25/01/2025
मेरे सम्मान को आप सभी के योगदान ने दुगुनी ऊँचाई प्रदान की है ।
आप सभी मीडिया का आभार
Auth LC of Sikkim Manipal University, Gangtok. Auth SC of Vardhman Mahaveer Open University, Kota.
25/01/2025
मेरे सम्मान को आप सभी के योगदान ने दुगुनी ऊँचाई प्रदान की है ।
आप सभी मीडिया का आभार
17/02/2024
–माता-पिता की वैवाहिक वर्षगांठ पर पुत्र ने डोनेट की एसडीपी
- टीम जीवनदाता के अथक प्रयास से अनजान को मिला सहारा
कोटा.
टीम जीवन दाता का जरूरतमंद के लिए सेवा का अभियान निरंतर जारी है। इसी के चलते एसडीपी और रक्त की आवश्यकता होने पर शीघ्र ही जरूरतमंद को उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में भर्ती 75 वर्षीय मरीज चंद्रकला की तबीयत बेहद खराब थी, परिजन ग्रामीण क्षेत्र के थे, इसलिए कुछ समझ नहीं पा रहे थे। चिकित्सकों ने ए पॉजिटिव एसडीपी के लिए कहा तो वह भटकते रहे। परेशानी भापते हुवे अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने टीम जीवनदाता से संपर्क करने के लिए कहा। उसके बाद भी वह अनजान व बेसुध से ही थे। टीम जीवनदाता के संयोजक और लायंस क्लब ब्लड डिस्ट्रिक्ट चैयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि मरीज के परिजनों को तत्काल संपर्क कर अपना ब्लड सेंटर तलवंडी लाया गया और एसडीपी की पूरी प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। उसके बाद मैसेज डाला, डोनर की तलाश प्रारंभ की गई। मैसेज को देखकर गीतेश सिंह सिसौदिया सक्रिय हो गए। उनके माता-पिता की वैवाहिक वर्षगांठ थी, और अनूठे ढंग से सेलिब्रेट करने की इच्छा थी। ये अवसर उनके लिए वरदान था, जिसको वो गवाना नहीं चाहते थे और उन्होंने तुरंत ये नेक काम करते हुए माता पिता की वैवाहिक वर्षगांठ पर एस डीपी डोनेट कर अनजान की मदद की। गीतेश के फूफाजी इंद्र सिंह नाथावत भी लंबे समय से एसडीपी व रक्तदान से जुड़े हुए हैं और लोगों की परेशानी को भली भांति समझते हैं। उन्होंने गीतेश को जानकारी दी और ब्लड बैंक जाने के लिए प्रेरित किया। गीतेश ने 27वीं बार एसडीपी डोनेट की है और वह लंबे समय से इस क्षेत्र में लोगों की मदद करते चले आ रहे हैं।
भुवनेश गुप्ता बताते है कि इस अवसर पर अपना ब्लड सेंटर में धूमधाम के साथ वैवाहिक वर्षगांठ को सेलिब्रेट किया गया, केक काटा गया, मिठाई खिलाई गई और एसडीपी डोनेट की गई।
ये नजारा परिजन के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा और उन्होंने रक्तदान करने का संकल्प लिया।
06/01/2024
।। *नेक हृदय की कहानी : अवश्य पढ़े* ।।
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*1 साल के मासूम की समय पर सर्जरी हो, इसलिए हाडकंप सर्दी में एसडीपी करने पहुंचे अतुल विजय*
- बच्चों की इमरजेंसी जन्मजात बीमारी का होना था ऑपरेशन ।
कोटा.
शहर में रिकॉर्ड गलन पड़ रही इस सर्द में भी मदद का करवा नही थम रहा। रक्तदान के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाएं पूरी शिद्दत से रोगियों की मदद में जुटी हुई है।
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*डीसीएम की ड्यूटी से आकर देर रात मानवता की ड्यूटी की*
टीम जीवन दाता द्वारा कड़ाके की सर्दी में भी लोगों की मदद की। एक साल के एक मासूम की हार्ट सर्जरी के लिए कड़ाके की सर्दी में डीसीएम में कार्यरत अतुल विजय ने मानवता का धर्म निभाते हुए रात 3:00 बजे एसडीपी डोनेट की है। जहां लोग कड़ाके की सर्दी में घरों में दुबके बैठे थे वहां अतुल विजय ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय धर्म निभाते हुए एसडीपी डोनेट की है।
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*मासूम का जीवन बचाने दौड़े अतुल*
टीम जीवनदाता के संयोजक व संरक्षक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि मुरली नामक बालक की सर्जरी होनी थी, उसके पिता महेंद्र काफी परेशान हो रहे थे, लेकिन उन्हें पहले हिम्मत बंधाई गई और उसके बाद एसडीपी की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया और हमेशा की तरह कॉल किए, मैसेज किए। ऐसे में अतुल विजय डीसीएम में अपने कार्य से रात 12 बजे फ्री हुए ही थे कि तत्काल मैसेज देखा और एसडीपी डोनेशन के लिए अपना ब्लड सेंटर तलवंडी पहुंचे। उन्होंने 21वीं बार ओ पॉजिटिव एसडीपी डोनेट की है, जबकि वह 34 बार ब्लड डोनेशन कर चुके हैं और एक बार कोविड के दौरान प्लाज्मा भी डोनेशन कर चुके हैं।
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*मौसम कभी नहीं है मदद में बाधक*
अतुल विजय का कहना है कि ऐसी कडाके की सर्दी में यदि कॉल आया है तो स्थिति गंभीर ही होगी और ऐसी परिस्थितियों में लोगों की मदद को आगे आना चाहिए। यह हम सभी का धर्म और कर्म है। रात को इमरजेंसी की ये सेवाए निश्चित ही मानवता की पराकाष्ठा को अभिव्यक्त करती है।
*रात को ज्यादा सक्रिय रहकर करेंगे सेवा*
गुप्ता ने कहा कि उनकी हेल्पलाइन 9414000800 चौबीसों घंटे मदद के लिए तैयार है और रात की व्यवस्था में ज्यादा मुस्तैद है, सो शहरवासी रक्त संबंधित परेशानी के लिए निःसंकोच कॉल कर मदद ले सकते है।
08/11/2023
। *रक्त प्रेरक कहानी : अवश्य पढ़े* ।
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*प्रेरणा पुंज भुवनेश गुप्ता ने 66वीं बार डोनेट की एसडीपी, अनजान बहिन के बचाए प्राण।*
*कुल 171 वा डोनेशन पूर्ण कर युवाओं के बने है प्रेरणास्रोत।*
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कोटा। प्रेरणापुंज के रूप में 28 सालों से मानव सेवा कर रहे टीम जीवन दाता के संरक्षक व संयोजक भुवनेश गुप्ता ने एक अनजान बेटी के लिए देर रात बी पॉजिटिव एसडीपी डोनेट की है। *भुवनेश गुप्ता ने 66वीं बार एसडीपी डोनेट की है, जबकि वह 105 बार ब्लड डोनेशन कर चुके हैं। इस तरह कुल 171 बार डोनेशन करके भुवनेश युवाओं के लिए प्रेरणा पुंज बने है।*
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*टीम जीवनदाता के सहसंयोजक वर्द्धमान जैन* ने बताया कि एक पुलिसकर्मी के दो बच्चे तनिष्क और वंशिका डेंगू से अस्पताल में भर्ती हैं जिसमें बेटी को बी पॉजिटिव एसडीपी की आवश्यकता थी, मरीज की प्लेटलेट काउंट 10000 रह गई थी। ऐसे में चिकित्सको ने एसडीपी शीघ्र लाने के लिए कहा, परिजन परेशान हुए ऐसे में वह *अपना ब्लड सेंटर तलवंडी* पहुंचे जहां भुवनेश गुप्ता ने पहले तो कई लोगों को कॉल कर डोनर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया लेकिन जब व्यवस्था नहीं हुई तो स्वयं ने एसडीपी डोनेट कर एक अनजान बेटी से अपना मानवता का धर्म निभाया।
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भुवनेश गुप्ता ने कहा कि डेंगू का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है लेकिन फिर भी मरीज आ रहे हैं और परिजन बहुत परेशान हो रहे है। प्लेटलेट्स कम होने पर एसडीपी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा कि कॉलेज टाइम से ही वह रक्तदान के क्षेत्र में लोगों की सेवा करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि _यह सेवा अनवरत इस जीवन में जारी रहेगी। लोगों को भी इस क्षेत्र में आगे आकर एक ईश्वरीय कार्य में मदद करनी चाहिए। गुप्ता अभी तक हजारों लोगों को इस सेवा कार्य से जोड़ चुके हैं और उनके अथक प्रयासों से लाखो के जीवन बचाएं जा सके हैं।_
युवाओं की एक बड़ी टीम उनके नेतृत्व में काम कर रही है जिससे 24 घंटे जरूरतमंद की मदद की जा रही है
पूरे देश में इसी नेटवर्क के माध्यम से गुप्ता लोगो को जरूरत पर रक्त उपलब्ध करवाकर यथासंभव मदद करते रहते है । उल्लेखनीय है कि *वे गत 28 वर्षो से निरंतर इस सेवाकार्य को कर रहे है।*
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*इस सफर में ये रहे हमसफर*
भुवनेश गुप्ता के पुत्र नमन गुप्ता, मित्र नवीन चौहान, टीम जीवनदाता के समर्पित साथी मनीष माहेश्वरी, रोगी के पिता कृष्ण मुरारी, एल आई सी के विकास अधिकारी श्रवन बिश्नोई , सुनील, सोनू, रामप्रसाद, अरविंद, रवि और विनीत ने पहुंचकर उत्साहवर्धन किया।
12/07/2023
जीवंतपर्यंत की सेवा, जाने के बाद रोशन करेंगे ब्रजेश विज दो जिंदगी।
- परिवार में पहली बार हुआ नेत्रदानl
कोटा.सेवा का भाव हो, मन में मानव व समाज के लिए कुछ करने की चाहत हो तो जीवित रहते हुए और जाने के बाद भी सेवा का कार्य करते हुए कई लोग अपने पीछे प्रेरणा के बीज छोड जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया जब महावीर नगर तृतीय निवासी ब्रजेश विज के निधन पर उनकी इच्छा के अनुसार परिवारजन ने उनका नेत्रदान करवाया और परिवार में कई लोगों को वे जाने के बाद सेवा की सीख भी दे गए।
टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब डिस्ट्रिक ब्लड चैयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि ब्रजेश विज सेवाभावी थे और हमेशा प्रातःकाल नियमित रूप से मथुराधीशजी के दर्शन कर सेवा कार्य कर अपने काम से निकलते थे, उन्होंने संकल्प लिया था कि वह नेत्रदान करेंगे और उनकी इसी इच्छा को बुधवार को परिवार ने पूरा किया।
गुप्ता ने बताया कि इसमें शाइन इंडिया फाउंडेशन और लायंस क्लब कोटा टेक्नो का सहयोग रहा। आई बैंक के टेक्नीशियन टिंकू ओझा ने नेत्रदान प्रक्रिया को सम्पन्न करवाया और नेत्र संकलित किए। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि ब्रजेश विज के सीने में दर्द उठा और उन्हें अस्पताल लेकर गए तो वह वहीं अचेत हो गए और उनकी मृत्यु हो गई, ऐस९ में उनके भांजे अभिनव मंग्गु ने गुप्ता को फोन किया और नेत्रदान करवाने हेतु अनुरोध किया। उसके बाद नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन्न हुई। परिजनों का कहना है कि उनकी सीख हमेशा याद रहेगी और उनके जाने के बाद हम सभी नेत्रदान का संकल्प लेंगे।
परिवार में उनकी दो बहिनें रंजना विज और अंजना विज मौजूद है जिसमे अंजना के बड़े पुत्र जयपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर है और छोटा अभिनव कोटा एलेन इंस्टीट्यूट में फैकल्टी है। परिवार के सभी लोगो ने नेत्रदान की प्रक्रिया को बहुत बारीकी से देखा और इनके इतने सहज होने पर स्वम मोटिवेट हुवे।
07/07/2023
पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए नमन गुप्ता ने की एसडीपी डोनेट
- घर परिवार से मिले सेवा कार्य, सेवा से ही जीवन में मिल रही सफलता
कोटा.
सेवा और संस्कार के कार्य सर्वप्रथम अपने घर परिवार से ही मिलते हैं और वही संस्कार जीवन में आगे बढ़ते हुए मंजिल तक ले जाने में अपनी सार्थक भूमिका निभाते हैं। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब डिस्ट्रीक्ट के ब्लड डोनेशन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता द्वारा सालों से निरंतर सेवा कार्य किए जा रहे हैं और लोगों को एसडीपी व रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है वहीं शिक्षा और संस्कार उनके पुत्र नमन गुप्ता में भी देखने को मिल रहे हैं। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने दूसरी बार एसडीपी डोनेट की है। नमन गुप्ता का हाल ही में बारहवीं क्लास के तुरंत उपरांत नीट एग्जाम क्रेक किया है। और मेडिकल में सलेक्शन के पीछे भी वह इस सेवा कार्य की ही दुआएं मानते हैं। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि भारत विकास परिषद अस्पताल में भर्ती मरीज हरिओम सिंह ( 75 ) को बी पॉजिटिव एसडीपी की आवश्यकता थी। उनके पुत्र जितेंद्र सिंह काफी समय से परेशान घूम रहे थे। उसके बाद भुवनेश गुप्ता को कॉल किया तो गुप्ता ने एसडीपी के लिए हमेशा की तरह मैसेज करना शुरू ही कर रहे थे कि इतने में उनके पुत्र नमन ने देखा और एसडीपी डोनेशन की इच्छा जाहिर की । उसने कहा कि मेरा नीट प्रथम प्रयास में ही क्लीयर हो गया है, ये दुवाओ का प्रतिफल है। अब मेरी इच्छा है कि मैं भी इस काम को निरंतर गति देते हुए आगे बढाउ। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मेडिकल कॉलेज में भी एक टीम बनाकर एसडीपी और ब्लड डोनेशन के लिए काम किया जाएगा। नमन गुप्ता अपने पिता के साथ अपना ब्लड सेंटर तलवंडी पहुंचे और मरीज के लिए एसडीपी डोनेशन किया। ये एसडीपी डोनेशन दूसरी बार था। इस अवसर पर नमन गुप्ता का कहना है कि उन्हें यह सेवा के संस्कार परिवार से ही मिले हैं। बचपन से ही घर में एसडीपी और ब्लड डोनेशन को लेकर चर्चा आम बात है। ऐसे में इस सेवा कार्य की वजह से ही आगे निरंतर उपलब्धियां हासिल हो रही है, उसी को देखते हुए ईश्वरीय कार्य मानते हुए इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी बार एसडीपी पर उनकी मां डॉ क्षिप्रा गुप्ता, दादी शकुंतला गुप्ता ने भी आशीर्वाद स्वरुप आगे इसी तरह निरंतर कार्य करने की बात कही।
21/06/2023
मेहनत इतनी खामोशी से करो, की सफलता शोर मचा दे...."
– श्रम साधना संस्कार और सेवा ने रची नमन की सफलता की कहानी, प्रबल भाग्य ने किया पूरे समाज को गौरवान्वित।
मोदी पब्लिक स्कूल के छात्र महावीर नगर द्वितीय कोटा निवासी नमन गुप्ता ने बारहवीं के साथ ही मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए आयोजित नीट परीक्षा प्रथम प्रयास में पास कर अपना स्थान सुरक्षित किया है।
दादा स्वर्गीय श्री प्रेमचंद गुप्ता [बड़ौदा] और दादाजी श्रीमती शकुंतला गुप्ता [तुलसा] के जीवन की संघर्ष कहानी से मोटिवेट होकर नमन ने डॉक्टर बनने का संकल्प लिया। माता क्षिप्रा गुप्ता बताती है कि नमन ने सेवा ,भौतिक सुखों का त्याग और सोशल मीडिया से दूर रहकर ही ये सफलता अर्जित की है। पिता शहर के प्रतिष्ठित समाजसेवी है, सो आमजन की सेवा करने का जज़्बा शुरू से ही था। पिता श्री भुवनेश गुप्ता का मानना है कि सामाजिक– पारिवारिक संस्कार , मानव सेवा के मनोभाव और लक्ष्य पूर्ति में एकनिष्ठता ही सफलता की कुंजी है। एक लंबे समय से विभिन्न पारिवारिक गतिविधियों से दूर रहकर नमन ने नीट परीक्षा को ही फोकस किया। नमन आगे न्यूरो सर्जन बनकर मरीजों की सेवा करना चाहता है। पूरे बड़ौदा तुलसा परिवार व वैश्य समाज–पोरवाल समाज में खुशी का माहौल है।
आप सबके आशीर्वाद शुभकामनाओं और जुड़ाव का प्रतिफल है, हम आपके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते है।
भविष्य में यही स्नेह और आत्मीय जुड़ाव बनाए रखे।
आत्मीय आभार।
शकुंतला गुप्ता [दादी], क्षिप्रा गुप्ता–भुवनेश गुप्ता [पापा मम्मी] , भव्या और समस्त परिवार।
मोबाइल : 9414000800
18/06/2023
नियमित रक्तदान के संकल्प के साथ रक्त उत्सव का समापन
- कोचिंग स्टूडेंटों ने रक्तदान के क्षेत्र में कार्य करने का दिलाया विश्वास
कोटा.
मां भारती जन कल्याण चेरीटेबल ट्रस्ट, टीम जीवनदाता, अपना ब्लड सेंटर व जेसीआई चम्बल के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय विश्व रक्तदाता दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों का समापन गुरूवार को हुआ। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि इन चार दिनों तक रक्तदान शिविर, मोटिवेशन कैंप, प्रश्नोत्तरी, हस्ताक्षर अभियान, पम्पलेट वितरण, सोशल मीडिया पर जागरुकता संदेश सहित कई तरह के आयोजन किए गए। समापन कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मां भारती जन कल्याण ट्रस्ट की चेयरपर्सन पुष्पांजलि विजय थी। विशिष्ट अतिथि मोदी लॉ कॉलेज की प्रिंसीपल डॉ. क्षिप्रा गुप्ता व शकुंतला गुप्ता रहीं। मुख्य अतिथि पुष्पांजलि विजय ने कहा कि महिलाओं में भी अब रक्तदान को लेकन भ्रांतियां दूर हुई हैं। कोटा शहर में आज सैकडों महिलाएं हैं जो रक्तदान कर रही हैं। डॉ. क्षिप्रा गुप्ता ने कहा कि कोटा अब रक्तदान के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाता जा रहा है। हमे भी इस कार्य में भागीदारी निभानी चाहिए। भुवनेश गुप्ता ने बताया कि समापन अवसर पर 23 लोगों ने रक्तदान किया। इन चार दिनों तक कोचिंग स्टूडेंटों ने हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से अपने मन की बात लिखी और आने वाले समय में रक्तदान का संकल्प लिया। इस अभियान में दौ से अधिक विद्यार्थियो ने रक्तदान करने के पूर्व और करने के पश्चात होने वाले अनुभव शेयर किए। प्रश्नोत्तरी में विजेताओं को नवाजा गया वहीं नियमित रक्तदाता वर्धमान जैन, अंकित पोरवाल, मनीष माहेश्वरी, रजनीश खंडेलवाल, अतुल विजय, डॉ. घनश्याम राठी, रश्मि राठी, नितिन मेहता का सम्मान किया गया। ये सभी लोग नियमित रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। इस अवसर पर विनीत वार्ष्णेय, सुनील मेहता, राम प्रसाद, रवि मीणा, महावीर सहित ग्यारह रक्तप्रेरकों का विशेष सम्मान किया गया। इस दौरान आयोजन में अधिकतम कोचिंग विधार्थी उपस्थित रहकर रक्तदान से जुड़ी लाभदायक बातो को समझा और भांतियो का उन्मूलन किया।
07/06/2023
डॉ. कुलवंत गौड ने 45वें जन्मदिवस पर 45वीं बार किया रक्तदान
- टीम जीवनदाता व शाइन इंडिया की मनुहार पर 18 लोग आए आगे।
कोटा.
"जन्मदिन हो या त्यौहार, रक्तदान करके दें उपहार"।की सोच के साथ कोटा में युवाओं की टीम निरंतर सेवा करती चली आ रही है. नेत्रदान के क्षेत्र में हाडौती संभाग में नेत्रज्योति का उजियारा कर रहे शाइन इंडिया फाउंडेन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड ने अपने 45वीं जन्मदिवस के उपलक्ष्य में 45वीं बार रक्तदान किया। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि डॉ. कुलवंत गौड को सुबह जन्मदिवस की बधाई देने के साथ ही रक्तदान के लिए मनुहार की तो वह सहज तैयार हो गए और वह अपने साथियों के साथ तलवंडी स्थित अपना ब्लड सेंटर पहुंचे और रक्तदान किया। उनके साथ जोधपुर से आई संगीता सिंहा, एमपी के उत्कर्ष मिश्रा, कृष्णा दुबे, करण योगी, चेतन गुप्ता, कुलदीप सैनी, राम प्रसाद, सिमरजीत, सुधांशु, भवानी सिंह, अजयवीर सिंह सहित 18 लोगों ने रक्तदान किया। इस अवसर पर डॉ. गौड ने कहा कि नेत्रदान के साथ ही रक्तदान, अंगदान और देहदान का अपना ही महत्व है, व्यक्ति को मानव शरीर के रूप में ईश्वर द्वारा मिले वरदान से दूसरों को भी लाभांवित करना चाहिए। डॉ. गौड 22 बार एसडीपी भी कर चुके हैं। उनका मानना है उन्होंने अपने जीवन का सिद्धांत बना रखा है कि जिंदगी के साथ रक्तदान बहुत जरूरी है तो ज़िंदगी के बाद नेत्रदान देहदान और अंगदान । इस सोच के साथ आमजन को अपने जीवन के संस्कार बनाना चाहिए।
सहयोग करने वालो में एडवोकेट वैश्य समाज के प्रदेश युवा सचिव अंकित पोरवाल, रामप्रसाद, विनीत , सुनील , निर्भीक, महावीर समेत कई लोग उपस्थित थे।
01/06/2023
विनीत ने 10वीं बार दुर्लभ एसडीपी डोनेट की
- टीम जीवनदाता के प्रयास से मरीज को मिली एसडीपी
कोटा.
कोटा में एसडीपी की आवश्यकता होने पर मदद का सिलसिला जारी है. लेकिन यदि एसडीपी दुर्लभ गु्रप की हो तो यह कार्य कठिन हो जाता है। टीम जीवनदाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता ने बताया कि निजी अस्पताल में भर्ती मरीज रविन्द्र कुमार शर्मा को एसडीपी की आवश्यकता होने पर कई जगह फोन किए लेकिन ओ नेगेटिव एसडीपी होने से डोनर मिलना मुश्किल हो रहा था। मरीज के पुत्र वैभव शर्मा सुबह से ही एसडीपी के लिए प्रयास कर रहे थे लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे में सेवा और समर्पण के पहचान बना चुके विनीत वाष्णेय ने 10वीं बार एसडीपी डोनेट की। वाष्णेय ने बताया कि वह हमेशा रात के समय विकट स्थिति में एसडीपी व रक्तदान करने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे में जब वह अपने परिवार के साथ जा रहे थे तभी उनके पास कॉल आया और उनसे एसडीपी डोनेशन के लिए कहा। वह किसी शादी में जा रहे थे, उन्होंने अपने परिवार को शादी में छोडा और एसडीपी कर अपना मानव धर्म निभाया। विनीत अब तक 10 बार एसडीपी और 30 बार रक्तदान कर चुके हैं।
31/05/2023
रेफर हुवे गंभीर पेशेंट को समय पर उपलब्ध कराई एसडीपी
–टीम जीवनदाता के प्रयास से पुष्पेंद्र ने सातवीं बार डोनेट की एसडीपी
कोटा।
कोटा में एसडीपी और रक्तदान को लेकर कार्य निरंतर जारी है। भीषण गर्मी और अतिव्यस्तता होने के बाद भी टीम जीवनदाता के प्रयास से जरूरतमंद को एसडीपी समय पर मिल रही है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश का सामने आया जब फूलवती नमक पेशेंट को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया जिसके लिए एसडीपी की आवश्यकता थी। पेशेंट को जयपुर शिफ्ट किया जाना था लेकिन प्लेटलेट घटकर 6000 रह गई थी ऐसे में चिकित्सकों ने एसडीपी चढ़ाने के बाद उसे जयपुर ले जाने के लिए सलाह दी। मरीज के अटेंडर ने टीम जीवन दाता के संयोजक व लायंस क्लब के रीजन चेयरमैन भुवनेश गुप्ता को संपर्क किया। उसके बाद भुवनेश गुप्ता ने अविलंब छावनी निवासी पुष्पेंद्र सिंह को पूरी वस्तु स्थिति से अवगत कराया और कहा कि यदि पेशेंट के एसडीपी नहीं चढ़ी तो गंभीर स्थिति बन सकती है। ऐसे में पुष्पेंद्र सिंह आरटीओ से संबंधित कार्य करते हैं वह अपने कार्य को छोड़कर सीधे अपना ब्लड सेंटर तलवंडी पहुंचे और एक अनजान के लिए जीवन बचाने की सोच के साथ एसडीपी डोनेट की। पुष्पेंद्र पूर्व में 7 बार प्लाज्मा डोनेशन कर चुके हैं, उनकी यह 7वी एसडीपी थी। वह 15 बार ब्लड डोनेशन भी कर चुके हैं। इस अवसर पर नमन गुप्ता, सुनील, सोनू, राम प्रसाद, विनीत और रोगी के अटेंडर सहित कई लोग उपस्थित रहे। पुष्पेंद्र का मानना है कि जीवन बचाने से बढ़कर कोई कार्य नहीं हो सकता , माता पिता ने यही संस्कार दिए है कि मानव धर्म को हमेशा सर्वोपरि मानते है । कोरोना काल में भी पुष्पेंद्र का योगदान उल्लेखनीय रहा था।