08/04/2026
चिंता की बात है!
“आज Nihar Arts Classes की ओर से नए बैच के प्रचार-प्रसार हेतु एक प्रचार गाड़ी निकाली गई थी। इसी दौरान बाज़ार क्षेत्र में, जहाँ एक अन्य कोचिंग संस्थान भी स्थित है, उस संस्थान के एक शिक्षक ने हमारे प्रचार कर रहे बच्चों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा लगाए जा रहे हैंडविल/पोस्टर को हटाकर फेंकने की कोशिश की, कहने लगा हमारे एरिया में ये सब मत लगाओ अपने तरफ करो, जबकि प्रचार सामग्री उनके संस्थान से दूरी पर लगाई जा रही थी। उसके संस्थान के किसी भी दीवार या गेट में नहीं लगी गई थी।
कोई एक शिक्षक कह कैसे सकता है कि हमारे एरिया में मत आओ प्रचार प्रसार करने लिए?
मेरे तरफ के कोई स्टूडेंट्स अगर उसके एरिया में जाकर पढ़ना चाहे तो क्या मुझे उस बच्चें को जाने से रोकना चाहिए.... नहीं कभी नहीं! पढ़ने वाला बच्चा तय करेगा कि उसे किसके पास पढ़ने के लिए जाना है और ये उस बच्चे की आजादी है और मैं उसकी आज़ादी पर रोक लगा नहीं सकता यही सही तरीका भी है।
उसी तरह से कोई भी संस्था की प्रचार की गाड़ी को दूसरे एरिया में प्रचार करने से कोई कैसे रोक सकता है? ये मेरा प्रश्न है!
किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान उसके शिक्षण, अनुशासन और संस्कार से होती है, न कि प्रतिस्पर्धियों के प्रचार को रोकने से। यदि प्रचार सामग्री उनकी निजी संपत्ति पर नहीं लगाई जा रही थी, तो उसे हटाना और बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार करना पूर्णतः अनुचित एवं गैर-पेशेवर आचरण है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का अर्थ है कि हर संस्था अपने कार्य, गुणवत्ता और परिणामों से स्वयं को बेहतर सिद्ध करे—न कि दूसरों को अपमानित करके। एक शिक्षक से अपेक्षा की जाती है कि वह संयम, शिष्टाचार और आदर्श व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करे।”