07/02/2023
*विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च।*
*व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च ॥*
(चाणक्य नीति अध्याय -५/१५)
*भावार्थ*- प्रवास के दौरान अर्थात विदेश में विद्या ही पुरुष की मित्र है। घर में पत्नी पुरुष की मित्र होती है। रोगी के लिए मित्र औषधि है और मरे हुए का मित्र एकमेव धर्म ही है।
*🙏 प्रातः वन्दनम् 🙏*
*आपका दिन शुभ और मंगलमयपूर्ण हो ऐसी ईश्वर से मेरी प्रार्थना है।*
*दिन -मंगलवार* *दिनांक -०७/०२/२०२३*
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