ज्ञान में संवाद और प्रेम के लिए स्पेस
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भारतीय ज्ञान परंपरा में वैदिक काल से संवाद का महत्व है। समाज में संवाद अब बहुत कम बचा है। याज्ञवलक्य और मैत्रेयी के बीच संवाद (बृहदारण्यक उपनिषद) में दो महत्वपूर्ण विचार हैं। याज्ञवल्क्य ने जब अपनी सारी संपत्ति मैत्रेयी को देने की इच्छा व्यक्त की, मैत्रेयी ने कहा, ‘जिन चीजों से मेरी आत्मा में समृद्धि और असीमता नहीं आएगी, उन्हें लेकर मैं क्या करूंगी!’ इसके विपरीत, आज की गैर-रोमांटिक दुनिया ने ‘भौतिक अमीरी और संवेदना की दरिद्रता का युग्म’ चुना है।
यह प्रेमचंद और छायावादी कवियों का समय नहीं है। प्रेमचंद ने ‘धन से दुश्मनी’ की घोषणा की थी। छायावादी कवियों ने भी भौतिक ऐश्वर्य को ठुकराया था। प्रसाद की सभी साहित्यिक नायिकाएं जैसे- ‘स्कंदगुप्त’ की देवसेना, ‘आकाशदीप’ की चंपा, ‘पुरस्कार’ की मधुलिका आदि धन का तिरस्कार करती हैं। ‘सालवती’ कहानी की सालवती राजसत्ता से मिली सोने की गेंद तालाब में फेंक देती है। ठीक है, आदमी को धन चाहिए, पर आखिर कितना चाहिए?
याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी के बीच संवाद में एक दूसरी चीज है। मैत्रेयी कहती है, ‘प्रेम मनुष्य की आत्मा का सबसे बड़ा गुण है।’ इसका अर्थ है, आत्मज्ञान विश्व और शेष सृष्टि से प्रेम की अनुभूति के सिवाय कुछ और नहीं है। छायावाद ने प्रेम को मुख्य विषय बनाया था और इसके लिए ‘ह्यूमन सफरिंग’ को चुना था। उस युग में विश्व नीड़ की भावना थी, ‘मानव कह रे यह मैं हूं, यह विश्व नीड़ बन जाता।’ विश्व नीड़ की भावना वैश्वीकरण युग के ‘ग्लोबल विलेज’ की भूल-भुलैया में खो गई। ‘मैं’ व्यक्तिवाद में ढल गया या उन्मत्त भीड़ मे खो गया। प्रेम की जगह घृणा ने ले ली। विश्व मानवता की जगह विश्व बाजार आ गया, जिसमें ज्ञानी क्रीतदास होने लगे।
भारतीय ज्ञान परंपरा में वैदिक साहित्य के शुन:शेप और नचिकेता जैसे चरित्र हैं। वे भौतिक सुखों की उपेक्षा करके बड़े प्रश्नों के साथ जीना चाहते हैं। बड़े प्रश्न उसी के जेहन में पैदा हो सकते हैं, जिसके पास वैयक्तिकता सुरक्षित हो, जिसका ‘मैं’ व्यक्तिवाद और भीड़ के शोर दोनों से बचा हो तथा जिसने अपने हर रिश्ते में, बाजार से हो या किसी व्यक्ति से, अपने ‘स्व’ को बचा रखा हो!
आजकल कई लोग प्राचीन ग्रंथों या कृत्रिम मेधा की मशीनों से कुछ भी नोंच-झपटकर ज्ञानी बने घूम रहे हैं। ज्ञानी होना आज से पहले कभी इतना आसान नहीं था। ऐसे लोग छिलके का हलवा खाते हैं। कठोपनिषद का नचिकेता भौतिक सुख-ऐश्वर्य और सत्ता की तरफ से मुंह फेरकर ज्ञान पाना चाहता है। वह मृत्यु के दरवाजे पर खड़ा है, भूखा-प्यासा और नींदें गंवाकर। उसकी जिज्ञासा ही उसका सहाय है। ज्ञान कभी भी सत्ता और भोग-विलास के गलियारों में मिलने वाली चीज नहीं है, पर इस समय ऐसे ही ज्ञानी ज्यादा हैं। बुद्ध ने कपिल के शिष्यों सहित कई मत के ज्ञानियों से संवाद किया था और कष्ट उठाया था, तब जाकर बुद्ध बने थे। ज्ञान परंपरा में यदि जिज्ञासा थम गई तो वह तालाब है।
भारतीय ज्ञान परंपरा में बुद्धिपरक नवोन्मेष और विपर्यय दोनों के उदाहरण हैं। नक्षत्रविज्ञानी वराहमिहिर (500) ने सूर्य ग्रहण के संदर्भ में बताया कि यह राहु के ग्रसने का नतीजा नहीं है। बाद में एक गणितज्ञ ब्रह्नगुप्त (600) आए। वे वराहमिहिर की वैज्ञानिक धारणा को उलटकर इस मत का प्रचार करने लगे कि सूर्य ग्रहण राहु के ग्रसने का ही नतीजा है, अन्यथा लोग शरीर में गरम तेल का लेप क्यों करते और दोष से मुक्ति के उपाय क्यों करते!
ज्ञान परंपरा जब एक अतीतबद्ध ज्ञान व्यवस्था (नॉलेज सिस्टम) बन जाती है वह संवाद, बहस और नवोन्मेष की जगह नहीं होती। वह बल, वैभव और सुख-सुविधाएं बटोरने का हथियार होती है। भारतीय ज्ञान परंपरा में न उपनिषदों ने यह राह दिखाई थी और न बुद्ध ने। ऐसी ज्ञान व्यवस्थाओं के संदर्भ में प्रसाद ने ‘कामायनी’ में लिखा है, ‘आवरण स्वयं बनते जाते/ है भीड़ लग रही दर्शन की’! ज्ञान तब केवल आवरण होता है- सच पर पर्दा, जब वह सत्ता और भौतिक ऐश्वर्य के लिए एक बंद ‘नॉलेज सिस्टम’ में बदल जाता है। भारत की ज्ञान परंपराएं बताती हैं कि ज्ञान एक अनंत यात्रा है, जिसमें विचारों की स्वतंत्रता रही है। ज्ञान कभी स्थिर नहीं था। वेदांत शंकराचार्य के समय कुछ था और भक्ति को महत्व देने वाले रामानुजाचार्य के समय कुछ!
ज्ञानी सबसे पहले यह ज्ञान हासिल करता है कि वह कितना कम जानता है। वह सत्ता-सुविधाओं के लोभ में कभी नहीं पड़ता।
भारतीय भाषा परिषद - कौशल विकास केंद्र
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा
28/10/2020
29 अक्तूबर (गुरुवार) की विद्या सभा का लिंक :
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
विद्या सभा का विषय : कबीर का काव्य
अतिथि प्रवक्ता : डॉ. शंभुनाथ समय : अक्तूबर 29, 2020 (गुरुवार), संध्या : 04:00 बजे फेसबुक पेज लिंक : https://www.facebook.com/BBPKaushal
26/10/2020
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा के गुरुवार की
विद्या सभा का विषय : कबीर का काव्य
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
विद्या सभा का विषय : पत्रकारिता की विकास यात्रा के
अतिथि प्रवक्ता : श्री विनय बिहारी सिंह सर को लाइव देखें, सुनें ..........
प्रिय विद्यार्थियों और हिंदी प्रेमियों पिछले 3 महीनों से कौशल विकास केंद्र की विद्या सभा बहुत सुंदर तरीके से चल रही थी और फलदायक थी। वर्तमान समय में परीक्षाओं, दुर्गापूजा और दिवाली के मौके पर निरंतर कम उपस्थिति की संभावना को भांपते हुए हम 12 अक्तूबर से विद्या सभा की तरफ से छुट्टी (वकेशन) की घोषणा करते हैं। आगामी 13 अक्तूबर की विद्या सभा स्थगित की जाती है। नवंबर में दिवाली के बाद हम फिर आपकी सेवा में पूरे जोशो- खरोस के साथ होंगे। आशा है आप अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएंगे। धन्यवाद और शुभकामनाएं!
सुशील कुमार पाण्डेय
संयोजक
कौशल विकास केंद्र
10/10/2020
11 अक्तूबर, रविवार की विद्या सभा का लिंक :
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
प्रथम विद्या सभा का विषय : हिंदी अंग्रेजी अनुवाद
अतिथि प्रवक्ता : डॉ. अवधेश प्रसाद सिंह
समय : 11 अक्तूबर, 2020 (रविवार), संध्या : 04:00 बजे से 04:50 तक
द्वितीय विद्या सभा का विषय : स्पोकन इंग्लिश
अतिथि प्रवक्ता : श्रीमती सीमा अग्रवाल
समय : 11 अक्तूबर, , 2020 (रविवार), संध्या : 05:00 बजे से 05:50 तक
विद्या सभा का फेसबुक पेज लिंक : https://www.facebook.com/BBPKaushal
08/10/2020
9 अक्तूबर, शुक्रवार की विद्या सभा का लिंक :
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
विद्या सभा का विषय : पत्रकारिता की विकास यात्रा
अतिथि प्रवक्ता : श्री विनय बिहारी सिंह
समय : अक्तूबर 9, 2020 (शुक्रवार), संध्या : 04:00 बजे से 05:00 तक
विद्या सभा का फेसबुक पेज लिंक : https://www.facebook.com/BBPKaushal
05/10/2020
6 अक्तूबर, मंगलवार की विद्या सभा का लिंक :
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
विद्या सभा का विषय : प्रतिबद्धता और वादा
अतिथि प्रवक्ता : श्री मृत्युंजय
समय : अक्तूबर 6, 2020 (मंगलवार), संध्या : 04:00 बजे से 04:50 तक
विद्या सभा का फेसबुक पेज लिंक : https://www.facebook.com/BBPKaushal
03/10/2020
4 अक्तूबर, रविवार की विद्या सभा का लिंक :
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
प्रथम विद्या सभा का विषय : शुद्ध हिंदी लेखन : संधिगत भूलें
अतिथि प्रवक्ता : डॉ. अवधेश प्रसाद सिंह
समय : 4 अक्तूबर, 2020 (रविवार), संध्या : 04:00 बजे से 04:50 तक
द्वितीय विद्या सभा का विषय : स्पोकन इंग्लिश
अतिथि प्रवक्ता : श्रीमती सीमा अग्रवाल
समय : 4 अक्तूबर, , 2020 (रविवार), संध्या : 05:00 बजे से 05:50 तक
विद्या सभा का फेसबुक पेज लिंक : https://www.facebook.com/BBPKaushal
30/09/2020
01 अक्तूबर, गुरुवार की विद्या सभा का लिंक :
भारतीय भाषा परिषद द्वारा संचालित कौशल विकास केंद्र के
हिंदी भाषा और साहित्य ऑनलाइन चर्चा की
विद्या सभा का विषय : आज के समय में हिंदी : संभावनाएँ और चुनौतियाँ
अतिथि प्रवक्ता : प्रो. अनिल कुमार राय
समय : 01 अक्तूबर, 2020 (गुरुवार), संध्या : 05:30 बजे से 06:30 तक
विद्या सभा का फेसबुक पेज लिंक : https://www.facebook.com/BBPKaushal
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