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खजुराहों के मंदिर चंदेल राजवंश के दौरान बनाए गए थे।
SSC के द्वारा पूछा गया सवाल।

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विक्रम संवत् 57 ई.पू. में आरंभ हुआ था।
विक्रमादित्य के द्वारा इसका प्रारंभ किया गया था।
SSC में पूछा गया सवाल।

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Ayodhya Ram Mandir: कौन थे देवराह बाबा जिनकी राम मंदिर को लेकर 33 साल पहले की भविष्यवाणी हुई सच? जानिए क्या कुछ कहा था
Ayodhya Ram Mandir: कौन थे देवराह बाबा जिनकी राम मंदिर को लेकर 33 साल पहले की भविष्यवाणी हुई सच? जानिए क्या कुछ कहा था
देवरहा बाबा एक महान सिद्ध संत थे। उनके के पास बड़ी-बड़ी हस्तियां और दिग्गज उनसे आशीर्वाद लेने आया करते थे। उन्होंने 33 साल पहले ही राम मंदिर निर्माण को लेकर भविष्यवाणी कर दी थी। आइए जानते हैं कौन थे देवरहा बाबा जिनकी आयु का दावा 500 वर्ष तक का किया जाता है और राम मंदिर को लेकर उन्होंने क्या कुछ कहा था।
Ayodhya Ram Mandir: भारतवर्ष की भूमि में अनेक सिद्ध-संतों और ऋषि -मुनियों ने जन्म लिया। उन्हीं में से एक देवराह बाबा थे जिनके बारे में आज हम आपको सब कुछ विस्तार से बताने जा रहे हैं। देवराह बाबा एक सिद्ध संत, महातपस्वी और योगी थे। यहां तक कि उनकी आयु को लेकर कहा जाता है कि वह लगभग 500 वर्षों तक जीवित रहे थे।

देवराह बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में नदौली ग्राम में हुआ था। उनका जन्म कब हुआ इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज से करीब 33 वर्ष पहले जब एक पत्रकार ने देवराह बाबा से राम मंदिर के निर्माण को लेकर उनसे प्रश्न पूछे तो उन्होंने इसको लेकर क्या कहा आइए जानते हैं।
कौन थे देवराह बाबा
देवराह बाबा एक सिद्ध संत थे जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में हुआ था। कहा जाता है कि वह लगभग 500 वर्षों की आयु तक जीवत रहे थे। उन्होंने अपनी देह को 19 जून 1990 को त्यागा था। उस दिन योगीनि एकादशी दिन मंगलवार था। उन्होंने अपने प्राण वृंदावन में यमुना नदी के तट पर त्यागे थे। देवरहा बाबा ने यमुना और सरयू नदी के तट पर अपना जीवन यापन किया था। वह जमीन से 12 फुट ऊंचे लकड़ी के बने एक मचान पर रहते थे। जो भक्त उनके दर्शन करने आते थे उन्हें वह पैरों से आशीर्वाद उसी मचान से दिया करते थे। उनकी आयु तो अज्ञात है परंतु उनके अनुयायियों का कहना है कि बाबा की आयु करीब 500 वर्ष से पूर्व की अनुमान लगाई जाती है।
बड़ी-बड़ी हस्तियां थी बाबा की भक्त
देवराह बाबा से मिलने लिए बड़े-बड़े राजनेता उनके पास आया करते थे और वह उनको पैरों से ही आशीर्वाद दिया करते थे। इनमें से भारतीय राजनीति के कुछ दिग्गजों का नाम भी शामिल है। इन हस्तियों में जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री समेत मदन मोहन मालवीय आदि का नाम शामिल है। यह लोग देवराह बाबा से आशीर्वाद लेने आया करते थे।

राम मंदिर निर्माण की 33 साल पहले कर दी थी भविष्यवाणी
देवराह बाबा से एक बार पत्रकार ने साक्षात्कार में करीब 33 साल पहले पूछा था कि बाबा क्या राम मंदिर बन जाएगा। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे। तो देवराह बाबा ने इस पर कहा था कि "सुनो, वो रोका नहीं है, कायदे से बन जाएगा, सुना मंदिर बन जाएगा, इसमे कोई संदेह नहीं है"। मंदिर प्रेम से बनेगा यह बात देवराह बाबा ने आज से 33 साल पहले एक पत्रकार को कही थी। जिसका वीडियो भी आज कल सामने देखने को खूब मिल रहा है। देवराह बाबा की यह भविष्यवाणी राम मंदिर को लेकर बिल्कुल सटीक बैठी और अब 22 जनवरी 2024 दिन सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर मे प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है।

ज्ञानगंज के सिद्धाश्रम से तक था संपर्क
देवराह बाबा का जीवन बड़े रहस्यों से भी भरा पड़ा था। माना जाता है कि उनके अंदर इतनी सिद्धियां थी कि वह भविष्य में झांक कर देख सकते थे। उनके बारे में यह भी माना जाता है कि ध्यान योग की प्रबलता के कारण उनका संपर्क हिमालय के ज्ञानगंज के अंदर वर्षों से तपस्या कर रहे ऋषि-मुनियों से भी था। ज्ञानगंज दुनिया की सबसे रहस्यमी जगह है। यहां का रास्ता अभी तक कोई ढूंढ नहीं पाया है। यह जगह कैलाश पर्वत के पास स्थित है जिसके बारे में बताया जाता है कि यहां समय को वश में करने की छमता है। यह ज्ञानगंज बड़ा ही दिव्य स्थान है और यहां हजारों वर्षों से ऋषि-मुनी तप्सया में लीन हैं। कहा जाता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां से सिद्धियां प्राप्त की थी। मान्यता है कि देवराह बाबा ने अपने तप के बल से यहां के ऋषि-मुनियों से भी ध्यान के माधय्म से संपर्क बना कर रखा हुआ था।

देवराह बाबा के मूल मंत्र
देवराब बाबा भगवान राम और कृष्ण के परम भक्त थे। बाबा श्री राम और भगवान कृष्ण को एक ही मानते थे और उन्होंने यह बात इस प्रकार कही थी-

एक लकड़ी ह्रदय को मानो दूसर राम नाम पहिचानो

राम नाम नित उर पे मारो ब्रह्म दिखे संशय न जानो।

देवराह बाब अपने आने वाले भक्तों को भगवान राम के साथ ही साथ कृष्ण जी का मंत्र भी देते थे। वह कहते थे -
ऊं कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणत: क्लेश नाशाय, गोविन्दाय नमो नम:

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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