिर भी बनवा था लाखन पासी नागों के उपासक थे किले के उत्तरी भाग में लाखन कुंड था उसमें साफ पानी भरा रहता था इस पानी का उपयोग राज घरानों के लोग करते थे इतिहास के पन्नो मे अंकित है कि जब सैयद सलार मसूद गाजी लखनऊ पर हमला किया था तो उसके प्रमुख सेना पति सयैद हातिम सैयद खातिम ने महाराजा लाखन पासी के किले गढ़ी जिन्दौर के सिमा पर पड़ाव डाला था वही से किले की सारी जानकारी हासिल किया और तय किया कि राजा लाखन पासी और कसमंडी के राजा कंस पर एक साथ हमला किया जाये ताकि ये एक दूसरे की मदद न कर पाए लाखन पासी कसमंडी के राजा कंस की बहुत पुरानी दोस्ती थी उस समय गाजी मियां और पासीयों की लड़ाई राज पाट की थी परिणाम स्वरूप सैयद सलार मसूद गाजी लाखन पासी और कसमंडी के राजा कंस पर सांम को ठीक होली के दिन हमला किया जब सारी सेना और लाखन पासी आराम कर रहे थे किले पर अचानक हमला देख कर लाखन पासी घोड़े पर सवार हुए सेना लेके युद्ध भूमि में जा डटे यह युद्ध बहुत भयंकर था राजा लाखन की सेना गाजी के सेना पर भूखे शेर की भांति टूट पड़े मसूद के सेना में सभी घुड़ सवार थे महाराजा लाखन को चारों तरफ से घेर लिया तब भी लाखन पासी बहादुरी से लड़ते रहे उन पर तलवारो के हमले हो रहे थे गाजी के एक सैनिक ने धोखे से पीछे से तलवार गर्दन पर मार दिया और उनका सर काट कर जमीन पर गिर गया भीषण युद्ध के बाद उस जगह का नाम सरकटा नाला पड़ा चौपटिया नमक स्थान पर स्थित अकबरी दरवाजे के पास ही युद्ध हुआ था जिस समय राजा का सिर धड़ से अलग हुआ था उस समय सिर कटने के बाद भी राजा का धड़ दोनों हाथ में तलवार लेके युद्ध कर रहा था सिर कटे होने के बावजूद कई सैनिको को मौत के घाट उतार दिया यह कारनामा गाजी के सैनिक देख कर घबड़ा गये ऐसे साहसी वीर पुरुष थे महाराजा लाखन पासी






13/10/2024

धम्मचक्रप्रवर्तन दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ✨
२० वीं सदी के मध्य में बोधिसत्व, भारत रत्न , विश्व ज्ञानपुंज, सिंबल ऑफ नॉलेज डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने अशोक विजयादशमी के दिन १४ अक्टूबर १९५६ को नागपुर में अपने ५,००,००० (5 लाख से अधिक) अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। डॉ॰ आंबेडकर ने जहां बौद्ध धम्म की दीक्षा ली वह भूमि आज दीक्षाभूमि के नाम से जानी जाती है। डॉ॰ आंबेडकर ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब बुद्धाब्ध (बौद्ध वर्ष) २५०० था। विश्व के कई देशों एवं भारत के हर राज्यों से बौद्ध अनुयाई बहुत बड़ी संख्या में हर साल दीक्षाभूमि, नागपुर आकर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस १४ अक्टूबर को एक उत्सव के रूप में मनाते हैं साथ ही बौद्ध धम्म ग्रहण भी करते हैं और जीवन को नैतिकता, समानता, बंधुत्व, न्याय को शामिल करने का संकल्प लेते है।यह त्यौहार व्यापक रूप से डॉ॰ आंबेडकर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है।

डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने यह दिन बौद्ध धम्म दीक्षा के लिए चूना क्योंकि इसी दिन ईसा पूर्व ३ री सदी में सम्राट अशोक ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। तब से यह दिवस बौद्ध इतिहास में अशोक विजयादशमी के रूप में जाना जाता था, डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर ने बीसवीं सदीं में बौद्ध धर्म अपनाकर भारत से लुप्त हुए धर्म का भारत में पुनरुत्थान किया।








11/10/2024

Jai bhim💙
Namo Buddhay ✨

सभी को कल अशोक विजयदशमी के त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ✨
अशोक विजयादशमी शब्द उस ऐतिहासिक उत्सव से लिया गया है जो कलिंग युद्ध में सम्राट अशोक की जीत के दस दिन बाद हुआ था। इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म का मार्ग शुरू किया था, जो उनके जीवन में एक परिवर्तनकारी क्षण था। भीषण कलिंग युद्ध के बाद, उन्होंने हिंसा छोड़ दी और बौद्ध धम्म के सिद्धांतों को अपना लिया।
इस दस दिवसीय कार्यक्रम में दसवें दिन का महत्वपूर्ण क्षण शामिल था जब सम्राट अशोक ने अपने शाही परिवार के साथ, प्रतिष्ठित बौद्ध भिक्षु, भंते मोग्गिलिपुत्त तिष्य से धम्म की शिक्षा प्राप्त की थी। इस धम्म दीक्षा के बाद, अशोक ने अपनी प्रजा का दिल बल या शस्त्र के माध्यम से नहीं बल्कि शांति और अहिंसा के माध्यम से जीतने की प्रतिज्ञा की।

बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार की अपनी प्रतिबद्धता में, अशोक ने उल्लेखनीय प्रयास किए, जिनमें हजारों स्तूपों का निर्माण, शिलालेखों और धम्म स्तंभों की स्थापना और बौद्ध धर्म के विस्तार के लिए अपनी बेटी संघमित्रा और बेटे महेंद्र को बौद्ध भिक्षुओं के रूप में श्रीलंका भेजना शामिल था, जहां उन्होंने 84,000 स्तम्भ खड़े किये गये। उन्होंने अपने संसाधनों को धम्म की सेवा में निवेश किया, जो दान और कल्याण के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।



02/10/2024

गांधी जी ने पृथक निर्वाचन क्षेत्र(separate electorates) के मसले पर बाबासाहेब का विरोध किया था, यदि न किया होता तो अनुसूचित जाति हिन्दू समुदाय से एक भिन्न वर्ग बन के खडा़ होता और आज की तारीख में एक आत्म- निर्भर वर्ग होता शैक्षिक, राजनैतिक व सामाजिक- सांस्कृतिक रूप से परंतु गांधी जी आमरण अनशन पर बैठ गए इसके विरुद्ध, नतीजा यह है कि आज यह वर्ग राजनैतिक, शैक्षिक व सामाजिक- सांस्कृतिक रूप से बिखर गया है।



17/09/2024

Remembering Periyar 💙
Erode Venkatappa Ramasamy (17 September 1879 – 24 December 1973), revered by his followers as Periyar or Thanthai Periyar, was an Indian social activist and politician who started the Self-Respect Movement and Dravidar Kazhagam. He is known as the 'Father of the Dravidian movement'.
He rebelled against Brahmin dominance and gender and caste inequality in Tamil Nadu.
Since 2021, the Indian state of Tamil Nadu celebrates his birth anniversary as 'Social Justice Day'





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