09/07/2025
उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन” प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (छठा बैच) का सफल समापन
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनगंज में दिनांक 24.06.2025 से 08.07.2025 तक आयोजित 15 दिवसीय स्ववित्तपोषित आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम “उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (CCINM)” के छठे बैच का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि इनपुट विक्रेताओं, उर्वरक डीलरों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को मृदा स्वास्थ्य, पोषक तत्व संतुलन, एवं वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी प्रदान कर उन्हें पैरा-एक्सटेंशन प्रोफेशनल्स के रूप में सशक्त बनाना है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. के. सत्यनारायण, एसोसिएट डीन एवं प्राचार्य, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज ने संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह में विशिष्ट उपस्थिति रही डॉ. संजय सहाय, अधिष्ठाता प्रभारी, एडवांस्ड सेंटर ऑन सेरीकल्चर, तथा डॉ. जे. पी. सिंह, अधिकारी प्रभारी, बागवानी अनुसंधान केंद्र, किशनगंज की। दोनों अधिकारियों ने प्रतिभागियों को कृषि नवाचार, पर्यावरणीय संरक्षण और तकनीकी जागरूकता के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मृदा परीक्षण, पोषक तत्व प्रबंधन, उर्वरक विधियाँ, जैविक-अजैविक स्रोतों का संतुलन, तथा टिकाऊ कृषि प्रथाओं से संबंधित विषयों पर गहन जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रायोगिक सत्रों, समूह चर्चाओं और विशेषज्ञ व्याख्यानों को शामिल किया गया।
प्रतिभागियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल उनके व्यवसाय के लिए उपयोगी रहा, बल्कि इससे उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मृदा एवं पोषण प्रबंधन को समझने में भी मदद मिली। उन्होंने शिक्षण विधियों, समन्वय एवं सामग्री की प्रशंसा की।
इस अवसर पर डॉ. भोलानाथ साहा, डॉ. मोहसीना, डॉ. वंदना, डॉ. लव कुमार, डॉ. हेना परवीन एवं श्री मनीष सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उर्वरक विक्रेताओं एवं कृषि सेवा प्रदाताओं को तकनीकी रूप से सक्षम, जानकारीपूर्ण, एवं किसान हितैषी सलाहकार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध हो रहा है।
प्रशिक्षण का विवरण: “उर्वरक डीलरों के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर सर्टिफिकेट कोर्स (CCINM)”
यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण कोर्स फर्टिलाइज़र डीलर्स, कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए है। इस कोर्स के माध्यम से उन्हें उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्व संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण जानकारी दी जाती है।
आवेदन के लिए पात्र:
• फर्टिलाइज़र डीलर्स
• कृषि व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति
• कृषि क्षेत्र में कार्यरत अन्य व्यक्ति
आवेदन कैसे करें:
इच्छुक युवक-युवतियाँ एवं किसान आधार कार्ड, 10वीं प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र की फोटोकॉपी और दो पासपोर्ट साइज फोटो के साथ आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क ₹12,500 को डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनगंज के बैंक खाते में NEFT/RTGS के माध्यम से जमा करना होगा। (UPI से भुगतान मान्य नहीं होगा।)
चयन प्रक्रिया:
उम्मीदवारों का चयन "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
डॉ. एस. सी. पॉल, विभागाध्यक्ष,
मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग,
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज
मोबाइल: 94707 66018
27/05/2025
किशनगंज में उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रशिक्षण का पाँचवाँ बैच शुरू
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनगंज के मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग द्वारा “उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर 15 दिवसीय स्व-वित्तपोषित आवासीय प्रमाणपत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाँचवें बैच का शुभारंभ आज हुआ। यह प्रशिक्षण 27 मई से 10 जून 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. सोहाने, निदेशक (विस्तार शिक्षा), बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. के. सत्यनारायण, एसोसिएट डीन-सह-प्रिंसिपल, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय किशनगंज उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र के दौरान डॉ. के. सत्यनारायण ने मुख्य अतिथि डॉ. आर. के. सोहाने को पुष्पगुच्छ को सम्मानित किया, वहीं डॉ. एस. के. दत्ता, विभागाध्यक्ष सस्य विज्ञान ने डॉ. के. सत्यनारायण को सम्मानित किया।
अपने प्रेरणादायक संबोधन में डॉ. आर. के. सोहाने ने कहा कि उर्वरक विक्रेताओं को केवल विक्रेता नहीं, बल्कि कृषि तकनीकी सलाहकार की भूमिका में सक्रिय होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया और प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को किसानों तक पहुंचाएं और टिकाऊ कृषि की दिशा में सहयोग करें। डॉ. एस. सी. पॉल ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों और उपयोगिताओं पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन के महत्व को समझने और उसे खेत स्तर पर लागू करने हेतु प्रोत्साहित किया। डॉ. के. सत्यनारायण, एसोसिएट डीन-सह-प्रिंसिपल, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज ने अपने संबोधन में कहा कि उर्वरक विक्रेता किसानों के सबसे पहले संपर्क बिंदु होते हैं, अतः उनका तकनीकी रूप से दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर डॉ. स्वराज दत्ता (विभागाध्यक्ष, सस्य विज्ञान), डॉ. हिना परवीन, डॉ. मोहसिना, श्री मनीष, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. वंदना कुमारी, तथा श्री मुकेश कुमार उपस्थित रहे।
यह प्रशिक्षण किशनगंज और पूर्णिया के विभिन्न प्रखंडों से आए 30 किसान इस पाठ्यक्रम में भाग ले रहे हैं, जो मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्व प्रबंधन में विशेषज्ञता हासिल करेंगे। प्रारंभिक सत्र में सभी 30 प्रतिभागियों ने क्रमवार अपना परिचय दिया और प्रशिक्षण से अपनी अपेक्षाओं को साझा किया। कार्यक्रम के समापन पर धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बी. एन. साहा, पाठ्यक्रम निदेशक, CCINM द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, आयोजकों और प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
21/05/2025
🌾 अंतरफसल नवाचार: बिहार में फसल की पैदावार दोगुनी, टिकाऊ खेती का संचार! 🌾
पूर्वी भारत के किसानों को सशक्त बनाने वाले कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत डॉ. कलाम कृषि कॉलेज के डॉ. स्वरज कुमार दत्ता को हार्दिक बधाई! 👏🌱
डॉ. स्वरज कुमार दत्ता, CIMMYT द्वारा संचालित और ACIAR द्वारा वित्तपोषित प्रोजेक्ट “बांग्लादेश, भूटान और भारत में व्यापक पंक्ति फसलों में ऐडिटिव इंटरक्रॉपिंग के माध्यम से टिकाऊ फसल उत्पादन” के प्रमुख अन्वेषक के रूप में, डॉ. कलाम कृषि कॉलेज, किशनगंज को सम्मान दिलाने के साथ-साथ यह दिखाया है कि कैसे उत्कृष्ट अनुसंधान ग्रामीण समुदायों को सशक्त बना सकता है।
डॉ. दत्ता मकई के साथ अल्पकालीन सब्जियों की अंतरफसलिंग को एक जलवायु-सहनीय और आयवर्धक अभ्यास के रूप में बढ़ावा दे रहे हैं, जो किसानों के खेतों में पहले से ही सकारात्मक परिणाम दे रहा है। 🌽🥬
डॉ. दत्ता बताते हैं कि, “किसानों को मकई की बुवाई में 60 सेमी की दूरी पर एकल पंक्तियाँ या 30 और 90 सेमी के अंतराल वाली युग्मित पंक्ति प्रणाली अपनाने का मार्गदर्शन दिया जाता है। इन पंक्तियों के बीच शुरुआती मौसम की सब्जियाँ जैसे गोभी, पालक या फलियाँ उगाई जाती हैं।”
किशनगंज के ठाकुरगंज के बुटीझाड़ी गांव में निर्मला देवी के छोटे से खेत में पिछले दो रबी (सर्दी) मौसमों से मकई की अंतरफसलिंग हो रही है।
👩🌾 निर्मला देवी गर्व से अपने हरे-भरे खेत की ओर इशारा करते हुए कहती हैं:
“गोभी की अच्छी कीमत मिली है और मुझे उम्मीद है कि मकई भी अच्छा प्रदर्शन करेगी। देखिए इसे — यह स्वस्थ और फल-फूल रही है।”
👨🌾 पास के छपाती गांव के कमल गणेश फसल विविधता के फायदे की पुष्टि करते हैं:
“एक ही खेत में दूसरी फसल होना एक सुरक्षा जाल की तरह है—अगर एक फसल असफल हो जाती है तो दूसरी से आमदनी हो ही जाती है।”
💡 ये किसान कहानियां विज्ञान आधारित, स्थानीय जरूरतों के अनुकूल नवाचारों के सशक्त प्रभाव को दर्शाती हैं—उत्पादकता बढ़ाना, जलवायु सहिष्णुता मजबूत करना और बिहार समेत अन्य क्षेत्रों के कृषि समुदायों को सशक्त बनाना।
🔗 निर्मला देवी और कमल गणेश जैसे किसानों की सफलता की कहानी पढ़ें:
https://www.cimmyt.org/blogs/double-harvest-income-intercropping/
Double the Harvest, Double the Income: Intercropping for Yield, Income and Security
In eastern India, smallholder farmers are transforming agriculture through CIMMYT-led intercropping innovations that boost income, improve nutrition, and build resilience against climate risks
06/05/2025
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज में "उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन" प्रशिक्षण चौथा बैच का सफल समापन (🎉
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनगंज में 15 दिवसीय स्व-वित्तपोषित आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का चौथा बैच (4th Batch) (21 अप्रैल - 5 मई 2025) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उर्वरक डीलरों की पेशेवर क्षमता को विकसित करना और उन्हें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में पैरा-एक्सटेंशन प्रोफेशनल्स के रूप में प्रशिक्षित करना था।
🌟 मुख्य अतिथि: डॉ. के. सत्यनारायण, एसोसिएट डीन एवं प्रिंसिपल, डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज ने उद्घाटन समारोह में उर्वरकों के संतुलित उपयोग और टिकाऊ कृषि के महत्व पर प्रकाश डाला।
📚 इस कोर्स में प्रशिक्षार्थियों को मृदा प्रबंधन, टिकाऊ कृषि तकनीकों और उर्वरक उद्योग से जुड़े नवीनतम पहलुओं पर गहन जानकारी दी गई।
🗣️ प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण बहुत ही उपयोगी और जानकारीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम की विषयवस्तु बेहद समृद्ध थी और उन्हें उर्वरक प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियाँ प्राप्त हुईं। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण की व्यवस्था, विशेषज्ञों की प्रस्तुति, और व्यावहारिक जानकारी को अत्यंत सराहनीय बताया।
🏆 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया:
मासूम रेजा
सूरज तिवारी
Md. बेलाल
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं समन्वयक डॉ. एस. सी. पॉल ने सभी प्रशिक्षार्थियों को कृषि क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर डॉ. जे. पी. सिंह, डॉ. भोलानाथ साहा, डॉ. मोहसीना, डॉ. श्वेता, डॉ. सोना एवं श्री मनीष सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
🎯 यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और उर्वरक डीलरों को अधिक कुशल और जागरूक बनाएगा।
प्रशिक्षण का विवरण: “उर्वरक डीलरों के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पर सर्टिफिकेट कोर्स (CCINM)”
यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण कोर्स फर्टिलाइज़र डीलर्स, कृषि व्यवसाय से जुड़े लोगों और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले सभी व्यक्तियों के लिए है। इस कोर्स के माध्यम से उन्हें उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्व संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण जानकारी दी जाती है।
आवेदन के लिए पात्र:
• फर्टिलाइज़र डीलर्स
• कृषि व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति
• कृषि क्षेत्र में कार्यरत अन्य व्यक्ति
आवेदन कैसे करें:
इच्छुक युवक-युवतियाँ एवं किसान आधार कार्ड, 10वीं प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र की फोटोकॉपी और दो पासपोर्ट साइज फोटो के साथ आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क ₹12,500 को डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनगंज के बैंक खाते में NEFT/RTGS के माध्यम से जमा करना होगा। (UPI से भुगतान मान्य नहीं होगा।)
चयन प्रक्रिया:
उम्मीदवारों का चयन "पहले आओ, पहले पाओ" के आधार पर किया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
डॉ. एस. सी. पॉल, विभागाध्यक्ष,
मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग,
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज
📞 मोबाइल: 94707 66018
21/04/2025
🌱 किशनगंज में उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रशिक्षण का चौथा बैच शुरू 🌱
मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग द्वारा डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी, किशनगंज में 21 अप्रैल से 5 मई 2025 तक आयोजित “उर्वरक विक्रेताओं के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन” पर 15 दिवसीय स्व-वित्तपोषित आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का चौथा बैच आज से प्रारंभ हो गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. एस. सी. पॉल द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. के. सत्यनारायण (एसोसिएट डीन सह प्रिंसिपल, डीकेएसी) का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई। इसके उपरांत मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।
डॉ. एस. सी. पॉल (नोडल अधिकारी एवं पाठ्यक्रम समन्वयक) ने प्रतिभागियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने और संतुलित उर्वरक उपयोग की दिशा में सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उर्वरक व्यवसाय की गहन समझ प्रदान करेगा, जिससे किसान एवं कृषि उद्योग दोनों को लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने क्रमवार अपना परिचय दिया, जिसमें उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि, अनुभव एवं प्रशिक्षण से अपेक्षाओं को साझा किया। इससे आपसी संवाद और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर दिशा मिली।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उर्वरक कृषि का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जिसका वितरण प्रमुख रूप से विक्रेताओं के माध्यम से होता है। ऐसे में यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विक्रेताओं की पेशेवर क्षमता को सशक्त करने और वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
मुख्य अतिथि डॉ. के. सत्यनारायण (एसोसिएट डीन सह प्रिंसिपल, डीकेएसी) ने अपने संबोधन में कहा कि उर्वरक कृषि का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जिसका वितरण प्रमुख रूप से विक्रेताओं के माध्यम से होता है। ऐसे में यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम विक्रेताओं की पेशेवर क्षमता को सशक्त करने और वैज्ञानिक उर्वरक प्रबंधन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर डॉ. स्वराज दत्ता (विभागाध्यक्ष, सस्य विज्ञान), डॉ. हिना परवीन, डॉ. मोहसिना, श्री मनीष, डॉ. सोना कुमार, डॉ. देवेंद्र मंडल, डॉ. रीना रॉय, डॉ. श्वेता कुमारी तथा डॉ. भोला नाथ साहा भी उपस्थित रहे।
किशनगंज और पूर्णिया के विभिन्न प्रखंडों से आए 30 किसान इस पाठ्यक्रम में भाग ले रहे हैं, जो मृदा स्वास्थ्य और पोषक तत्व प्रबंधन में विशेषज्ञता हासिल करेंगे।
25/10/2024
🎉🎉
डॉ मोहसिना अंजुम सहायक प्राध्यापक, मृदा विज्ञान, डा. कलाम कृषि महाविद्यालय किशनगंज को "द मोजेक कम्पनी फाउन्डेशन द्वारा आउटस्टैंडिंग डॉक्टरल रिसर्च फॉर वूमेन" अवार्ड से सम्मानित किया गया। ज्ञात हो कि मोजेक कम्पनी (NYSE: MUS) फास्फेट और पोटाश के उत्पादन में विश्वभर में अग्रणी उत्पादक है। इस कम्पनी का मुख्यालय अमेरिका में स्थित है। यह पुरस्कार महिला वैज्ञानिकों द्वारा किए गए उत्कृष्ट पी0 एचo डीo शोध कार्यो के लिए दिया जाता है । इस पुरस्कार को दिनांक 24/10/2024 को गुरुग्राम में कार्यक्रम के दौरान दिया गया। पुरस्कार स्वरूप डा० मोहसिना अंजुम को 1.5 लाख रू, ब्लेजर, सर्टिफिकेट एवं गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। माननीय कुलपति डॉ डीo आरo सिंह ने इस पुरस्कार को प्राप्त करने पर हर्ष जताते हुए बधाई दी तथा उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां पाने वाले वैज्ञानिकों को विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया जायेगा तथा उन्होंने अन्य वैज्ञानिकों से भी आह्वान किया कि इस तरह के अवार्ड लाकर विश्वविद्यालय का नाम आगे बढ़ाएं । #बिहार_कृषि_विश्वविद्यालय
08/09/2024
डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज में 8 सितंबर से 22 सितंबर, 2024 तक "उर्वरक विक्रेताओं के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन" पर बामेती पटना और मैनेज हैदराबाद द्वारा प्रायोजित 15 दिवसीय आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य उर्वरक डीलरों की पेशेवर योग्यता को बढ़ाना और उन्हें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन में पैरा- प्रसार पेशेवरों के रूप में विकसित करना है। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, किशनगंज के सह अधिष्ठाता एवं प्राचार्य, डॉ. के. सत्यनारायण ने किया। उन्होंने इस प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि अधिकांश उर्वरक डीलरों के पास कृषि में औपचारिक शिक्षा नहीं है। उर्वरक कृषि में महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है और ज्यादातर डीलरों द्वारा ही इसका विपणन किया जाता है। इसलिए, उन्हें कृषि पर तकनीकी ज्ञान प्रदान करना आवश्यक है, जिसमें मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए विशेष संदर्भ और वैज्ञानिक सिफारिशों पर आधारित सलाह शामिल हैं। इस आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम में बिहार के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों के 47 महिला निदेशक भाग ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन और समन्वय डॉ. शोजी लाल बैरवा, डॉ. मोहसिना, डॉ. नागार्जुन, , डॉ. वंदना, डॉ. श्वेता आदि द्वारा किया जा रहा है।
21/08/2024
A BAMETI, Patna sponsored three-day residential training programme on “Scientific Production and Marketing of Dragan Fruit” is being held at DKAC, Kishanganj from 21.08.2024 to 23.08.2024. The program was inaugurated by the Chief Guest, Associate Dean-cum-Principal DKAC Kishanganj, Dr. K. Sathyanarayana, along with Dr. J. P. Singh, Nodal Officer HRC, Kishanganj, and Dr. S. L. Bairwa, Training Incharge, DKAC, kishanganj. A total of 20 farmer and 10 representative of BAMETI from 10 districts of Bihar are participating in this training programme.
21/08/2024
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के आहवान पर दिनांक 16 अगस्त से 22 अगस्त, 2024 के दौरान पूरे देश में गाजरघास जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जाना है। अरोक्त सप्ताह मनाने के क्रम में आज दिनाँक 21 अगस्त, 2024 को डा० कलाम कृषि महाविद्यालय किशनगंज में "गाजर घास जागरूकता दिवस" मनाया गया विदित हो कि गाजरघास (पार्थेनियम हिस्टोफोरस) जिसे आमतौर पर कांग्रेस घास, सफेद टोपी, असाडी गाजरी, चटक चांदनी आदि नामों से जाना जाता है। यह एक विदेशी आक्रामक खरपतवार है। गाजरघास को सबसे अधिक खतरनाक खरपतवारों में गिना जाता है क्योप मनुष्यों और पशुओं में त्वचा रोग, अस्थमा और क ब्रोंकाइटिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओ का कारण वनता है।
गाजर घास के उन्मूलन कार्यक्रम के द्वारा आज डा० कलाम कृषि महाविधालय में व्यापक स्तर पर गाजर घास को रोकने के तरीको, उससे होने वाली विभिन्न प्रकार की हानियों पर चर्चा की गयी। कार्यक्रम के वाद महाविद्यालय में गाजर घास के उन्मूलन एवं गाजर घास को नष्ट करने के लिए सहायक प्रध्यापको, हाल एवं छात्राओं ने व्यापक तौर पर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में महाविधालय के विभागाध्यक्ष डा. अयन अली पात्रा, डा० जे० पी० सिंह, डा. शॉजीलाल बैरवा सहित सारे वैज्ञानिक एवं छात्र-छात्राए आदि मौजूद रहे।
15/08/2024
78th Independence Day was celebrated at Dr. Kalam Agricultural College. Chief guest Dr. K. Sathyanarayana, Associate Dean cm Principal, hoisted the national flag. After that, the Chief guest addressed the gathering and paid homage to bravery and courage of the great leaders of India. The programme ended with certificate distribution to students securing the highest OGPA in their semesters. The programme was successful with the active participation of students, and all the faculty members of DKAC, HRC and ACS.
16/07/2024
A five-day training programme on “Digital Data Collection by Kobo Toolbox” is being held at DKAC, Kishanganj from 16.07.2024 to 20.07.2024 which was inaugurated by Chief Guest, Dr. K. Satyanarayana, Associate Dean-cum-Principal of DKAC, Kishanganj. The training programme is being organized under ACIAR, Australia funded international project on ‘Additive intercropping in wide row crops for resilient crop production in Bangladesh, Bhutan and Eastern India’ with Science lead from CIMMYT. A total of 10 personnel affiliated to different farmers’ producer organizations along with few students are participating in this training. This training programme is being organized and coordinated by Dr. Swaraj Kumar Dutta and Dr. Arindam Nag with active participation of other DKAC faculties.
10/07/2024
Smt. Megha Yadav ( D.F.O ) Araria and Dinesh Kumar yadav (R.O.F) Kishanganj visited Dr. Kalam Agricultural College, Kishanganj on the occasion of Van Mahotsava for plantation drive. They also visited the Organic Input Production and Demonstration Unit and ATIC. They appreciated the ongoing work of DKAC. On this occasion, Associate Dean cm Principal DKAC, Dr. K. Sathyanarayana and other faculty members of DKAC were present.