संस्कृत भारती ऑनलाइन प्रशिक्षण फ्री

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संस्कृत भारती ऑनलाइन प्रशिक्षण फ्री Sanskrit Shiksha ko Samarpit All Competition Exam Nta Ugc Net Set TGT PGT DSSSB CTET R**T UPTET MPTE

07/02/2023

*विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च।*
*व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च ॥*
(चाणक्य नीति अध्याय -५/१५)

*भावार्थ*- प्रवास के दौरान अर्थात विदेश में विद्या ही पुरुष की मित्र है। घर में पत्नी पुरुष की मित्र होती है। रोगी के लिए मित्र औषधि है और मरे हुए का मित्र एकमेव धर्म ही है।

*🙏 प्रातः वन्दनम् 🙏*

*आपका दिन शुभ और मंगलमयपूर्ण हो ऐसी ईश्वर से मेरी प्रार्थना है।*

*दिन -मंगलवार* *दिनांक -०७/०२/२०२३*



#श्लोका #संस्कृतम्
#संस्कृत #सुभाषित #सुविचार #सूक्ति #श्लोक
#शायरी #संस्कृतशायरी #जोक्स #मीम #हास्यकणिका


जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट से पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त करने हेतु 45 प्रतिशत अंक के साथ परास्न...
30/03/2022

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट से पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त करने हेतु 45 प्रतिशत अंक के साथ परास्नातक/एम.ए. उत्तीर्ण दिव्यांग विद्यार्थी संलग्न विवरण के अनुसार दिनांक: 07/04/2022 तक आवेदन कर सकता है।

05/02/2022

महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुना ।
धियो विश्वा विराजति ।।
हे देवी सरस्वती, आप अपने विशाल सागर से हमें ज्ञान प्रदान कर रही हैं।
कृपया इस ब्रह्माण्ड को अपनी अपार बुद्धि से सुशोभित करें।

O Devi Saraswati, you have been imparting knowledge to us form your vast ocean. Please adorn this universe with your immense intellect.
#बसंत_पंचमी


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04/02/2022

*प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः ।*
*सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि न साधवः ॥*
👉 चाणक्य नीति अध्याय-३(६)
*अर्थात्*- जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्यदा छोड़कर किनारों को छोड़ अथवा तोड़ जाते है, लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय के सामान भयंकर आपत्ति एवं विपत्ति में भी आपनी मर्यादा नहीं बदलते।


🙏 *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो*🙏

29/01/2022

*सुकुले योजयेत्कन्यां पुत्रं विद्यासु योजयेत् ।*
*व्यसने योजयेच्छत्रुं मित्रं धर्मेण योजयेत् ॥*
👉 चाणक्य नीति अध्याय-३(३)
*अर्थात्*- लड़की का विवाह अच्छे खानदान मे करना चाहिए. पुत्र को अच्छी शिक्षा देनी चाहिए, शत्रु को आपत्ति और कष्टों में डालना चाहिए, एवं मित्रों को धर्म कर्म में लगाना चाहिए।

🙏 *सुप्रभातम्🙏*
🙏 *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो*🙏

24/01/2022

*गृहीत्वा दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम् ।*
*प्राप्तविद्या गुरुं शिष्या दग्धारण्यं मृगास्तथा ॥*
👉 चाणक्य नीति अध्याय-२(१८)
*अर्थात्*- ब्राह्मण दक्षिणा मिलने के पश्चात् आपने यजमानों को छोड़ देते हैं, विद्वान विद्या प्राप्ति के बाद गुरु को छोड़ जाते हैं और पशु जले हुए वन को त्याग देते हैं।

🙏 *सुप्रभातम्🙏*
🙏 *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो*🙏

19/01/2022

📘 हिंदी प्रश्नोतर परीक्षा सम्बन्धी || 19 जनवरी
💐 आज के लिए प्रश्नोतर 💐
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हजारी प्रसाद द्विवेदी

मूल नाम : --------- बैजनाथ द्विवेदी
जन्म: -- 19 अगस्त1907 दुबे-का-छपरा ग्रामबलिया(u.p.)
मृत्यु: : --------- 1979 प्रमुख रचनाएँ - : ---------
सूर साहित्य (1936)
हिन्दी साहित्य की भूमिका(1940)
प्राचीन भारत में कलात्मक विनोद(1940)
कबीर (1942)
नाथ संप्रदाय (1950)
हिन्दी साहित्य का आदिकाल(1952)
आधुनिक हिन्दी साहित्य पर विचार (1949)
साहित्य का मर्म (1949) मेघदूत: एक पुरानी कहानी (1957)
लालित्य मीमांसा (1962) साहित्य सहचर (1965) कालिदास की लालित्य योजना(1967)
मध्यकालीन बोध का स्वरूप (1970)
निबंध- : --------- आलोक पर्व (1971)
अशोक के फूल (1948) कल्पलता (1951)
विचार और वितर्क (1954) विचार प्रवाह (1959)
कुटज (1964)
आलोक पर्व (1972)
उपन्यास------
बाणभट्ट की आत्मकथा (1947)
चारु चंद्रलेख(1963) पुनर्नवा(1973)
अनामदास का पोथा (1976)
वृत्ति- 1930 से 1950 तक शांतिनिकेतन के हिंदी-भवन में अध्यक्ष, 1950 से 1960 तक हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ में अद्यक्ष एवं प्रोफ़ेसर (1960-67)
उपाधि/ सम्मान--------
1• 1949 में लखनऊ वि. वि. से डी. लिट की उपाधि से सम्मानित।
2• राष्ट्रपति द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित (1957 में)
3• पश्चिम बंगाल साहित्य अकादमी से टैगोर पुरस्कार द्वारा सम्मानित(1966) 4•केंद्रीय साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत (1973)।

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने तीन इतिहास ग्रन्थो की रचना क्मश:
1.हिन्दी साहित्य की भूमिका1940
2. हिन्दी साहित्य : उद्भव और विकास 1952
3. हिन्दी साहित्य का आदिकाल 1952

द्विवेदी ने अपने इतिहास मे परम्परा की निरन्तरता का अनुशीलन करते हुए एक व्यापक इतिहास - दर्शन की भूमिका तैयार की |

हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है " कि शंकराचार्य के बाद इतना प्रभावशाली और इतना महिमान्वित भारतवर्ष मे दुसरा नही हुआ | भारतवर्ष मे कोने - कोने मे उनके अनुयायी आज भी पाये जाते है | भक्ति आन्दोलन के पूर्व सबसे शक्तिशाली धार्मिक आन्दोलन गोरखनाथ का भक्ति मार्ग ही था | गोरखनाथ अपने युग के सबसे बड़े नेता थे "

द्विवेदी ने रासो' शब्द की व्युत्पति 'रासक'(उपरूपक) से मानी

द्विवेदी ने ' पृथ्वीराज रासो' को शुक-शकी संवाद के रूप मे रचित माना है

द्विवेदी ने विद्यापति को' शृंगार रस के सिद्ध वाक् कवि ' कहा है

द्विवेदी जी ने भक्ति आन्दोलन को ' लोकजागरण' की संज्ञा दी |

द्विवेदी जी ने अपभ्रंश को हिन्दी से पृथक मानते थे
आदिकाल को " अत्यधिक विरोधी और व्याघातो का युग " कहा है
द्विवेदी ने अब्दूल रहमान को हिन्दी का पहला कवि माना है

द्विवेदी ने कबीर को 'भाषा का डिक्टेटर' कहा है व रामानन्द को 'आकाश धर्मा गुरु' कहा |
'मध्य युग की समग्र स्वाधीन चिन्ता के गुरु रामानन्द ही थे

द्विवेदी ने तुलसीदास के बारे मे " भारतवर्ष का लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय करने का अपार धैर्य लेकर आया है |"

08/01/2022

*यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।*
*विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥*

*अर्थात्*- उस व्यक्ति ने धरती पर ही स्वर्ग को पा लिया : १. जिसका पुत्र आज्ञांकारी है, २. जिसकी पत्नी उसकी इच्छा के अनुरूप व्यव्हार करती है, ३. जिसे अपने धन पर संतोष है।

👉चाणक्य नीति, अध्याय- २(३)
🙏 *सुप्रभातम्*🙏
🙏 *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो*🙏

06/01/2022

*पुष्पे गन्धं तिले तैलं काष्ठेऽग्निं पयसि घृतम् ।*
*इक्षौ गुडं तथा देहे पश्यात्मानं विवेकतः ॥*

*अर्थात्*- जिस प्रकार एक फूल में खुशबु है. तिल में तेल है. लकड़ी में अग्नि है. दूध में घी है. गन्ने में गुड है. उसी प्रकार यदि आप ठीक से देखते हो तो हर व्यक्ति में परमात्मा है |

🙏 *सुप्रभातम्🙏*
🙏 *आपका दिन शुभ और मंगलमय हो*🙏

काव्यप्रकाश-आचार्य मम्मटhttps://t.me/sanskritsubject 1. काव्यप्रकाश के रचनाकार?[मम्मट] 2.काव्यप्रकाश किसमें विभक्त है?[उ...
04/01/2022

काव्यप्रकाश-आचार्य मम्मट
https://t.me/sanskritsubject
1. काव्यप्रकाश के रचनाकार?
[मम्मट]
2.काव्यप्रकाश किसमें विभक्त है?
[उल्लासों में ]
3.मम्मट की उपाधि बताइये?
[वाग्देवतावतार, ध्वनिप्रस्थानपरमाचार्य]
4.काव्यप्रकाश के मंगलाचरण में किसकी स्तुति है?
[कविभारती की]
5. काव्यप्रकाश के मंगलाचरण में छंद?
[आर्या]
6. मम्मट का काव्यलक्षण बताइये?
[तददोषो शब्दार्थो सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि]
काव्य के हेतु कौन कौन से हैं?
7. काव्य के प्रयोजन कितने है?
[6]
8.प्रथम उल्लास का नाम बताइये
[काव्य स्वरूप]
9. काव्यप्रकाश की सबसे पुरानी टीका..?
[संकेत]
10 काव्यप्रकाश के रचनाकार मम्मट के अतिरिक्त और कौन है?
[अल्लट सूरी]
11 द्वितीय उल्लास का नाम बताइये?
[शब्दार्थ स्वरूप]
12.मम्मट के अनुसार गुणीभूतव्यंग्य का लक्षण बताइये?
[व्यंग्यार्थ का वाच्यार्थ से अधिक चमत्कृत न होना]
13.मम्मट के अनुसार उत्तम काव्य का लक्षण बताइये?
[व्यंग्यार्थ का वाच्य से अधिक चमत्कृत होना]
14. मम्मट के अनुसार अधम काव्य का लक्षण बताइये?
[शब्दप्रधान]
15.काव्यप्रकाश कैसा ग्रंथ है
[लक्षण ग्रन्थ]
16. अवर काव्य किस का अपर नाम?
[अधम]
17. शब्द कितने प्रकार के है?
[3]
18.अर्थ कितने प्रकार के है?
[3]
19. प्रतीयमान अर्थ किसे कहते है?
[व्यंग्यार्थ]
20. अग्रिमा शक्ति है?
[अभिधा]
21. काव्य प्रकाश में कितने अंश है?
[3]
22. मम्मट्ट की उपाधि क्या है?
[वाग्देवतावतार
23.मम्मट ने काव्य के कितने प्रयोजन माने हैं?
[6]
24. गुरुमत के प्रतिपादक?
[प्रभाकर गुरु]
25.कुमारिलभट्ट के शिष्य का नाम बताइये?
[प्रभाकर गुरु]
26. साक्षात् संकेतितमयोअर्थमभिधत्ते स; ........?
[वाचक]
27 मीमांसक उपाधि किसमें मानते है?
[जाति में]
28.आचार्य मम्मट का समय?
[11वीं शताब्दी उत्तरार्द्ध]
29. मम्मट किस वाद के आचार्य है?
[ध्वनिवाद]
30.चित्रतुरंग न्याय की अवधारणा किसकी है?
[शंकुक की]

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01/01/2022

*न भारतीयो नव संवत्सरोयं*
*तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् |*
*यतो धरित्री निखिलैव माता*
*तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् |*

*यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नही है, तथापि सबके लिये कल्याणप्रद हो; क्योंकि सम्पूर्ण धरती सबकी माता ही है !*


*सूर्य संवेदना पुष्पे, दीप्ति कारुण्यगंधने।*
*लब्ध्वा शुभं नववर्षेऽस्मिन कुर्यात्सर्वस्य मंगलम्॥*

*अर्थात्*- जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह आने वाला हमारा यह नूतन वर्ष आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

03/12/2021

*हैप्पी बर्थडे की जगह अब ' संस्कृत ' में बहुत ही अच्छा अनुवाद किया है।*

*कृपया इसे अधिकाधिक प्रचारित प्रसारित करें ..*
-tetsanskrit

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