GSS Jaislan

GSS Jaislan शहीद हनुमान सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जैसलान, लाडनूं, (डीडवाना कुचामन) राजस्थान

"मम्मी मैंने तुमसे हजार बार कहा है- कि चिंटू (आरव) के सामने अपनी ये गंवारी भाषा मत बोला करो।      कल उसका 'इंटरनेशनल स्क...
05/06/2026

"मम्मी मैंने तुमसे हजार बार कहा है- कि चिंटू (आरव) के सामने अपनी ये गंवारी भाषा मत बोला करो।
कल उसका 'इंटरनेशनल स्कूल' में इंटरव्यू है।
अगर उसने वहां जाकर 'कांई है, 'कांई हाल हे' या "जयश्रीकृष्ण""जय श्री राम " बोल दिया न, तो मेरी नाक कट जाएगी।
तुम्हें पता है वहां डोनेशन देकर भी एडमिशन नही मिलता है सिर्फ स्टेटस और क्लास देखी जाती है।"
पवन ने अपनी माँ, *गुणमाला देवी* पर झुंझलाते हुए कहा।
गुणमाला देवी, जो गांव से आई थी और शुद्ध देसी बोली बोलती थी, बेटे की डांट सुनकर चुप हो गईं। उन्होंने अपनी पोटली में से जो लड्डू निकाले थे, उन्हें वापस अंदर रख लिया।
उनका मन था कि पोते को अपने हाथ के बने लड्डू खिलाएं और ढेर सारा आशीर्वाद दें । लेकिन बेटे के 'स्टेटस' के आगे उनकी ममता सहम गई।
पवन और उसकी पत्नी रिया, अपने पांच साल के बेटे आरव (चिंटू) को पिछले एक महीने से तोते की तरह रटा रहे थे।
"से हेलो," "से गुड मॉर्निंग," "माय नेम इज आरव।"

घर का माहौल ऐसा था जैसे कोई मिलिट्री ट्रेनिंग चल रही हो। गुणमाला देवी को सख्त हिदायत थी कि जब तक आरव का इंटरव्यू न हो जाए, वो उससे दूर ही रहें, ताकि उनकी 'देहाती' भाषा का असर बच्चे की 'क्लास' पर न पड़े।

अगले दिन सुबह, पवन, रिया और आरव स्कूल पहुंचे। शहर का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल, जहाँ अमीरों की लंबी कतारें लगी थीं।
हर कोई इंग्लिश में बात कर रहा था।
पवन और रिया नर्वस थे। तभी उनका नंबर आया।
प्रिंसिपल का केबिन बहुत बड़ा था। प्रिंसिपल एक सख्त मिजाज के व्यक्ति माने जाते थे।
उन्होंने आरव से अंग्रेजी में नाम पूछा, रंगों के नाम पूछे। आरव ने रटे-रटाए जवाब दे दिए।
पवन और रिया के चेहरे पर मुस्कान थी। सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा था।
तभी मिस्टर प्रिंसीपल ने अपनी पेन नीचे रखी और आरव की आँखों में देखकर पूछा: "बेटा, जब आपके घर में कोई बड़ा मेहमान आता है या आप अपने दादा-दादी से मिलते हो तो सबसे पहले क्या करते हो ?"

पवन का दिल धक से रह गया। उसने यह तो सिखाया ही नही था। उसने बस "हाय-हैलो" सिखाया था।
आरव चुप हो गया, पवन ने इशारे से उसे 'गुड मॉर्निंग' बोलने को कहा।
लेकिन आरव ने वो नही किया जो पवन ने सिखाया था। आरव अपनी कुर्सी से नीचे उतरा

धीरे-धीरे चलकर प्रिंसिपल मिस्टर डिसूजा के पास गया और झुककर उनके पैर छुए। फिर हाथ जोड़कर बड़ी मासूमियत से बोला, "प्रणाम गुरुजी! "जयश्रीकृष्ण!"

कमरे में सन्नाटा छा गया। पवन को लगा कि अब तो रिजेक्शन पक्का है।
उसे अपनी माँ पर गुस्सा आने लगा- कि जरूर छिपकर उन्होंने ही यह सब सिखाया होगा।
रिया ने अपना माथा पकड़ लिया। लेकिन अगले ही पल कुछ ऐसा हुआ जिसकी पवन ने कल्पना भी नही की थी।
प्रिंसीपल जो अब तक गंभीर थे, जोर से हँस पड़े। उन्होंने आरव को उठाकर गोद में बैठा लिया।

"मिस्टर पवन, प्रिंसिपल ने कहा, "आज सुबह से मैंने पचास बच्चों का इंटरव्यू लिया।"
सब रोबोट की तरह 'हाय', 'हैलो' और 'गुड मॉर्निंग' बोल रहे थे। लेकिन आपके बेटे ने जो किया, वो हमारी संस्कृति है। यह संस्कार किताबों में नही मिलते।"

पवन हक्का-बक्का रह गया।*
प्रिंसीपल ने आगे कहा: *-"आजकल के पढ़े-लिखे मां-बाप अपने बच्चों को अंग्रेज बनाने की होड़ में अपनी जड़ें काट रहे हैं।
बच्चा अंग्रेजी तो स्कूल में सीख ही लेगा, लेकिन बड़ों के पैर छूना, "जयश्रीकृष्ण" कहना, अपनी भाषा पर गर्व करना... यह तो घर से ही मिलता है। कौन सिखाता है इसे यह सब?"

आरव चहकते हुए बोला, "मेरी दादी" वो कहती हैं कि विद्या तो विनय देती है, और सबसे बड़ी पढ़ाई झुकना होता है।"

प्रिंसिपल ने पवन की ओर देखा, "आपकी माँ को मेरा प्रणाम कहिएगा। उनका पोता आज सिर्फ इसलिए सेलेक्ट हुआ है क्योंकि उसके पास एक अलग पहचान है।
भाषा संवाद का जरिया है, शर्म का विषय नही।"

घर लौटते वक्त गाड़ी में सन्नाटा था। पवन को अपने कहे शब्द याद आ रहे थे- "गंवारी भाषा," "नाक कट जाएगी।" आज उसी 'गंवारी' संस्कार ने उसे सबसे बड़े स्कूल में सम्मान दिलाया था।

घर पहुँचते ही पवन सीधा अपनी माँ के पास गया। गुणमाला देवी आंगन में तुलसी के पास बैठी थी। पवन ने बिना कुछ बोले अपनी माँ के चरणों में सिर रख दिया।

"अरे-अरे, क्या हुआ लल्ला? इंटरव्यू खराब हो गया क्या?
मैंने कहा था न, मेरी परछाई मत पड़ने देना उस पर," गुणमाला देवी ने घबराते हुए कहा।

"नही माँ", पवन की आँखों में पश्चाताप के आंसू थे।
"इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ। और वो सिर्फ तुम्हारी वजह से।

मुझे माफ कर दो माँ। मैं भूल गया था कि पेड़ चाहे कितना भी ऊँचा हो जाए, अगर जड़ों से कट गया तो सूख जाएगा।"

पवन ने आरव को पास बुलाया और कहा, "बेटा, दादी को बताओ तुमने स्कूल में क्या किया।"

जब आरव ने बताया, तो गुणमाला देवी ने उसे गले लगा लिया।

उस दिन पवन को समझ आ गया कि सूट-बूट और अंग्रेजी से आप 'मॉडर्न' बन सकते हैं,

लेकिन 'इंसान' आप अपने संस्कारों से ही बनते हैं। उसने महसूस किया कि सच ही कहा जाता है-

अनपढ़ लोगों की वजह से ही हमारी मातृभाषा और संस्कृति बची हुई है, वरना हम जैसे पढ़े-लिखे लोग तो अब "जयश्रीकृष्ण और राम-राम" बोलने में भी शरमाते हैं और उसे पिछड़ापन मानते हैं।
उस शाम "पवन" ने भी घर में घुसते वक्त माँ से "हाय मॉम" नही, बल्कि हाथ जोड़कर "जयश्रीकृष्ण" कहा। गुणमाला देवी की झुर्रियों भरे चेहरे पर जो मुस्कान आई, वो किसी भी डिग्री से ज्यादा कीमती थी।

कहानी का सार

आधुनिक बनना गलत नही है, लेकिन अपनी जड़ों, अपनी भाषा और अपने बुजुर्गो को भूल जाना सबसे बड़ी नासमझी है।

अंग्रेजी एक भाषा है, हुनर है, लेकिन हमारी मातृभाषा और हमारे संस्कार हमारी पहचान हैं। अपनी संस्कृति पर शर्मिंदा न हो, बल्कि गर्व करें।

जय श्री कृष्ण

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19/04/2026

भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!

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14/04/2026

विश्व के सबसे बड़े लिखित संविधान की ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष के रूप में अपना पूरा अस्तित्व लगाकर इस देश की काया में प्राणों का संचार करने वाले सामाजिक समता, न्याय तथा समावेशी विकास के अमर पुरोधा भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।

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08/04/2026

“‘मंगल’ मस्ती में चूर चलल,
बलिया के बांका वीर चलल…”
हिंदुस्तान की स्वतंत्रता-साधना में क्रांतिधरा 'बागी-बलिया' के लाल, अदम्य साहस के प्रतीक, प्रथम स्वातंत्र्य समर के प्रथम हुतात्मा मंगल पांडेय जी को उनकी पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र का कोटि-कोटि नमन। 🇮🇳🙏🏻
GSSS JAISLAN

अपनी छवि ऐसी बनाए की लोग नाम भले भूल जाएं, पर....आपका स्वभाव और स्नेह भूल से भी ना भूल पाएं....
31/03/2026

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24/03/2026

"🎉 बोर्ड परीक्षा 2026 में सफलता प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभावान विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
आपने विद्यालय का नाम रोशन किया है। 📚✨



सरकारी सेवा में 21 वर्ष (14/3/2005) की शानदार और समर्पित सेवा पूरी करने पर हार्दिक बधाई! आपका अटूट समर्पण, मेहनत और ईमान...
14/03/2026

सरकारी सेवा में 21 वर्ष (14/3/2005) की शानदार और समर्पित सेवा पूरी करने पर हार्दिक बधाई! आपका अटूट समर्पण, मेहनत और ईमानदारी दूसरों के लिए प्रेरणा है। इतने लंबे समय तक राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने के लिए आपको साधुवाद ।

भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।



एक बार शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ नदी के किनारे बैठे थे। सुबह का सूरज धीरे-धीरे उग रहा था। हवा शांत थी। सब लोग ध्यान...
16/02/2026

एक बार शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ नदी के किनारे बैठे थे। सुबह का सूरज धीरे-धीरे उग रहा था। हवा शांत थी। सब लोग ध्यान कर रहे थे। लेकिन एक शिष्य के चेहरे पर बेचैनी साफ दिख रही थी।

यह देखकर शंकराचार्य ने धीरे से पूछा :--
“आज तुम्हारा मन बहुत बेचैन है। तुम्हें क्या परेशान कर रहा है?”

शिष्य ने सिर झुकाकर कहा
“स्वामी, जब मैं ध्यान के लिए बैठता हूँ, तो मन रुकता ही नहीं। कभी भक्ति, कभी गुस्सा, कभी इच्छा। कभी पुरानी यादें, कभी भविष्य का डर। मन मेरी सुनता ही नहीं। मैं इस मन को कैसे पकड़ूँ?”

शंकराचार्य थोड़ा मुस्कुराए और बोले
“क्या तुम नदी देख रहे हो?”

शिष्य ने कहा
“हाँ, स्वामी।”

“नदी बह रही है, है ना?”
“हाँ, यह रुकती नहीं।”

“क्या इसका बहाव रोका जा सकता है?”
“यह मुमकिन नहीं है, स्वामी।”

“लेकिन क्या नदी के किनारे खड़े व्यक्ति को याद है?”
“नहीं, स्वामी।”

शंकराचार्य ने धीरे से कहा
“मन एक नदी की तरह है। यह बहता रहता है। विचार इसका पानी हैं। तुम उस पानी को रोकने की कोशिश कर रहे हो। इसीलिए यह मुश्किल है। तुम पानी नहीं हो। तुम किनारा हो।”

शिष्य ने हैरानी से उनकी तरफ देखा। उन्होंने आगे कहा
“मन गुस्सा, इच्छाएं, डर लाता है। उन्हें आने दो। उन्हें जाने दो। उनके गवाह बनो। फिर मन तुम पर अपनी ताकत खो देता है।”

उसी समय, एक बंदर वहां आया। वह पेड़ से पेड़ पर कूद रहा था, एक पल के लिए कूद रहा था। शंकराचार्य ने उसकी तरफ इशारा किया और कहा “क्या तुम यह देख रहे हो?

बंदर एक जगह नहीं रहता। मन और भी बेचैन होता है। अगर तुम इसे बांधने की कोशिश करोगे, तो यह और भी दूर भागेगा।”

शिष्य ने पूछा
“तो मन का क्या किया जाए, स्वामी?”

शंकराचार्य ने ज़मीन पर एक पत्थर उठाया और कहा
“यह पत्थर शांत है। क्योंकि इसमें कोई विचार नहीं हैं। लेकिन यह समझदार नहीं है।

मन अशांत हो जाता है। यह स्वाभाविक है। लेकिन तुम्हें इसका मालिक बनना होगा।”

उन्होंने अपनी आँखें बंद कीं और कहा
“एक पल के लिए अपनी आँखें बंद करो। जो भी विचार तुम्हारे मन में आए, उसे पकड़कर मत रखो। उसे दबाओ मत। बस देखो।”

कुछ पलों बाद, शिष्य ने अपनी आँखें खोलीं। उसके चेहरे पर शांति आ गई।

“स्वामी… विचार आए… लेकिन मैं उनमें नहीं गया। जैसे ही मैंने देखा, वे अपने आप चले गए।”

शंकराचार्य ने कहा
“यही मन का राज़ है।

तुम मन को कंट्रोल करने की कोशिश मत करो।
मन को समझो।”
“मन दुश्मन नहीं है
मन एक टूल है।

जब यह अज्ञान से मिलता है, तो यह बंधन है
जब यह ज्ञान से मिलता है, तो यह मुक्ति है।”

शिष्य ने फिर पूछा
“स्वामी, क्या ऐसा कोई दिन आएगा जब मन पूरी तरह से रुक जाएगा?”

शंकराचार्य ने नदी की ओर देखा और कहा
“जब नदी समुद्र से मिलती है, तो वह बहती नहीं है।
जब मन खुद को जान लेता है, तो वह लहर नहीं बनता।”

“उस दिन
गुस्सा आता है पर टिकता नहीं
इच्छा आती है पर कसती नहीं
डर आता है पर टिकता नहीं”
“वहाँ मन गुलाम बन जाता है
स्वयं राजा बन जाता है।”

शिष्य ने सिर झुकाया। उस दिन उसे मन को जीतने का तरीका मिल गया।पकड़कर नहीं जानकर।

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस शिव के चरण में,बने उस शिव के चरणों की धूल, आओ मिल कर चढ़ाये हम श्रद्धा के फूल।शिव क...
15/02/2026

सारा जहां है जिसकी शरण में, नमन है उस शिव के चरण में,
बने उस शिव के चरणों की धूल, आओ मिल कर चढ़ाये हम श्रद्धा के फूल।

शिव की बनी रहे आप पर छाया, पलट दे जो आपकी किस्मत की काया,
मिले आपको वो सब अपनी जिंदगी में, जो कभी किसी ने भी न पाया।

एक पुष्प, एक बेलपत्र,
एक लोटा जल की धार, कर दे सबका उद्धार।

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

परिस्थितियां नहीं!आपका साहस ही आपको मजबूत बनाता है।     🌟💪👏💫😊👍
12/02/2026

परिस्थितियां नहीं!आपका साहस ही आपको मजबूत बनाता है।
🌟💪👏💫😊👍

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