Free education in hindi

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वेद शब्द संस्कृत भाषा के "विद्" धातु और "विद्लृ" धातु से बना है जिसका अर्थ है- जानना, ज्ञान, होना। अर्थात् जिस से हमें ज्ञान का लाभ, सत्य की सत्ता का बोध हो वही वेद है।

04/01/2016

गाँवों में गोबर से बन रही बिजली

बायोगैस प्लांट से 24 घंटे चलता है 30 किलोवॉट का जेनरेटर-
बिजनौर (लखनऊ)। अपनी डेयरी में हर महीने बिजली पर आने वाले खर्च से बचने के लिए जय सिंह (45 वर्ष) ने गोबर गैस प्लांट लगाया है, जिससे अब उन्हें 24 घंटे बिजली मिलती है। इस बिजली से वह अपनी डेयरी की सभी मशीनों को चलाते हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 14 किलोमीटर दूर बिजनौर गाँव के पशुपालक जय सिंह दो साल से बायोगैस प्लांट से बिजली बना रहे हैं। जय सिंह बताते हैं, ”यह 140 घन मीटर का गैस प्लांट है, जिसे लगवाने में लगभग 22 लाख का खर्चा आया था। इस प्लांट की मदद से पूरी डेयरी में बिजली का काम असानी से हो जाता है।” जय सिंह का बायो गैस प्लांट प्रदेश का सबसे बड़ा प्लांट है।

जय सिंह के पास लगभग 150 पशु हैं। इन पशुओं से रोज लगभग 1,000 लीटर दूध उत्पादित होता है साथ ही रोज लगभग 1,500 किलो गोबर निकलता है। इस गोबर को वो बिजली बनाने में प्रयोग करते हैं। गोबर गैस प्लांट से प्राप्त गैस से 30 किलोवॉट का जेनरेटर चलाकर जय सिंह 24 घंटे बिजली पैदा करते हैं। ”जब डेयरी की शुरुआत की थी तब काफी गोबर बर्बाद हो जाता था पर इस प्लांट के लगने से जहां हर समय बिजली मिलती है, वहीं अच्छी खाद भी मिल जाती है।” जय सिंह ने कहा।

अपने प्लांट में बनाई गई बिजली से ही जय सिंह पशुओं का दूध दुहने वाली स्वचालित मिल्किंग मशीन, पशुओं के चारा काटने की मशीन और दूध की पैकिंग करने की मशीन को संचालित करते हैं। इतना ही नहीं गोबर से बनी इसी बिजली से उन्होंने गेहूं पीसने की बड़ी सी मशीन भी लगा रखी है, जिसमें पूरे गाँव का आटा पीसा जाता है। इलाके की बत्ती अक्सर गुल हो जाती है, लेकिन जय सिंह का डेयरी फार्म हमेशा रोशन रहता है।

24/12/2015

“एक प्रचलित कहावत है कि महापुरुष किसी परम्परागत पथ पर नहीं चलते बल्कि वह अपना लक्ष्य और पथ स्वयं तय करते हैं।”

यही पथ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श पथ के रूप में स्थापित हो जाता है। आजकल तो युवा वर्ग विदेश जाने और वहाँ पर काम करने की ख्वाहिश से ही पढ़ाई कर रहा है। आज से करीब 50 वर्ष पूर्व एक युवक ने विपरीत दिशा में यात्रा की, तब वह युवक 29 वर्ष का था और उपलब्धियों भरे 13 वर्ष इंग्लैंड में बिता चुका था। उस समय कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भौतिकशास्त्र के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता था। वहाँ पर इस युवक ने न केवल पढ़ाई की बल्कि कार्य भी करने लगा था। जब अनुसंधान के क्षेत्र में इस युवक के उपलब्धियों भरे वर्ष बीत रहे थे तभी स्वदेश लौटने का अवसर आया। तब इस युवक ने अपने वतन भारत में रहकर ही कार्य करने का निर्णय लिया। उसे सिर्फ अपनी काबिलियत के दम पर प्रतिष्ठा पाने की इच्छा नहीं थी बल्कि उसके मन में अपने देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक क्रांति लाने का जुनून था। यह युवक कोई और नहीं, हमारे देश में परमाणु कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ. होमी जहाँगीर भाभा थे। यह डॉ. भाभा के उत्सर्गिक प्रयासों का ही प्रतिफल है कि आज विश्व के सभी विकसित देश भारत के नाभिकीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा एवं क्षमता का लोहा मानने लगे हैं।
होमी जहांगीर भाभा (30 अक्तूबर, 1909 – 24 जनवरी, 1966)

“एक प्रचलित कहावत है कि महापुरुष किसी परम्परागत पथ पर नहीं चलते बल्कि वह अपना लक्ष्य और पथ स्वयं तय करते हैं।”यही पथ आने...
24/12/2015

“एक प्रचलित कहावत है कि महापुरुष किसी परम्परागत पथ पर नहीं चलते बल्कि वह अपना लक्ष्य और पथ स्वयं तय करते हैं।”

यही पथ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श पथ के रूप में स्थापित हो जाता है। आजकल तो युवा वर्ग विदेश जाने और वहाँ पर काम करने की ख्वाहिश से ही पढ़ाई कर रहा है। आज से करीब 50 वर्ष पूर्व एक युवक ने विपरीत दिशा में यात्रा की, तब वह युवक 29 वर्ष का था और उपलब्धियों भरे 13 वर्ष इंग्लैंड में बिता चुका था। उस समय कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय भौतिकशास्त्र के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ स्थान माना जाता था। वहाँ पर इस युवक ने न केवल पढ़ाई की बल्कि कार्य भी करने लगा था। जब अनुसंधान के क्षेत्र में इस युवक के उपलब्धियों भरे वर्ष बीत रहे थे तभी स्वदेश लौटने का अवसर आया। तब इस युवक ने अपने वतन भारत में रहकर ही कार्य करने का निर्णय लिया। उसे सिर्फ अपनी काबिलियत के दम पर प्रतिष्ठा पाने की इच्छा नहीं थी बल्कि उसके मन में अपने देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक क्रांति लाने का जुनून था। यह युवक कोई और नहीं, हमारे देश में परमाणु कार्यक्रम के सूत्रधार डॉ. होमी जहाँगीर भाभा थे। यह डॉ. भाभा के उत्सर्गिक प्रयासों का ही प्रतिफल है कि आज विश्व के सभी विकसित देश भारत के नाभिकीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा एवं क्षमता का लोहा मानने लगे हैं।
होमी जहांगीर भाभा (30 अक्तूबर, 1909 – 24 जनवरी, 1966)

18/12/2015

हजारों वर्ष पुरानी यह श्रुति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी इसे रचित करते समय थी। सृष्टि की उत्पत्ति आज भी एक रहस्य है। सृष्टि के पहले क्या था ? इसकी रचना किसने, कब और क्यों की ? ऐसा क्या हुआ जिससे इस सृष्टि का निर्माण हुआ ?

अनेकों अनसुलझे प्रश्न है जिनका एक निश्चित उत्तर किसी के पास नहीं है। कुछ सिद्धांत है जो कुछ प्रश्नों का उत्तर देते है और कुछ नये प्रश्न खड़े करते है। सभी प्रश्नों के उत्तर देने वाला सिद्धांत अभी तक सामने नहीं आया है।

18/12/2015

सृष्टि से पहले सत नहीं था, असत भी नहीं
अंतरिक्ष भी नहीं, आकाश भी नहीं था
छिपा था क्या कहाँ, किसने देखा था
उस पल तो अगम, अटल जल भी कहाँ था
ऋग्वेद(10:129) से सृष्टि सृजन की यह श्रुती

16/12/2015

મોટા સંગ મોટા મળે તો કર શોખની વાત

ખોટા સંગ ખોટા મળે તોડાવે પોતાના દાંત

05/04/2015

बिजली के क्षेत्र में अनुसंधान की व्यापक संभावनायें हैं। हम आज भी लगभग उसी आधारभूत तरीके से बिजली उत्पादन व वितरण कर रहे हैं जिस तरीके से सौ बरस पहले कर रहे थे। दुनिया की सरकारों को चाहिये कि बिजली के क्षेत्र में अन्वेषण का बजट बढ़ायें। वैकल्पिक स्त्रोतों से बिजली का उत्पादन, बिना तार के बिजली का तरंगो के माध्यम से वितरण, बिजली को व्यवसायिक तौर पर एकत्रित करने के संसाधनो का विकास, कम बिजली के उपयोग से अधिक क्षमता की मशीनो का संचालन, अनुपयोग की स्थिति में विद्युत उपकरणों का स्व-संचालन से बंद हो जाना, दिन में बल्ब इत्यादि प्रकाश स्त्रोतों का स्वतः बंद हो जाना आदि बहुत से अनछुऐ बिन्दु हैं जिन पर ध्यान दिया जाये तो बहुत कुछ नया किया जा सकता है तथा वर्तमान संसाधनों को सस्ता व अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है। हर घर में शौचालय होता है, जो बायो गैस का उत्पादक संयत्र बनाया जा सकता है, जिससे घर की उर्जा व प्रकाश की जरूरत को पूरी की जा सकती है. कुछ युवा छात्रों ने रसोई के अपशिष्ट से भी बायोगैस के जरिये चूल्हा जलाने के प्रयोग किये हैं। कुछ लोगो ने व्यक्तिगत स्तर पर तो कुछ संस्थाओ ने अभिनव प्रयोग बिजली को लेकर किये भी हैं, जरूरत है कि इस दिशा में व्यापक कार्य हो।

एक अमीर आदमी अपने बेटे को लेकर गाँवगया ये दिखाने किwhatis गरीबी:::गाँव की गरीबी दिखाने के बाद बेटे से पूछा"देखा गरीबी ":...
15/03/2015

एक अमीर आदमी अपने बेटे को लेकर गाँव
गया ये दिखाने कि
what
is गरीबी
:
:
:
गाँव की गरीबी दिखाने के बाद बेटे से पूछा
"देखा गरीबी "
:
:
:
बेटे ने जवाब दिया :हमारे पास 1 dog ...........
उनके पास 10- 10 गाये है
हमारे पास नहाने का छोटा सा जगह है ..
उनके पास. तालाब है
हमारे पास बिजली है....
उनके पास सितारे...
हमारे पास हवा मे' small piece of land.......
उनके पास बडे बडे खेत......
हम खाना डिबे का बासी खाते है....
वो उगा कर और ताजा तोडकर खाते है.
उनके पास अपने सच्चे मित्र है......
बस कंप्यूटर ही हमारा मित्र है
हमारे पास खुशियाँ खरीदने को पैसा है......
उनके पास खुशियाँ है पैसे की जरुरत ही नही
उनके पापा के पास बेटे के लिऐ समय है....
पापा आपके पास समय ...... नही है।
:
:
:
पापा एकदम चुप....
बेटे ने कहाँ ''Thanks पापा for showing me
कि हम कितने गरीब
है ।

01/03/2015

अपने विचारों पर ध्यान दो, वे शब्द बन जाते हैं।
अपने शब्दों पर ध्यान दो, वे क्रिया बन जाते हैं।
अपनी क्रियाओं पर ध्यान दो, वे आदत बन जाती हैं।
अपनी आदतों पर ध्यान दो, वे तुम्हारा चरित्र बनाती हैं।
अपने चरित्र पर ध्यान दो, वह तुम्हारी नियति का निर्माण करता है।

एक बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को ले कर चर्चा चल रही थी।एक भारतीय प्रवक्ता बोलने के लिए खड़ा हुआ। अपना पक्ष रखने से पह...
29/01/2015

एक बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को ले कर चर्चा चल रही थी।

एक भारतीय प्रवक्ता बोलने के लिए खड़ा हुआ। अपना पक्ष रखने से पहले उसने ऋषि कश्यप की एक बहुत पुरानी कहानी सुनाने की अनुमति माँगी। अनुमति मिलने के बाद भारतीय प्रवक्ता ने अपनी बात शुरू की...

"एक बार महर्षि कश्यप, जिनके नाम पर आज कश्मीर का नाम पड़ा है, घूमते-घूमते कश्मीर पहुंच गए।

वहाँ उन्होंने एक सुन्दर झील देखी तो उस झील में उनका नहाने का मन हुआ।

उन्होंने अपने कपड़े उतारे और झील में नहाने चले गए।

जब वो नहा कर बाहर निकले, तो उनके कपड़े वहाँ से गायब मिले।

दरअसल, उनके कपड़े किसी पाकिस्तानी ने चुरा लिये थे..."

इतने में पाकिस्तानी प्रवक्ता चीख पड़ा और बोला:
"क्या बकवास कर रहे हो? उस समय तो 'पाकिस्तान' था ही नहीं!!!"

भारतीय प्रवक्ता मुस्कुराया और बोला:
"अब सब कुछ साफ़ हो चुका है। अब मैं अपना भाषण शुरू करना चाहता हूँ।"

मेरा भाषण है... "और ये पाकिस्तानी कहते हैं कि कश्मीर इनका है!!!" 🇮🇳🇮🇳

इतना सुनते ही... पूरा संयुक्त राष्ट्र सभा ठहाकों की गूंज से भर उठा।।

एक हिन्दुस्तानी होने के नाते यह वाकया मुझे बहुत पसंद आया।

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