30/01/2020
एंटी लेप्रोसी डे: 30 जनवरी
प्रतिवर्ष 30 जनवरी को एंटी लेप्रोसी डे मनाया जाता है। हालांकि विश्व कुष्ठ दिवस प्रतिवर्ष जनवरी महीने के आखरी रविवार को मनाया जाता है। भारत में महात्मा गांधी के कुष्ठ रोग के उन्मूलन के प्रयासों को देखते हुए उन्हें उनके बलिदानी दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एंटी लेप्रोसी डे को 30 जनवरी को मनाए जाने का निर्णय लिया गया था।कुष्ठ रोग को हैनसेन रोग के नाम से भी जाना जाता है।
कुष्ठ रोग क्या है?
कुष्ठ रोग दीर्घकालिक संक्रामक रोग है, जो कि बेसिलस, माइकोबैक्टेरियम लेप्री (एम. लेप्री) के कारण होता है।कुष्ठ रोग के रोगाणु की खोज 1873 में हन्सेन ने की थी इसलिए कुष्ठ रोग को 'हन्सेन रोग' भी कहा जाता है। संक्रमण होने के बाद, औसतन पांच वर्ष की लंबी अवधि के बाद सामान्यत: रोग के लक्षण दिखाई देते है, क्योंकि एम. लेप्री धीरे-धीरे बढ़ता है। यह मुख्यत: मानव त्वचा, ऊपरी श्वसन पथ की श्लेष्मिका, परिधीय तंत्रिकाओं, आंखों और शरीर के कुछ अन्य क्षेत्रों को प्रभावित करता है।
रोग को पॉसीबैसीलरी (पीबी) या मल्टीबैसीलरी (एमबी) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जो कि बैसीलरी लोड पर निर्भर करता है। पीबी कुष्ठ रोग एक हल्का रोग है, जिसे कुछ (अधिकतम पांच) त्वचा के घावों (पीला या लाल) द्वारा पहचाना जाता है। जबकि एमबी कई (अधिक से अधिक) त्वचा के घावों, नोड्यूल, प्लाक/ प्लैक, मोटी त्वचा या त्वचा संक्रमण के साथ जुड़ा है।
रोग कैसे फैलता है?
बैक्टीरिया संचारण के लिए अनुपचारित कुष्ठ रोग- से पीड़ित व्यक्ति एकमात्र ज्ञात स्रोत है।
• श्वसन पथ विशेषकर नाक, संक्रामक व्यक्तियों के शरीर से जीव के बाहर निकलने का प्रमुख मार्ग है।
• रोग का कारण अनुपचारित मामलों के साथ नज़दीकी और लगातार संपर्क के दौरान नाक व मुंह से उत्सर्जित बूंदों द्वारा शरीर में श्वसन प्रणाली के माध्यम से जीव का प्रवेश होता है।
• शरीर में प्रवेश करने के बाद जीव तंत्रिका और त्वचा में चला जाता है।
• यदि शुरुआती चरणों में रोग का पता नहीं लगाया जाता है, तो इससे नसों को नुकसान हो सकता है तथा यह स्थायी विकलांगता उत्पन्न करता है।
कुष्ठ रोग के संकेत और लक्षण क्या हैं?
यदि किसी व्यक्ति में निम्नलिखित संकेत व लक्षण दिखाई देते है, तो कुष्ठ रोग हो सकता है:
• सांवली-चमड़ी वाले लोगों की त्वचा पर हल्के पैच हो सकते हैं, जबकि सफ़ेद, गोरी-चमड़ी वाले लोगों में गहरे या लाल रंग के पैच हो सकते है।
• त्वचा के चकत्तों/धब्बों में संवेदना की कमी या समाप्ति।
• हाथों या पैरों में सुन्नता या झुनझुनी।
• हाथों, पैरों या पलकों की कमजोरी।
• दर्दनाक नसें।
• लोलकी या चेहरे में सूजन या गांठ।
• दर्दरहित घाव या हाथ या पैर जल जाते है।
कुष्ठ रोग के संदेहास्पद के मामलों में क्या किया जाना चाहिए?
कुष्ठ रोग के संकेत एवं लक्षणों की उपस्थिति के मामले में कृपया अपने क्षेत्र की आशा या एएनएम से संपर्क करें या नज़दीकी अस्पताल में जाएं। कुष्ठ रोग का उपचार भारत के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों (डिस्पेंसरी) में नि:शुल्क उपलब्ध है।
एमडीटी (बहु-औषधि उपचार/मल्टीड्रग थेरपी) क्या है?
एमडीटी विभिन्न दवाओं का संयोजन है, क्योंकि किसी एकल एंटीलेप्रोसी दवा के साथ कभी भी कुष्ठ रोग का उपचार नहीं किया जाना चाहिए।
• किसी व्यक्ति को कुष्ठ रोग के टाईप के अनुसार प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा प्रस्तावित एमडीटी का पूरा कोर्स करना चाहिए।
• दूरदराज के क्षेत्रों सहित अधिकांश सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एमडीटी नि:शुल्क उपलब्ध है।
कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम-
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी):
वर्ष 1955 में सरकार ने राष्ट्रीय कुष्ठ रोग नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया था। वर्ष 1982 से मल्टी ड्रग थेरेपी की शुरुआत के बाद, देश से रोग उन्मूलन के उद्देश्य से वर्ष 1983 में इसे राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के रूप में बदल दिया गया।
वर्ष 2005 में हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग का उन्मूलन किया गया है; लेकिन अब भी विश्व के लगभग 57% कुष्ठ रोगी भारत में रहते हैं। कुल 682 जिलों में से 554 जिलों (81.23%) ने मार्च 2017 तक उन्मूलन प्राप्त कर लिया हैं।
रोग के मामले की शीघ्र जानकारी और उपचार ‘रोग उन्मूलन की कुंजी’ है, क्योंकि समुदाय में जल्दी कुष्ठ रोगियों का पता लगाने से समुदाय में संक्रमण के स्रोतों में कमी आएगी और रोग का संचारण भी रूकेगा। आशा रोग के मामलों का पता लगाने में मदद कर रही है तथा सामुदायिक स्तर पर संपूर्ण उपचार भी सुनिश्चित कर रही है; इसके लिए उसे प्रोत्साहन भुगतान दिया जा रहा है।
स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान, वर्ष 2018:
स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का आयोजन कुष्ठ रोग के बारे में जागरुकता उत्पन्न करने के लिए 30 जनवरी से 13 फरवरी तक पखवाड़े के दौरान वार्षिक अभियान के रूप में किया गया था।
स्पर्श कुष्ठ उन्मूलन अभियान (एसएलईसी): स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के केंद्रीय कुष्ठ विभाग ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर, ‘स्पर्श कुष्ठ उन्मूलन अभियान (एसएलईसी)’ वार्षिक अभियान की शुरूआत की है। इस अभियान का उद्देश्य 2 अक्टूबर वर्ष 2019 तक समाज में छिपे अनुपचारित नए कुष्ठ मामलों का, ग्रेड दो विकलांगता