15/09/2023
मथुरा शैली की विशेषताएं
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'मथुरा शैली' की कुछ चारित्रिक विशेषताएं हैं, जो इसे 'गांधार' की समकालीन शैली से भिन्न दर्शाती है,
(1) इस शैली में 'जैन तीर्थंकर', 'बुद्ध', 'बोधिसत्व' तथा कुछ 'ब्राह्मण धर्म के देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का सर्वप्रथम अंकन हुआ।
(2) मथुरा शैली की मूर्तियां 'गोलाई' में निर्मित है।
(3) बुद्ध प्रतिमाओं के शीर्ष 'केशरहित' हैं।
(4) बुद्ध के बाल घुंघराले कदापि नहीं हैं।
(5) 'उर्णा' (भंवों के मध्य केशपुंज) और 'मूंछें' नहीं हैं।
(6) 'बुद्ध' तथा अन्य 'देव मूर्तियों' में उनके अंगों की सुंदरता के स्थान पर मुख पर स्पष्ट 'भाव-भंगिमाओं' का प्रदर्शन हुआ है।
(7) इस शैली में 'यक्ष-यक्षिणी' की प्रतिमाओं का निर्माण विशेषता के साथ हुआ।
(😎 मथुरा की मूर्तियां कुषाण काल में 'हल्के आयतन' और 'मांसल शरीर' के साथ बनाई गई हैं,कंधे 'चौड़े' हैं।
(9) 'संघति' (पोषाक ) एक ही कंधे को ढकती है और उसे खासतौर से 'बाएं हाथ' से ढकते हुए दिखाया गया है, जबकि 'संघति' का स्वतंत्र भाग जो वक्षास्थल को ढके हुए है, शरीर के धड़ तक ही रखा गया है।
(10) बुद्ध 'सिंहासन' पर विराजमान दिखाए गए हैं।
(11) आकृतियों में पूर्व की 'कठोरता' के स्थान पर 'नम्यता' आ गई है, जिसने उन्हें अधिक 'पार्थिव'
रूप दे दिया है।
(12) मथुरा के मूर्तिकारों द्वारा निर्मित 'पुरुष' और 'नारी आकृतियों' में विशिष्ट अंतर दर्शाया गया है।
(13) खड़ी प्रतिमाओं में पैरों के मध्य 'सिंह' अंकित है।
Resourse : Karishma Agrawal History's blog