17/06/2025
प्यार..
मेरे
मन मस्तिष्क में
इतनी घृणा, नफ़रत,
द्वेष, बैर, शत्रुता,
और विरक्ति भरी थी कि
सब कुछ ग़लत
बुरा लगता और दिखता
पर जैसे ही मैंने
अपने नफ़रत भरे
विचारों के खेत मे
प्यार, मुहब्बत, स्नेह
और अनुराग के ख़यालों
को फूल और सुगंध से
झिड़का तो सब कुछ
अब सुखद और खुशहाल
दिखने और लगने लगा है.
प्रमोद चौहान
कुरवाई विदिशा