04/01/2016
गाँवों में गोबर से बन रही बिजली
बायोगैस प्लांट से 24 घंटे चलता है 30 किलोवॉट का जेनरेटर-
बिजनौर (लखनऊ)। अपनी डेयरी में हर महीने बिजली पर आने वाले खर्च से बचने के लिए जय सिंह (45 वर्ष) ने गोबर गैस प्लांट लगाया है, जिससे अब उन्हें 24 घंटे बिजली मिलती है। इस बिजली से वह अपनी डेयरी की सभी मशीनों को चलाते हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 14 किलोमीटर दूर बिजनौर गाँव के पशुपालक जय सिंह दो साल से बायोगैस प्लांट से बिजली बना रहे हैं। जय सिंह बताते हैं, ”यह 140 घन मीटर का गैस प्लांट है, जिसे लगवाने में लगभग 22 लाख का खर्चा आया था। इस प्लांट की मदद से पूरी डेयरी में बिजली का काम असानी से हो जाता है।” जय सिंह का बायो गैस प्लांट प्रदेश का सबसे बड़ा प्लांट है।
जय सिंह के पास लगभग 150 पशु हैं। इन पशुओं से रोज लगभग 1,000 लीटर दूध उत्पादित होता है साथ ही रोज लगभग 1,500 किलो गोबर निकलता है। इस गोबर को वो बिजली बनाने में प्रयोग करते हैं। गोबर गैस प्लांट से प्राप्त गैस से 30 किलोवॉट का जेनरेटर चलाकर जय सिंह 24 घंटे बिजली पैदा करते हैं। ”जब डेयरी की शुरुआत की थी तब काफी गोबर बर्बाद हो जाता था पर इस प्लांट के लगने से जहां हर समय बिजली मिलती है, वहीं अच्छी खाद भी मिल जाती है।” जय सिंह ने कहा।
अपने प्लांट में बनाई गई बिजली से ही जय सिंह पशुओं का दूध दुहने वाली स्वचालित मिल्किंग मशीन, पशुओं के चारा काटने की मशीन और दूध की पैकिंग करने की मशीन को संचालित करते हैं। इतना ही नहीं गोबर से बनी इसी बिजली से उन्होंने गेहूं पीसने की बड़ी सी मशीन भी लगा रखी है, जिसमें पूरे गाँव का आटा पीसा जाता है। इलाके की बत्ती अक्सर गुल हो जाती है, लेकिन जय सिंह का डेयरी फार्म हमेशा रोशन रहता है।