28/04/2026
*कुरुक्षेत्र में राज्य स्तरीय कथक प्रतियोगिता: काम्या गुप्ता ने लहराया परचम*
सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत एवं नृत्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आज कुरुक्षेत्र में एक भव्य *'राज्य स्तरीय कथक प्रतियोगिता'* का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता ने प्रदेश भर के उभरते नर्तकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।
प्रतियोगिता में प्रदेश भर के करीब 50 प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजन को आयु वर्ग के आधार पर तीन श्रेणियों—6 से 8 वर्ष, 9 से 12 वर्ष और 13 से 17 वर्ष—में विभाजित किया गया था। तीनों श्रेणियों में करीब 50 प्रतिभागियों ने मंच पर अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण द्वितीय श्रेणी (9 से 12 वर्ष) रही, जिसमें कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस श्रेणी में कुल 26 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। *सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र की मेधावी छात्रा काम्या गुप्ता* ने अपनी लयबद्ध प्रस्तुति और उत्कृष्ट कथक कौशल के दम पर सबको पीछे छोड़ते हुए *प्रथम स्थान हासिल किया।*
कार्यक्रम में वशिष्ट् अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. विवेक चावला (निदेशक, यूथ वेलफेयर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) ने विजेता प्रतिभागियों को 1100-1100 रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया।
प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा हेतु प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल मौजूद रहा, जिसमें शामिल थे:श्री आशीष सिंह: प्रसिद्ध कथक एक्सपोनेंट, वृंदावन।श्री ज्ञान सागर सिंह: सहायक प्रोफेसर,(तबला) संगीत एवं नृत्य विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय।सुश्री मृत्तिका धर: ओडिसी एक्सपोनेंट एवं ICCR Artist (PhD scholar) संगीत एवं नृत्य विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय।
काम्या की इस शानदार उपलब्धि पर सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके माता-पिता को बधाई दी है। संस्थान ने काम्या की अध्यापिका एवं सहायक प्रोफेसर music and Dance Department डॉ. पूजा चौधरी के प्रति विशेष आभार प्रकट किया, जिनके कुशल निर्देशन और निरंतर प्रशिक्षण ने काम्या को इस सफलता के शिखर तक पहुँचाया है। इस कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती सपना के कथक नृत्य (डा.पूजा )के निर्देशन में हुआ!! इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन न केवल युवाओं को शास्त्रीय कलाओं के प्रति प्रेरित करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जड़ों को भी मजबूती प्रदान करते हैं। सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन भविष्य में भी करता रहे