19/08/2022
देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि में तनयं कृष्ण त्वामहम शरणम गतः।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🥳💐
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19/08/2022
देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि में तनयं कृष्ण त्वामहम शरणम गतः।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🥳💐
28/05/2022
जीत पक्की है
कुछ करना है, तो डटकर चल
थोड़ा दुनियां से हटकर चल
लीक पर तो सभी चल लेते है,
कभी इतिहास को पलटकर चल
बिना काम के मुकाम कैसा?
बिना मेहनत के, दाम कैसा?
जब तक ना हाँसिल हो मंज़िल
तो राह में, राही आराम कैसा?
अर्जुन सा, निशाना रख, मन में,
ना कोई बहाना रख।
जो लक्ष्य सामने है,
बस उसी पे अपना ठिकाना रख।
सोच मत, साकार कर,
अपने कर्मो से प्यार कर।
मिलेंगा तेरी मेहनत का फल,
किसी और का ना इंतज़ार कर।
जो चले थे अकेले
उनके पीछे आज मेले हैं।
जो करते रहे इंतज़ार उनकी
जिंदगी में आज भी झमेले है!
24/05/2022
वो ही मेरे मसीहा
=-=--=-==-=-=-
मेरे काम में मुझे बहुत बरकत मिली
जब भी कक्षा में गया इज्जत मिली
वो ही मेरी औलाद, वो ही मेरे मसीहा
विद्यार्थिओं के बीच मुझे जन्नत मिली
कक्षाएं देती हैं माँ की गोद सा सुकून
खुदा के करम से मुझे ये दौलत मिली
मेरे शब्दों से जब खुश दिखे मेरे बच्चे
हरेक जन्म के कर्म की कीमत मिली
दीप बनकर रोशन हुए जब मेरे विद्यार्थी
‘गोविन्द’ मुस्कुराया उसे बड़ी राहत मिली
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11/04/2022
पांवों के निशान देता हूँ
=-==-=-=-=-=-=-=-=-
एक इम्तहान के बाद दूसरा इम्तहान देता हूँ
पास करना प्रभु तैयारी में जी जान देता हूँ
उग आते हैं पत्थर छोटे बड़े राह रोकने को
और मैं उन पर अपने पांवों के निशान देता हूँ
जिस्म ठंडा होने तलक अडूंगा मैं, लडूंगा मैं
काम कर दिखाता हूँ, अगर मैं जुबान देता हूँ
हजार बार काट दो पंख क्या फर्क पड़ता है
मैं जज्बे से अपनी कल्पना को उड़ान देता हूँ
सूरज बनके रोशन करेंगे जहाँ ये विद्यार्थी ‘गोविन्द’
तलाशता हूँ, तराशता हूँ, नई पहचान देता हूँ
गोविन्द शर्मा
09/04/2022
हौसला रखना तू सदा
=-=-=-=-=-=-=-=-=-=
रात गुजर गयी
अँधेरा टल चुका है
तेरा पथ प्रशस्त करने
सूरज निकल चुका है
केवल वही है हारता
जो दिल में निराशा लिए है
जीत है सिर्फ उसी के लिए
जो दिल में आशा लिए है
हौसला रखना तू सदा
अंतिम परिणाम बदलते देखा है
महान युद्धों में ‘गोविन्द’
विजेता का नाम बदलते देखा है
गोविन्द शर्मा
08/04/2022
अपना हक़ ले ज़रा
=-=-=-=-=-=-=-
जिगर को टटोल हौसले को परख ले ज़रा
राह की ठोकरों के स्वाद को चख ले ज़रा
रास्ता लम्बा है और पड़ाव बहुत ही दूर है
अभी तू मत रुक, थोड़ा और थक ले ज़रा
हताश न हो, बड़ी दुश्वारियाँ आगे हैं अभी
छोटे मोटे पत्थर हैं ये, भाई उचक ले ज़रा
ख़ैरात में मंज़िल नहीं चंद सिक्के मिलते हैं
पसीना बहा, मेहनत से अपना हक ले ज़रा
अनवरत जारी रख कर्म तपस्या तू ‘गोविन्द’
ध्रुव तारा बनकर दुनिया में चमक ले ज़रा
गोविन्द शर्मा
07/04/2022
किताबें
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वाकई किताबें आदमी का रूप रंग बदलती हैं
समझ में आए तो जीवन का ढंग बदलती हैं
देकर के चिंतन का खुला साफ़ नीला आकाश
किताबें पूर्वाग्रहों से युक्त दायरा तंग बदलती हैं
कोयले रूपांतरित होते हैं हीरों में किताबों से
ये व्यक्ति का जाहिलियत से बुरा संग बदलती हैं
टूटे मन को जोड़कर, बढ़ाती हैं हौंसला किताबें
इक कट जाए तो ये दूसरा पतंग बदलती हैं
भांग, शराब या अफीम में क्या है नशा ‘गोविन्द’
सबसे नशीली हैं किताबें, ये तरंग बदलती हैं
गोविन्द शर्मा
गुरु के द्वारा जो प्राप्त नहीं होता, वह अन्यत्र भी नहीं मिलता।
मनुष्य गुरु कृपा से निस्संदेह सभी कुछ प्राप्त कर ही लेता है।
ज्ञान के सागर, पथ प्रदर्शक और मार्गदर्शक, सम्मान से संयम की सीख देने वाले
गुरुजनों को गुरूपूर्णिमा पर सादर नमन 🙏🏼
05/09/2020
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम,।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै
श्रीगुरवे नमः।।
।।।शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं ।।।
22/08/2020
श्री गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर आप समूर्ण परिवार को हार्दिक शुभकामना ! दैवादी देव श्री गजानंद जी महाराज के पावन चरणों मे नमन करते हुए सभी के कल्याण की मंगल प्रार्थना करता हु !
🙏गणपति बप्पा मोरिया 🙏
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