08/05/2023
एक पेड़ में कितने औषधीय गुण हो सकते हैं? हमारी-आपकी सोच से भी कहीं ज़्यादा गुणों से भरपूर हो सकता है ये पेड़। नाम है चिलबिल!
आज की युवा पीढ़ी ने भले ही इसका नाम भुला दिया हो, लेकिन लोगों को सेहतमंद रखने की आदत चिलबिल में अब भी जस की तस मौजूद है। इस पेड़ को कई नामों से जाना जाता है। चिरोल, चिरबिल्व, बंदर बाटी, बंदर पापड़ी जैसे कई नाम हैं चिलबिल के। इस पेड़ को कांजो, वाओला, कांजू, बन चिल्ला, सिलबिल इत्यादि कई नामों से जाना जाता है। गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस पेड़ को चरेल या चिरोल कहा जाता है। इसके फल बंदरों को काफ़ी पसंद आते हैं।
इस पेड़ की छाल गठिया की चिकित्सा में इस्तेमाल होती है। आंतों के छालों का भी इलाज कई जगह इस पेड़ की छाल से किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को भी इसकी सूखी छाल दी जाती है ताकि प्रसव आसान हो सके। इस पेड़ की पत्तियों का इस्तेमाल त्वचा रोगों के उपचार में किया जाता है। साथ ही, पीलिया के रोगियों को भी इसकी पत्तियाँ दी जाती हैं। अगर किसी को बुखार हो, तब भी इसकी पत्तियाँ माथे पर लेप करने के काम आती हैं।
तमाम औषधीय गुणों से भरपूर है चिलबिल का पेड़। अगर कहीं दिख जाए तो इसके क़रीब जाकर सदियों से मानव जाति के काम आने के लिए चिलबिल को शुक्रिया कह सकते हैं।
जानकारी और तस्वीरें - साभार ‘नंदकिशोर प्रजापति कानवन’