16/10/2024
नमन
आप हैं हमारे माताश्री विमला कंवर देवल आयु 55 साल रोगों का अजायबघर ,,20 साल से गठिया है,5 साल से दमा,थाइराइड की प्रोब्लम,डाइबिटीज,हाई ब्लड प्रेशर आदि लेकिन लालची एक नंबर के एक एक पैसे का हिसाब देखते हैं ,,हमारे घर के प्रधानमंत्री वित्तमंत्री सब यही हैं या यूं कहें पापा मैं मेरी पत्नि कर्मचारी और आप परिवार के मुखिया। हां मेरे दोनों बच्चे रुद्रप्रताप और बटुकेश्वर की जरूर इन पर अपनी हुकुमत चला लेते हैं ,,,आप मुझे तब इसलिये पीटते थे कि मैं साथ वाले बच्चों पीट देता था या पैसा आदि चुरा लेता था।आज इसलिये पीट देते हैं कि मैं कभी कभी रुद्र व बटुक की ठुकाई कर देता हूं ,,उनकी मम्मी से लङ लेता हूं या कोई पदार्थ विशेष का सेवन करते पकड़ा जाता हूं।गालियों का सिलसिला भी तब से अबतक लगातार जारी है,,,,पिछले दिनों आपनें सर्दियों में मंगोङी बनाई दिन भर हाथ पानी में रखा ,,हाथ की दो अंगुलियों में खून की सप्लाई बंद यानि गेंग्रीन वस्कूलर सर्जन की दवा और चालू ही ।उधर गठिया की दवा इधर गेंग्रीन की दवा ,दोनों खून खो पतला करती हैं दुर्भाग्य से पेट और आंतों में अल्सर हो गया खून सारा निकल गया 10 दिन हॉस्पिटल में भर्ति रहे,,,,घर आये पहला सवाल पैसा कितना लगा ? मैनें कहा मामोसा के नगर निगम चेयरमैनी के प्रभाव से मुफ्त में इलाज हुआ है ,लेकिन दो ही दिन बाद डिस्चार्ज लेटर में डेढ लाख रुपये देख कर उच्च रक्तचाप फिर से ,,,,,, क्या कहूं हर समय डर रहता है इन दिनों ,,,मां भगवती मेरी मां को शीघ्र ठीक करे।
ऐसी ही मन:स्थिति में एक छंद मां के लिए
छतां मायतां रै छै ,मोकली मौजां माणस।
बिना मायतां बोदो ,छै जमारो छाणस।
लेलै मिलै जठां तक गाल री आशीष गैला।
आं बिना रै आपणीं,खोट री पण कुण खैला।
ओल्यूं छोडसी दिवस एक ,रह जासी बस रोवणों।
लावौ मिल्यो ले लूट अवस, खोट करत नहीं खोवणों।।
गजेन्द्र सिंह कविया