Wisdom Public School Kishanganj

Wisdom Public School Kishanganj

Share

Director Massage- Wisdom Public School Kishanganj, situated in Mahingaon, providing education to privilage and Ration card holder students.

it's aim to make the educates society.

28/06/2023

आप सबको ईद-उल-अज़हा की पुरखुलूस मुबारकबाद। मुल्क में अमन-चैन, भाईचारा बना रहे और अल्लाह हम सबकी कुर्बानियों को कुबूल फरमाये।
-------------------------------------------------
मंसूर आलम, पूर्व जिला पार्षद उम्मीदवार, क्षेत्र संख्या 18, सह अध्यक्ष- अल- मदद फाउंडेशन , एव जिला उपाध्यक्ष- ABSA किशनगंज बिहार!
🌙🌙

11/02/2023

Commerce World Kishanganj मे कक्षा 12 वी का प्रवेश जारी हैं! जल्दी करे और अपना बेहतर रेजल्ट सुनिश्चित करें!
Cont- 8002533356
पता- मदीना मार्केट, कॉलेज रोड, किशनगंज

22/06/2022

This is kind information to the guardian and sweetest student The Kishanganj is going to start new batch for class 11 for the session of 22-23. At marginal Fees as per your Pocket. So don't worry. Hurry up and get enroll your children "बिना किसी टेंशन" For bright future of your childs.

At- Madina Market, Opposite Power House, College Road Kishanganj.
Mob- +91 8002533356, 9110039914

27/05/2022

धन का बहिर्गमन और भारत की लूट
--------------------------------------------
मुगलो ने नही बल्कि ब्रिटिशराज ने की थी भारत मे लूट ?

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक साल 1765 से लेकर 1938 के बीच ब्रिटिशों ने भारत की कम से कम 44.6 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर (करीब तीन हजार लाख करोड़ रुपए) की पूंजी कम कर दी यानी वे यहां से लूट कर बाहर ले गए। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में एक्सचेंज रेट 4.8 अमेरिकी डॉलर प्रति पाउंड हुआ करता था।

ब्रिटेन ने भारत से चुराया उसे हिंसा के लिए इस्तेमाल किया। साल 1840 में चीनी घुसपैठ और 1857 में विद्रोह आंदोलन को दबाने का तरीका निकाला गया और उसका पैसा भी भारतीयों के द्वारा दिए गए टैक्स से ही लिया गया। भारतीय राजस्व से ही ब्रिटेन अन्य देशों से जंग का खर्च निकालता था और कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का विकास करता था।

जब ब्रिटिश राज भारत में 1847 तक पूरी तरह से लागू हो गया, उस समय नया टैक्स एंड बाय सिस्टम लागू किया गया। ईस्ट इंडिया कंपनी का काम कम हो गया और भारतीय व्यापारी खुद निर्यात करने के लिए तैयार हो गए। भारत से जो कोई भी विदेशी व्यापार करना चाहता था उसे खास काउंसिल बिल का इस्तेमाल करना होता था। ये एक अलग पेपर करंसी होती थी, जो सिर्फ ब्रिटिश क्राउन द्वारा ही ली जा सकती थी और उन्हें लेने का एक मात्र तरीका था लंदन में सोने या चांदी द्वारा बिल लिए जाएं।

जब भारतीय व्यापारियों के पास ये बिल जाते थे तो उन्हें इसे अंग्रेज सरकार से कैश करवाना होता था। इन बिलों को कैश करवाने पर उन्हें रुपयों में पेमेंट मिलती थी। ये वो पेमेंट होती थी जो उन्हीं के द्वारा दिए गए टैक्स द्वारा इकट्ठा की गई होती थी यानी व्यापारियों का पैसा ही उन्हें वापस दिया जाता था। इसका मतलब बिना खर्च अंग्रेजी सरकार के पास सोना-चांदी भी आ जाता था और व्यापारियों को लगता था कि ये पैसा उनका कमाया हुआ है। ऐसे में लंदन में वो सारा सोना-चांदी इकट्ठा हो गया जो सीधे भारतीय व्यापारियों के पास आना चाहिए था। इस तरह से ब्रिटेन भारतीय व्यापारियों को मूर्ख बनाता रहा और अपना विकास करता रहा।

दादाभाई नौरोजी 1850 में एलफिन्स्टन संस्थान में प्रोफेसर और ब्रिटिश सांसद बनने वाले पहले भारतीय थे। वे ‘ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया’ और ‘भारतीय राष्ट्रवाद के पिता’ के महान व्यक्तित्व से पहचाने जाते थे। वह एक शिक्षक, कपास व्यापारी और सामाजिक नेता थे। वह दादाभाई नौरोजी ही थे जिनका जन्म 4 सितंबर 1825 को मुंबई के खड़क में हुआ था।

वह 1892 और 1895 के बीच यूनाइटेड किंगडम हाउस ऑफ कॉमन्स में संसद सदस्य (एमपी) भी बने थे। दादाभाई नौरोजी ने उस समय के दो अन्य प्रसिद्ध राजनेताओं के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दादाभाई नौरोजी ने ए.ओ. ह्यूम और दिनशॉ ईदुलजी वाका के जरिए अंग्रेजों के शासन में भारत से धन निकासी की अवधारणा में बहुत अधिक योगदान दिया था। उन्होंने अपनी पुस्तक लिबर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया में इसी अवधारणा का उल्लेख किया है।

दादाभाई नौरोजी यह कहने वाले पहले व्यक्ति थे कि आंतरिक कारक भारत में गरीबी के कारण नहीं हैं, लेकिन गरीबी औपनिवेशिक शासन के कारण हुई, जो भारत की संपदा और समृद्धि को कम कर रहे थे। 1867 में दादाभाई नौरोजी ने धन निकासी के सिद्धांत को आगे बढ़ाया था जिसमें उन्होंने कहा कि ब्रिटेन पूरी तरह से भारत से जल रहा है। उन्होंने अपनी पुस्तक लिबर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया में इस सिद्धांत का उल्लेख भी किया है। इसके अलावा अपनी पुस्तक में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में 200-300 मिलियन पाउंड के राजस्व का नुकसान हो सकता है। दादाभाई नौरोजी ब्रिटिशों को भारत में एक बड़ी बुराई के रूप में मानते थे। आर.सी. दत्त ने भी दादाभाई नौरोजी से प्रेरित होकर इसी सिद्धांत को बढ़ावा दिया है। इस पुस्तक में इकनोमिक हिस्ट्री इन इंडिया को एक प्रमुख विषय के रूप में रखा गया है। जो धन बाहर गया वह भारत की ही संपत्ति और अर्थव्यवस्था का हिस्सा था, जो कि भारतीयों को प्रयोग करने लिए उपलब्ध नहीं था।

दादाभाई नौरोजी ने छह कारण बताए हैं जो धन निकासी के सिद्धांत के कारण बने। ये निम्न हैं:

-भारत में बाहरी नियम और प्रशासन।
-आर्थिक विकास के लिए आवश्यक धन और श्रम विदेशियों द्वारा लाया गया था। लेकिन तब भारत ने विदेशियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया था।
-भारत द्वारा ब्रिटेन के सभी नागरिकों के प्रशासन और सेना के खर्च का भुगतान किया गया था।
-भारत अंदर और बाहर दोनों इलाकों के निर्माण का भार खुद उठा रहा था।
-भारत द्वारा देश के मुक्त व्यापार को खोलने में अधिक फायदा हुआ।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में प्रमुख धन लगाने वाले विदेशी थे। वे भारत से जो भी पैसा कमाते थे। वह भारत में कभी भी कुछ भी खरीदने के लिए निवेश नहीं करते थे। फिर उन्होंने भारत को उस पैसे के साथ छोड़ दिया था।

इतना ही नहीं वे भारत की रेलवे जैसी विभिन्न सेवाओं के माध्यम से ब्रिटेन में भारी रकम पहुँचा रहे थे। दूसरी तरफ भारत में व्यापार और साथ ही श्रम बहुत कम मात्रा में था। इसके साथ ही भारत के उत्पादों को ईस्ट इंडिया कंपनी भारतीय पैसों से खरीद रही थी। जिसका निर्यात ब्रिटेन में कर रहे थे। दादाभाई नौरोजी को ब्रिटिश और ब्रिटेन दोनों के द्वारा सम्मानित किया गया था।

1872 में महादेव गिविंद रानाडे ने कहा था कि भारत की एक तिहाई आय से अधिक हिस्सा अंग्रेजो के हिस्से में जा रहा था। रमेश चंद्र दत्त ने इकोनामिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया में लिखा है कि भारत में हो रही धन की निकासी का उदाहरण पूरी दुनिया में ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा। दादा भाई नैरोजी के पावर्टी ऑफ ब्रिटिश रूल इन इंडिया के समर्थन में इन सबके कथन अंग्रेजीराज में भारत की दुर्दशा बताने के लिए काफी हैं।

अब यहां से समझिये कि मैं ऊपर जो आंकड़े दे रहा हूँ वो केवल 1765 से शुरू होते हैं जिन्हें कागजो में पकड़ा गया है, इसके अलावा यहां के लोगो से की जाने वाली अवैध वसूली, चोरी छिपे किया जाने वाला व्यापार, राजाओ के द्वारा दिये जाने वाले बेशकीमती उपहार आदि शामिल नही हैं। इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि 15 विन सदी से भारत की लूट का सिलसिला 20विन सदी तक लगातार जारी रहा जब तक देश अंदर से खोखला नही हो गया।

जबकि मुगलो ने यही भारत शासन किया, और अंततः यहीं मर गए यानी उनका कमाया धन यही मौजूद है लेकिन बाहरी आक्रांताओ और अंग्रेजो ने सोने की चिड़िया को दम भर लूटा और लूटकर अपने देश को मालामाल कर दिया।

© मंसूर आलम

#ज्ञानवापी

26/05/2022

Hello every one

01/01/2022

पुरानी साल बहुत सी यादें छोड़ जाती है और नई साल उमंग, खुशिया और नई उम्मीदें लाती है, अपनी सर्वश्रेष्ठ कोशिश और मेहनत से अच्छा करने की कोशिश करें और जनकल्याण में विश्वास रहे, अल्लाह ताला सब खैर करेगा!

आप सभी को नई साल 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं!

#इंसाफ
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
निवेदक:- मंसूर आलम, पूर्व जिला पार्षद उम्मीदवार, क्षेत्र संख्या 18, सह अध्यक्ष- अल- मदद फॉउंडेशन, एव जिला उपाध्यक्ष- ABSA किशनगंज बिहार!

27/02/2021

आज जिला परिषद क्षेत्र 18 के कद्दावर प्रत्याशी जनाब Mansoor Alam जो कि महिंगाव के निवाशी है । बेलवा के इतिहासिक मैदान में क्रिकेट मैच के दौरान खिलाड़ियों का हौसला अफजाई की जहां मंच में मौजूद रहे MGM, Medical college का चेयरमैन सह MLC Bihar, जनाब, Dilip Jaiswal ji, हिंदुस्तान का मशहूर शायर जनाब Imran Pratapgarhi ji, कोचाधामन में पूर्ब विधायक जनाब Master Mujahid Alam ji, किशनगंज जिला के क्रिकेट संघ के अध्यक्ष जनाब ji, तालिका मोतिहार पंचायत के मुखिया जनाब Abdur Rahman जी, मशहूर शायर Tabrez Hashmi ji, एव अन्य जन मान्य गण।।

Want your school to be the top-listed School/college in Kishanganj?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Telephone

Website

Address


Kishanganj
855107