17/03/2021
*फागुन आता देखकर, उपवन हुआ निहाल,*
*अपने तन पर लेपता, केसर और गुलाल।*
*तन हो गया पलाश-सा, मन महुए का फूल,*
*फिर फगवा की धूम है, फिर रंगों की धूल।*
*मादक महुआ मंजरी, महका मंद समीर,*
*भँवरे झूमे फूल पर, मन हो गया अधीर।*
*ढोल मंजीरे बज रहे, उड़े अबीर गुलाल,*
*रंगों ने ऊधम किया, बहकी सबकी चाल।*
*कोयल कूके कान्हड़ा, भँवरे भैरव राग,*
*गली-गली में गूँजता, एक ताल में फाग।*
*नैनों की पिचकारियाँ, भावों के हैं रंग,*
*नटखट फागुन कर रहा, अंतरमन को तंग।*
*रंगों की बारिश हुई, आँधी चली गुलाल,*
*मन भर होली खेलिए, मन न रहे मलाल।*
*उजली-उजली रात में, किसने गाया फाग,*
*चाँद छुपाता फिर रहा, अपने तन के दाग।*
*नेह-आस-विश्वास से, हुए कलुष सब दूर,*
*भीगे तन-मन-आत्मा, होली का दस्तूर।*
💐 *ईश्वर आपके जीवन को खुशियों के रंगों से सराबोर रखें,यही प्रार्थना करते हैं* 💐