30/01/2023
ओह, गांधी !
गोडसे और उसकी विचारधारा ने गांधी की देह को ही मारा था, उनकी आत्मा को किश्तों में मारने के दोषी थोड़े-बहुत हम सब हैं। भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम का यह महानायक आज़ादी की आहट के साथ अकेला पड़ने लगा था। उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। उसने नहीं चाहा कि देश का बंटवारा हो, लेकिन उसके सत्तालोलुप शिष्यों ने अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए देश के टुकड़े कर डाले। उसने नहीं चाहा कि देश में धार्मिक दंगे हों, लेकिन देश धर्म के नाम पर इतिहास के सबसे बड़े नरसंहार का साक्षी बना। उसने नहीं चाहा कि आज़ाद भारत में एक राजनीतिक दल के रूप में कांग्रेस का अस्तित्व बना रहे, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता संभाली और आजतक एक राजनीतिक परिवार की महत्वाकांक्षाओं का बोझ ढो रही है। उसने नहीं चाहा कि आज़ाद भारत में धार्मिक कट्टरताओं के लिए कोई जगह रहे, लेकिन आज़ादी के 75 साल बाद भी देश धर्मांधता और धार्मिक विभाजन का दंश झेल रहा है।उसने सत्य,अहिंसा और सत्याग्रह के रूप में ज़ुल्म से लड़ने के कारगर हथियार हमें दिए, लेकिन हमने धार्मिक और राजनीतिक आतंकवाद की आड़ में देश को हिंसा से भर दिया। कुटीर और ग्रामोद्योग के सहारे आत्मनिर्भर गांवों की उसकी परिकल्पना को हमने बेरहमी से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और स्वदेशी कॉरपोरेट घरानों के हाथों बेच दिया। राजनीतिक शुचिता की उसकी अवधारणा रिश्वतखोरी, घोटालों, मक्कारियों और साज़िशों की भेंट चढ़ गई। उसकी हत्या के बाद हमने चौक-चौराहों पर उसकी मूर्तियां खड़ी की, सरकारी दफ्तरों और करेंसी नोटों में उसकी तस्वीरें टांगी और उसकी आत्मा को देश-निकाला दे दिया।
भारतीय इतिहास के महानायक मोहनदास करमचंद गांधी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि !
Dhruv Gupt